Sat. Feb 23rd, 2019

रुमानी मिजाज के शायर गुलजार .हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया ।

radheshyam-money-transfer

 

एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी,
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तनहाई भी।

आदतन तुम ने कर दिए वादे

आदतन हम ने ए’तिबार किया।

आप के बा’द हर घड़ी हम ने

आप के साथ ही गुज़ारी है ।

अपने माज़ी की जुस्तुजू में बहार

पीले पत्ते तलाश करती है ।

भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों में

उजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं ।

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई

जैसे एहसाँ उतारता है कोई ।

हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते

वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते ।

हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में

रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of