Sat. Apr 20th, 2019

लोकजीवन के उत्साह का पर्व है होली, ब्रज संस्कृति की संबाहक है होली : गोपाल शरण शर्मा

radheshyam-money-transfer
गोपाल शरण शर्मा
-फर्स गली, बिहारी पुरा
वृन्दावन,मथुरा(उ.प्र)
वृन्दावन,मथुरा | ब्रज की होली न सिर्फ भारत में बल्कि सम्पूर्ण विश्व में विख्यात है।लोक जीवन में जितना उत्साह इस त्यौहार को लेकर है उतना शायद ही किसी और को लेकर हो।ब्रज की देवालयी संस्कृति में यह उत्सव बसन्त पंचमी से प्रारम्भ होकर फागुन मास की पूर्णिमा तक चलता है।  ब्रज के रसिक संतो के वाणी साहित्य में,  भक्तिकाव्य,आधुनिक हिंदी काव्य एवं मुसलमान भक्तों द्वारा होली का गायन खूब किया गया है। ब्रज के परम रससिक्त सन्त स्वामी हरिदास जी,स्वामी हरिराम व्यास जी,एवं स्वामी हित हरवंश जी, अष्टछाप के कवियों के सूर्य महाकवि सूरदास,मीराबाई सहित अनेक मुसलमान कवियों जिनमे अमीर खुसरो,नजीर आदि प्रमुख है ने भी होली के विभिन्न पक्षों को ध्यान में रख कर काव्य रचनाएँ की।
ब्रज संस्कृति के प्रत्येक उत्सव को प्रिया-प्रियतम के साथ जोड़कर मनाया जाता है। ब्रज भगवान के माधुर्य रस की भूमि है।इस माधुर्य रस को पाने के लिए जहां ऋषि-मुनि ,देवगण तरसते है वह ब्रजबासियों को सहज ही सुलभ होता है।इस माधुर्य रस के प्रवाहक नटवर नागर कृष्ण कन्हैया है और होली लीला उन राधा माधव की केलि का सलौना सरूप है।
प्राचीन समय से ही होली का त्यौहार ब्रज का रसयुक्त त्यौहार रहा है। ब्रज के सभी स्त्री-पुरुष,बालक-वृद्ध इसे बड़े उत्साह से मनाते है।भारतीय संस्कृति में होली का प्रमुख स्थान है।  इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह समाज में प्रेम और सदभाव के सन्देश को प्रसारित करता है।ब्रज नंदनंदन भगवान श्रीकृष्ण एवं उनकी आल्हादिनी शक्ति राधारानी की लीला स्थली रहा है। नंदगांव,बरसाना,गोकुल वृन्दावन,मथुरा आदि उनकी होली लीला के प्रमुख केंद्र रहें है।ब्रजभाषा के कवियों ने राधाकृष्ण की होली लीला जो वर्णन अपने काव्य में किया है वह आनंद प्रदान करने वाला है।
अरे रसिया बड़े भाग सौ आयौ महीना फागुन कौ।
ये मस्त महीना फागुन कौ
     बसन्त पंचमी के दिन से ही ब्रज में रसमई होली का आगाज हो जाता है।जब सभी लोग ऋतुराज बसन्त का स्वागत करते है उसी समय उन के मन में फाग की फगनौटी समा जाती है।ब्रज के देवालयों में होली से जुड़े गीतों,पदों का गायन प्रारम्भ हो जाता है।फागुन का महीना ब्रजबासियों को को मस्त कर देता है
मस्ती की ऐसी तरंग उठती है कि सभी उसमे सराबोर हो जाते हैं। ब्रज में एक लोकोक्ति प्रसिद्ध है कि-होरी में जेठ हू कहे भाभी। कहने का अभिप्राय यह है कि होली का उत्साह और उमंग ऐसी है कि यहां सब लोग मर्यादा तोड़ कर निश्छल भाव से एक दूसरे के साथ होली खेलते हैं।
ब्रज में होली की खूब धूम रहती है। यहां की कहावत है “कैसा ये देश निगोड़ा,जगत होरी ब्रज होरा”। बात अगर वृन्दावन की होली की करें तो यहां न सिर्फ होली खेली जाती है बल्कि गाई भी जाती है। विभन्न वैष्णव सम्प्रदायों के प्रमुख मंदिरों में समाज गायन के समय रसिक आचार्यों की वाणी का पाठ किया जाता है।
वृन्दावन की होली की पृष्ठभूमि में वस्तुतः स्यामा-कुंजविहारी की होली लीला ही है।हरिदासी सम्प्रदाय के आचार्य पीताम्बर देव जी कह रहे हैं-
“पिया अबकैं तौ विपुन निरन्तर हो हो हो हो होरी है।
श्री ललिता हम तुमकौ दीनी रसिक हमारी ओरी हैं।।”
रंग भरनी एकादशी से ब्रज के मंदिरों में गीली होली का प्रारम्भ हो जाता है। ठाकुर जी अपने रंग महल से भक्तों के साथ होली खेलने आरम्भ करते है।
“होली रंग महल में खेलत हैं पिय प्यारी”
भगवान कृष्ण की होली का वर्णन करते हुए राधाबल्लभ सम्प्रदाय के साधक हित परमानंद दास जी कहते है-“श्री हित जू के रस बस दोऊ, प्यारे स्याम वरन तन गोरी”।
वृन्दावन की होली जहां भक्ति के धरातल पर आकर अपने आध्यात्मिक पक्ष को उजागर करती है वहीं लोक जीवन के साथ मिलकर इस त्यौहार को जीवंतता मिलती है।होली ने ब्रज के लोकगीतों में प्रमुखता के साथ अपना स्थान प्राप्त किया। लोकगीतों में वृन्दावन की होली की बानगी देखते ही बनती है-
“वृन्दावन फाग मच्यौ भारी।
वृन्दावन की गोरी नारी, टूटे सार फ़टे सारी।।”
ब्रज में होली के समय मस्ती चरम सीमा पर होती है। यहां तो आलम यह होता है कि राजी राजी नही तो गैर राजी सबको होली खेलनी ही पड़ती है।
” आज बिरज में होली रे रसिया
होरी तो होरी बरजोरी रे रसिया”
होली के त्यौहार ने हिन्दू-मुस्लिम भेदभाव को समाप्त किया है। नजीर के काव्य में होली की अनोखी छटा देखने को मिलती है-
“नंदगांव में जब यह ठाठ हुए,बरसाने में भी धूम मची।
श्री किशन चले होली खेलने को,ले अपने ग्वाल औ बाल सभी।।”
होली प्रेम और सौहार्द का त्यौहार है।अमीर-गरीब,ऊंच नीच के भेदभाव को भुला कर होली का यह रंग भरा त्यौहार मनाते है।
                                    -फर्स गली, बिहारी पुरा
                                     वृन्दावन,मथुरा(उ.प्र)

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of