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विपक्षी दलों का विरोध सभा,राष्ट्र को खतरा मे लाने का ग्राईण्ड डिजाईन का आरोप ।

काठमाडू, २६ माघ । कांग्रेस, एमाले सहित कई विपक्षी दलों ने एमाओवादी व्दारा कार्यरत प्रधानन्यायाधीस को प्रधानमन्त्री बनाने का प्रस्ताव को न्यायालय के उपर सीधा राजनीतिक हस्तक्षेप के रुप मे व्याख्या किया है ।
काठमाडू के टुडीखेल के खुल्ला मञ्च मे आज आयोजित विपक्षी दलों का विरोध सभा मे सभी शीर्ष नेताओं ने एमाओवादी पर न्यायालय को प्रभावित करने का षर्यन्त्र करने का आरोप लगाया है ।
कांग्रेस सभापति सुशील कोइराला ने कहा कि द्वन्द्वकालीन मुद्दा को प्रभावित बनाने मे एमाओवादी सक्रिय है । उन्होने कहा कि द्वन्द्वकालीन अपराध के दोषी कोइ भी उन्मुक्ति नही पायेगी । उन्होने एमाओवादी अब न्यायापालिका पर भी राजनीतिक हस्तक्षेप करने नीति बनाने का आरोप लगाया है ।
सुशिल कोइराला चिन्ता जताते हुये कहा कि माओवादी और मधेसबादी दलों ने राष्ट्र को खतरा मे लाने का  ग्राईण्ड डिजाईन कररहा है ।
उन्होने कहा कि सम्झाते सम्झाते नही नमानने से राजतन्त्र भी समाप्त हो गया इसितरह अगर माओवादी भी राजा के तरह सर्वसत्ताबाद लाद्ने का कोशिस किया तो स्वत: समाप्त हो जायेगा । उन्होने तर्क दिया कि अगर पानी के प्वाह को रोका गया तो वह वहा दहा कर लेजायेगी । संसार के सभी तानाशाहा समाप्त हो गया है । विपक्षी दलों व्दारा सुरु किये गये आन्दोलन सत्ताप्राप्ति के लिये नही कहते हुये कोइराला ने सरकार को आन्दोलन से ही हटाने की बात कही ।
एमाले के अध्यक्ष झलनाथ खनाल ने कहा कि एमाओवादी के विभिन्न प्रकार के षड्यन्त्र मे हमलोगों को नही पडना है । उन्होने सिंहदरबार और बालुवाटार को अपराधी छिपाने का स्थान के रुप मे संज्ञा दिया । अध्यक्ष खनाल ने कहा कि एमाओवादी के नेता  कारबाइ मे परने के डर से डरा हुआ है ।
कांग्रेस उपसभापति रामचन्द्र पौडेल ने कहा कि संघीयता विरोधी एमाओवादी ही है और संघीयता के नाम पर एमाओवादी जातीय राजनीति कर रहा है ।
एमाले नेता केपी ओली ने लोकतन्त्र और राष्ट्र को  राजनीतिक समस्या से निकालने के लिये विपक्षी दलों का आन्दोलन होने का दाबा किया ।
कांग्रेस नेता शेरबहादुर देउवा ने लोकतन्त्र की रक्षा के लिये वर्तमान सरकार का वहिर्गमन अनिवार्य बताया ।
राष्ट्रिय जनामोर्चा के अध्यक्ष चित्रबहादुर केसी ने स्वतन्त्र न्यायापालिका मे हस्तक्षेप करके एमाओवादी ने अपने खिलाप रहे मुद्दा को प्रभावित करना खोजा है ।
इससे पहले राजधानी के विभिन्न स्थान से कांग्रेस, एमाले, राप्रपा, राष्ट्रीय जनमोर्चा लगायत कइ दलों नेजुलुस निकालते हुये सरकार के विरोध नारावाजी कया था ।
माघ–६ गते दैलेख से सुरु हुआ विपक्षी दलों का यह आन्दोलन का पहला चरण के सडक संघर्ष आज समाप्त हो गया है । उनलोगों ने फिर माघ–२९ पत्रकार सम्मेलन करके दुसरा चरणका कार्यक्रम सार्वजनिक करने की बात बतायी है ।

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