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विपद की घड़ी में सत्तापक्ष और विपक्ष मिलकर आगें बढना जरुरी हैं : गृहमंत्री शर्मा


हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, १७ अगस्त ।
गृहमन्त्री जनार्दन शर्मा ने कहा— “देश में राष्ट्रिय संकट की घड़ी में सत्ता पक्ष और विपक्ष में विभाजित होने की बजाए, सामूहिक प्रयासों के लिए एकताबद्ध होकर आगे बढ़ना जरूरी है ।”

व्यवस्थापिका संसद की बैठक में प्रमुख प्रतिपक्षी नेकपा (एमाले) द्वारा प्रस्तुत सार्वजनिक महत्व के प्रस्ताव के ऊपर बहस में उठे हुए सवालों के जवाब देते हुए गृहमंत्री शर्मा ने ये बात कही ।

ज्ञात हो कि कल की संसद बैठक में प्रमुख प्रतिपक्षी नेकपा एमाले के नेता भीम रावल ने भारत की ओर बनाए गए बाँध और तटबंध की वजह से नेपाल में बाढ़ का कहर ढाने से जोड़कर सार्वजनिक महत्व का प्रस्ताव पेश किया था ।

मौजूदा बाढ़–भूस्खलन लगायत आपदा से जोड़ते हुए सरकार को झकझोरने के विपक्षी के कदम का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि विगत में सन्धि सम्झौतों के दौरान ध्यान न देने और बस्ती विकास को लेकर सचेत न होने के कारण प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं ।

बाढ़ भूस्खलन और डुबान की वजह से जान गँवाने वालों के प्रति श्रद्धान्जलि व्यक्त करते हुए गृहमंत्री शर्मा ने कहा कि प्रति मृतक परिवार को दो लाख की दर से मुआब्जा देने की सरकार घोषणा कर चुकी है ।

बाढ़, भूस्खलन और डुबान से देश के विभिन्न जिलों को मिलाकर एकलाख ४० हजार ज्यादा भौतिक पूर्वाधारों में क्षति पहुँची होने की जानकारी साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सार्वजनिक और व्यक्तिगत सम्पत्ति के नुकसान का विवरण संकलन किया जा रहा है ।

इससे पूर्व व्यवस्थापिका–संसद् की आज की बैठक में मौजूदा बाढ़, भूस्खलन और डुबान से जोडकर प्रमुख प्रतिपक्षी दल एमाले के जरुरी सार्वजनिक महत्व के प्रस्ताव के ऊपर हुई बहस में ५० से ज्यादा सांसदों ने हिस्सा लिया था ।

प्रमुख प्रतिपक्षी दल के सांसदों ने प्रस्ताव का बचाव करते हुए अपनी अपनी धारणा रखी थी, वहीं सत्तापक्ष के सांसदों ने प्रस्ताव को, पीडितों के उद्धार और राहत के कामों में एकजुट होने के समय कौन अव्वल की भावना से राजनीतिक रङ देकर लाया गया बताते हुए औचित्यहीन करार दिया ।

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