Fri. Oct 19th, 2018

विभिन्न देशों के दर्जनों साहित्यकार द्वारा रचित कविता संग्रह ‘हिन्दी की विश्व यात्रा’ लोकार्पण

काठमांडू, ५ सितम्बर । विभिन्न देशों के ४ दर्जन साहित्यकारों की संयुक्त कविता संग्रह ‘हिन्दी की विश्व यात्रा’ काठमांडू में लोकार्पण किया गया है । नेपाल भारत पुस्तकालय में शुक्रबार आयोजित एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम में कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि तथा संस्कृतिविद् एवं शताब्दी पुरुष सत्यमोहन जोशी के हाथों उक्त पुस्तक लोकार्पण किया गया । कार्यक्रम में नेपाल और भारत के दर्जनों साहित्यकार सहभागी रहे ।
कार्यक्रम के विशेष अतिथि भारतीय दूतावास के डिपुटी चिफ ऑफ मिसन (डीसीएम) डा. अजय कुमार ने कहा कि ‘हिन्दी की विश्व यात्रा’ कविता संग्रह एक महत्वपूर्ण साहित्यिक कृति है, जो विश्व के कई देशों के बीच रहे आपसी मजबूत संबंध का एक ‘प्रतीक’ है । डीसीएम डा. अजय ने कहा कि हिन्दी, नेपाली, मैथिली, भोजपुरी, अवधी जैसे कई भाषाओं की भातृ भाषा एक ही है– संस्कृत । उनका मानना है कि जिन भाषाओं की भातृ–भाषा संस्कृत है, उन सभी को इकठ्ठा होना जरुरी है, तब भी हम लोग अपनी संस्कृति को सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं । उन्होंने कहा कि भाषिक सामनता के कारण ही नेपाल और भारत के बीच मजबूत सम्बध बना रहा है ।


कार्यक्रम में समीक्षात्मक मन्तव्य व्यक्त करते हुए भीम चालिसे ने कहा कि लोकार्पित कृति ‘हिन्दी की विश्व यात्रा’ में समावेश विभिन्न देशों के दर्जनों साहित्यकारों की रचना से ही पता चलता है कि हिन्दी एक ऐसी भाषा है, जो विश्व के कई देशों में बोली जाती है । उन्होंने कहा– ‘पुस्तक में लगभग ५० साहित्यकारों की रचना हैं, जो विभिन्न देश, जातजाति, भाषाभाषी, वर्ग, समुदाय और संस्कृति से प्रतिनिधित्व करते हैं । उन लोगों ने अपने ही समाज और संस्कृति का अनुभव हिन्दी भाषा में व्यक्त किया है । पुस्तक में समावेश साहित्यकार जो–कोई भी समाज और जाति से हो, लेकिन उन लोगों की कविताओं में मानव हृदय की आवाज सुनाई देती है ।’ समीक्षक चालिसे को मानना है कि साहित्य से ही आम लोग विभिन्न नयाँ विषयवस्तु के बारे में ज्ञान प्राप्त कर सकेत हैं ।
कार्यक्रम का मञ्च संचालन भारतीय दूतावास के अतासे रघुवीर शर्मा ने किया । कार्यक्रम सञ्चालन के दौरान उन्होंने कहा कि कवि तथा साहित्यकारों की सृष्टि ब्रह्मा की सृष्टि से भी आगे होती है । उनका मानना है कि प्रस्तुत कविता संग्रह ‘हिन्दी की विश्व यात्रा’ उसी में से एक कृति है । कार्यक्रम में गंगाप्रसाद अकेला, राम दयाल राकेश, राजेश्वर नेपाली, रुद्र अधिकारी, जैसे विभिन्न साहित्यकार मौजूद थे । कार्यक्रम में अतिथि के रुप में आमन्त्रित विभिन्न साहित्यकारों को ‘गान्धी साहित्य’ प्रदान किया गया।


शैली साहित्य समाज के अध्यक्ष मञ्जुश्री प्रधान की सभाध्यक्ष में सम्पन्न कार्यक्रम में सोही संस्था के उपाध्यक्ष राम कुमार पंडित ने स्वागत मन्तव्य व्यक्त किया । कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यकारों ने उपस्थित स्रोता–गण को अपनी रचना–कविता वाचन कर सुनाए थे । लोकर्पित पुस्तक ‘हिन्दी की विश्व यात्रा’ को डॉ. राजेन्द्र परदेशी और डॉ. भाष्कर शर्मा ने सम्पादन किया है ।

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