Wed. Nov 21st, 2018

विराट दरबार हमारी ऐतिहासिक धरोहर

सिकन्दर यादव:प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर के मामले में नेपाल धनी है । जिस तरह हिमाल, पहाड और तर्राई नेपाल की पहचान है, उसी तरह देश के विभिन्न भाग में पाए जाने वाले ऐतिहासिक, प्राचीन, राजदरबार देश की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में ली जा सकती है । मोरङ जिला के सदरमुकाम विराटनगर के नजदीक बुधनगर गाविस में एक प्राचीन दरबार का भग्नावशेष अवस्थित है । विराटनगर-२२ मिल्स एरिया रानी से २ किलोमिटर दक्षिण की ओर बुद्ध नगर गाविस वार्ड-५ भेडियारी में महाभारतकालीन विराट राजा का पौराणिक महाभारतकालीन दरबार था । उसके अनेक अवशेष यहाँ वर्षों से इधर-उधर लावारिस बिखरे पडÞे हंै । उस ऐतिहासिक स्थल में पहुचने के लिए आप आपने निजी सवारी सधान से नहीं तो आप पैदल यात्रा भी कर सकते हैं । पुरातात्विक महत्व के इस ऐतिहासिक स्थल के दक्षिण और पश्चिम की ओर भारत के साथ सीमा जुडी हर्ुइ हैं ।
इस स्थान का स्थलगत भ्रमण करने वाला कोई भी सजग व्यक्ति सहज ही अनुमान कर सकता है कि इस स्थान के संरक्षण की ओर सम्बन्धित निकाय का ध्यान नहीं गया है । यहाँ यत्रतत्र बिखरे हुए प्राचीनर् इंट, प्राचीन इनार और पोखर, पुराने भवन के जग आदि के अवशेष विराट राजा का पौराणिक दरबार यही था, इस बात को प्रमाणित करते हैं । स्मरणीय है- विराट राजा के इसी दरबार में पाण्डवों ने अपने निर्वासन काल में एक वर्षगुप्त रूप से बिताया था ।
इस स्थल का संरक्षण और यहाँ तक पहुँचने के लिए सुविधासम्पन्न साधन, रास्ते, आदि के निर्माण की जिम्मेवारी पुरातत्व विभाग और सम्बन्धित अन्य संस्थाओं का परमदायित्व है । इस दायित्व का निर्वाह करते हुए र्सवप्रथम पुरातत्व विभाग की ओर से पर्ूवप्रधानमन्त्री मातृकाप्रसाद कोइराला के नेतृत्व में वि.सं. २०२७ साल में पुरातत्व विभाग के तत्कालीन महानिर्देशक तारानाथ मिश्र को उस स्थल में उत्खनन् करने की जिम्मेदारी दी गई थी । उस समय भेडियारी स्थित एक पुराने ढूह का उत्खनन् किया गया था । जिससे प्राचीन मन्दिर का अवशेष प्राप्त हुआ था । उस में प्रयोग की गईर् इंटे और अण्डाकार गर्भगृह जो ४७ फिट चौडा और ७ फिट ऊँचा चबूतरे पर अवस्थित शुंगकालीन मन्दिर का भग्नावशेष प्राप्त हुआ । यह एक महत्वपर्ूण्ा उपलब्धि थी । भेडियारी में प्राप्त विराट राजा के दरबार के प्राचीन अवशेषों का बहुत बडÞा ऐतिहासिक महत्व है ।
विभिन्न धर्मशास्त्रों में वणिर्त प्रसंग को देखा जाए तो विद्वानों ने विराट राजा की राजधानी कह कर इस इलाके का उल्लेख किया है, जो महाभारतकाल से सम्बन्धित है । विक्रम सम्वत् २०२७ साल में जो उत्खनन् हुआ, उस में प्राप्त वस्तुओं में ४० पञ्चमार्का मुद्राएं भी हैं । जिन्हें पुरातत्व विभाग ने अपने राष्ट्रीय संग्राहलय में संग्रहित किया है । उक्त मुद्राएं इ.पू. प्रथम और द्वितीय शताब्दी के आसपास की होने की सम्भावना बताई गई हैं । इस स्थल में बहुत सारी ऐतिहासिक महत्व की प्राचीन चीजंे प्राप्त हर्ुइ हैं, जिन का राष्ट्रीय स्तर पर अनुसन्धान नितान्त आवश्यक है ।
पञ्चम वेद कहलाने वाली महाभारत के अनुसार उस क्षेत्र में पाण्डवों ने गुप्तवास किया था । और वह गुप्तबास विराट राजा के दरबार में हुआ था । प्रचलित किम्बदन्ती के अनुसार विराट राजा के दरबार में पाण्डवों की गतिविधियों को जानने के लिए दुर्योधन ने अपना गुप्तचर भेजा था । गुप्तचर को भेदिया भी कहते हैं । उसी के आधार पर उस जगह का नाम भेडियारी हुआ है । भेडियारी में वि.सं. २०२७ साल में नेपाल पुरातत्व विभाग ने जो उत्खनन् किया था, उस में ४० पञ्चमार्ग नामक चाँदी के सिक्के मिले थे । जिस ढूह का उत्खनन् हुआ, उस को इसापर्ूव काल का अवशेष माना गया है । विराट राजा के दरबार क्षेत्र के मन्दिर परिसर में उत्खनन् करते समय जो भग्नावेश मिले, उन में आधा दर्जन से ज्यादा पोखरे प्राप्त हुए थे । उन पोखरों को धर्ना, किचक बध, भन्सिया, थारधोवा, गोहिया दिघरी और बहरवा पोखरी नाम दिया गया है ।
विराटनगर उपमहानगरपालिका के साथ जुडेÞ इस गाविस में पर्याप्त पर्यटकीय सम्भावनाएं निहित हैं । फिर भी यातायात की असुविधा और रखरखाव की कमी के चलते इसका बेहाल है । वर्तमान में इस क्षेत्रीय संस्था के अध्यक्ष कमलकिशोर यादव हैं । विराट दरबार क्षेत्र को प्रमुखता देते हुए नेपाल सरकार को इसे पर्यटकीय क्षेत्र बनाने में रुचि दिखानी चाहिए । यहाँ से प्राप्त प्राचीन वस्तुओं का संरक्षण होना जरूरी है । इस ऐतिहासिक जगह में जाने के लिए आवश्यक सडक और सवारी सधान की व्यवस्था सरकार की ओर से अवश्य होनी चाहिए । व्
प्राप्त महत्वपर्ूण्ा ऐतिहासिक
वस्तुओं की सूची
१. पत्थर की बनी प्राचीन नाप-तौल की सामग्री ।
२. पत्थर के प्राचीन शिलालेख ।
३. बहुमूल्य हार, जिन में मुंगे जडÞे हुए हैं ।
४. मिट्टी की प्राचीन गोलियां ।
५. भद्रिका देवी की मर्ूर्ति
६. ठेकुवा छाप ।
७. बच्चों को तेल मालिश करने का एक
छोटा सा वर्तन ।
८. भगवान बुद्ध की मर्ूर्ति ।
९. मसला तैयार करने का एक प्राचीन वर्तन ।
१०. मिट्टी तथा ताम्रे की मुद्राएं ।
११. र्घष्ाण से आग निकाले वाला एक पत्थर ।
१२. राधा-कृष्ण की मर्ूर्ति ।
१३. प्राचीन काल कर्ीर् इटें ।
१४. पत्थर के आभूषण ।
१५. नीलम पत्थर ।
१६. विभिन्न प्रकार के मुगा ।
१७. ग्रेनाइट मुगा ।
१८. नीले पत्थर के टुकडे ।
१९. नारी की लघु मर्ूर्ति ।
२०. नृत अवस्था की मर्ूर्ति ।
२१. प्राचीन शालीग्राम पत्थर ।
२२. प्राचीन शिवलिंग ।
२३. धातु की मुद्राएं ।
२४. ओलम ।
२५. पासा ।
२६ मिट्टी की कुप्पी ।
२७. काली ।
२८. तम्बाकू पिने की चिलम ।
२९. मिट्टी के तौल साधन ।
३०. मिट्टी की सुराही ।
३१. शस्त्रों की धार तेज करने वाला यन्त्र ।

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