Tue. Mar 26th, 2019

वीरगंज डायरी:जितेन्द्र साह

radheshyam-money-transfer

हजारों मजदूर बेरोजगार
पर्सर्ााबारा-पर्सर्ााौद्योगिक करिडÞोर में दर्जनों कलकारखाना बन्द होने से इस क्षेत्र के हजारों मजदूर बेरोजगार हुए हैं। वीरगंज चिनी कारखाना, कृषि औजार कारखाना सहित अनेकों बडÞे-छोटे उद्योग बन्द होने से २० हजार से मजदूर श्रमिक प्रत्यक्ष रुप में प्रभावित हुए हैं, ऐसा वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के पर्ूवअध्यक्ष गणेश लाठ का कहना है।
गत आर्थिक वर्षों में नेपाल के चर्चित उद्योग अन्नपर्ूण्ा टेस्क्टाइल, पशुपति इन्डस्टि्रज, गंगा उद्योग, ज्योति मिल, कृष्ण टेक्स्टाइल आदि दर्जनों उद्योग में कार्यरत बीसों हजार से ऊपर मजदूर बेरोजगार हुए हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा की प्रत्याभूति न होने पर उद्योग बन्द हुए हैं, ऐसा यहाँ के उद्योगी लोग बताते हैं।
पूँजी लगाने के लिए अनुकूल वातावरण न होने से उद्योग यहाँ से विस्थापित होकर बाहर जा रहे हैं, ऐसा पर्ूव अध्यक्ष गणेश लाठ का कहना है। सरकार द्वारा उद्योगपतियों को सुरक्षा न देना और राजनीतिक दल के भातृ संगठन के रुप में मजदूर संगठनों का बारम्बार का आन्दोलन, उद्योग बन्द कराने में बहुत बडÞा कारक तत्त्व है।र्
उर्वरक की कमी
पार्सा इस वर्षखेती के समय में रासायनिक उर्वरक की कमी से किसान वर्ग में हाहाकार मचा हुआ है। हाल ही में जिला में प्राप्त ४९० मेटि्रक टन यूरिया ऊँट के मुँह मे जीरे का फोरन साबित हुआ है।
पर्सर्ााजला में ४६ हजार ७ सौ क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। प्रति हेक्टर डिÞएपी खाद ९० किलो से ज्यादा प्रयोग किया जाता है। उसी तरह पोटास ५० किलो प्रतिहेक्टर और यूरिया १८० किलो का प्रयोग होता है, ऐसा कृषि विकास कार्यालय पर्सर्ााे प्रमुख विजय कुमार श्रीवास्तव बताते हैं। उन्होंने बताया कि जिला में स्थित २४१ सहकारी संस्थानों के माध्यम से उर्वरक वितरण किया जाएगा। इस में एक दुखद पक्ष यह है कि डÞीएपी और पोटास उर्वरक आने की सम्भवना बहुत न्यून है।
गत वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्र भारत बिहार से अवैध रुप में रासायनिक उर्वरक लाकर खेती का काम किया जाता था। इस साल सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय सीमा सुरक्षा बल की कडÞाइं के चलते और नेपाल के अन्दर ही सशस्त्र प्रहरी द्वारा उर्वरक कब्जा करने की घटनाओं से किसान भारतीय उर्वरक आयातीत करने में निरुत्साहित हो गए हैं। उर्वरक के अभाव में धान की खेती बहुत निराशाजनक होने की आशंका है।
अस्पताल ही रोगी
पारसा मध्य तर्राई में स्थित नारायणी उपक्षेत्रीय अस्पताल वीरगन्ज में सेवाग्राही रोगियों को अपेक्षित सेवा और सुविधा नहीं मिल रही है। जिसके चलते अस्पताल भी समय-समय पर चर्चा का विषय बना हुआ है। रोगी पीडिÞत हैं, और पीडिÞत रोगी निजी चिकित्सालय में जाने के लिए बाध्य हैं। र्
वर्तमान में नारायणी उपक्षेत्रीय अस्पताल वीरगंज में उपचार के लिए बारा, पर्सर्ाारौतहट, र्सलाही, महोत्तरी, मकवानपुर आदि जिला से रोगी उपचार्रार्थ आते हैं। मगर विगत कुछ महीनों से अस्पताल में मध्यस्थ लोगों का क्रियाकलाप चर्चा का विषय बना हुआ है। अस्पताल में कार्यरत डÞाक्टर, अस्पताल से जल्दी निकलर कर अपने-अपने निजी क्लिनिक में पहुँच जाते हैं।
अस्पताल में आधुनिक उपकरण तथा विशेष चिकित्सकों का भी अभाव है। दिन के १२ बजे के बाद डÞक्टर अस्पताल में नहीं मिलते हैं। इन सब कारणों से रोगियों को बाध्य होकर निजी चिकित्सालय में जाना पडÞता है। सम्बन्धित अस्पताल की विकास समिति को इस सम्बन्ध में विशेष ध्यान देकर तदारुकता दिखानी चाहिए, ऐसा रोगियों का कहना है।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of