Sun. Sep 23rd, 2018

वीरगंज, पर्सा में फिर से तस्करी का जाल, प्रशासन मौन

वीरगंज, हि.स. | चुनाव के समय अपने को चुस्त-दुरुस्त दिखाने वाले प्रहरी प्रशासन अपने असली रूप में आने लगे है। उन्हें पता है कि नए सरकार के बनते ही सरूआ-बदुआ का खेल शुरू होगा, इसके लिए नज़राना जमा करने की कवायद में सभी निकाय उगाही में लगे पड़े है। जिसके कारण बारा और पर्सा जिल्ला के सिमा नाका से कपडा और चूजों की तस्करी तिब्र रुप में बढ़ी है। नेपाल प्रहरी तथा सशस्त्र प्रहरी को भारी रकम का नजराना देने के बाद कपडा और अन्य सामान के लिए तस्करी का लाइन खुलता है। नेपाल और भारत के सीमा नाका में पड़ने वाले बारा के बरैनिया, आमवा, कवहीगोठ, सिम्रौणगढ और कचोर्वा नाका से कपडा तस्करी का लाइन खुला है और पर्सा के मुल भन्सार वीरगंज भन्सार, श्रीसिया, झौवागुठी, जानकी टोला के साथ-साथ अन्य नाका से भी कपडा और अन्य सामान तस्करी का लाइन खुला हुआ है, तस्कर श्रोत ने बताया। श्रोत अनुसार बारा और पर्सा के नाका से तस्करी करने के एवज में लाखौ रुपैया ऊपर के हक़ीम को देने के पश्चात ही तस्करी का लाइन खुला है। तस्करो के संगठन द्वारा ऊपरी निकाय में नज़राना देने के बाद ही स्थानिय प्रहरी चौकीयो में महिनवारी स्वरुप रकम लिया जाता है। अपना नाम गोप्य रहने के शर्त के साथ बताया।

इन सब के बीच खानापूर्ति दिखाने के लिए या जिससे नज़राना नही मिला हो, मात्र उसे ही पकड़ा जाता है। इसी क्रम में बीरगंज तर्फ जाते हुए धादिङ जिल्ला के गजुरी गाउँपालिका वडा नं १ गजुरीबजार में जाँच के क्रम में गाँजा के साथ पर्सा जिल्ला कल्याणपुर गाउँपालि के वडा नं ४ का २७ वर्षीय हृदयनन्दप्रसाद महतो को प्रहरी ने पकड़ा। काठमाण्डु से  वीरगञ्ज तर्फ जाते हुए ना२ख ७३११ नं के ट्रक से प्रहरी ने ३८ किलो गाँजा बरामद किया।
जबकि अंदरूनी सूत्रों की मानें तो ये महज़ दिखावा है, पर्सा-बारा के बड़े तस्करों से सब जगह मिलीभगत है। बड़ी आसानी से गांजा,चरस, अफीम पहाड़ी रास्तों से होते हुए पर्सा में आता है, पर्सा के मुड़ली और इसके आसपास के गांवों में जमा होता है, फिर उसे ट्रक, सूमो, और मोटरसाइकिल से छपरा-सिवान और गोरखपुर पहुचाया जाता है, वह से अगला ग्रुप उसे आगे लेकर जाता है। पर्सा-बारा के बड़े माफिया इसे लखनऊ तक खुद ही पहुँचवा देते है। इसमें नेपाल के प्रशासन के साथ-साथ भारत के प्रशासन से सब कुछ मिला हुआ रहता है। जिस माध्यम से तस्करी का सामना भारत जाता है, उसी रास्ते भारत से भी तस्करी का सामना नेपाल आ जाता है।
पर्सा में तस्करों का सरग़ना, पहले ख़ुद से तस्करी करता था, फिर पकड़ा गया, जेल भी गया, जेल से बाहर आने के बाद उसने अपना नेटवर्क फैलाया। सबसे पहले उसने एक राजनीतिक दल में शामिल होकर अपना प्रभाव बढ़ाया, जिस कारण पुलिस उसे आसानी से छू नही सकती, उसके बाद गांव-घर के बेरोजगार युवाओं को उसने इन कामो में लगाया,आज भी कई लड़के भारत के जेलों में सड़ रहे है। प्रशासन को सब कुछ मालूम होते हुए भी, कुछ घूसखोर इसके तलवे चाटते है, और कोई इसे गिरफ़्त में लेने की हिम्मत नही करता। अगर समय रहते इसे पकड़ा नही गया तो पता नही ये कितने मासूमों की बलि चढ़ा देगा।
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