Sun. Nov 18th, 2018

व्याकुल विवस, सब तीर हैं; रिश्तों में है, रिसते लहू; घायल है सब, क़ातिल है सब;

महाभारत;
गंगेश मिश्र

ये युद्ध है;
अद्भुत है ये;
है ग्रन्थ ये;
उलझे हुए;
कुरुक्षेत्र में लड़ते हुए;
हुंकार यूँ, भरते हुए;
सम्मान आहत हैं, जहाँ;
अपमान सहते, वीर हैं;
व्याकुल विवस, सब तीर हैं;
रिश्तों में है, रिसते लहू;
घायल है सब, क़ातिल है सब;
मरती रही, इन्सानियत;
रिश्तों में है, उलझा हुआ;
चुपचाप सुनता, हाल है;
धृतराष्ट्र अंधा, मोह में;
लाचार है, बेहाल है;
भाई को भाई मारता;
गुरु – शिष्य, रण में रत हुए;
लड़ कर मरे, तबतक लड़े;
लड़ते रहे, जबतक जीये;
अंत में सब, लड़ मरे;
बाकी रहा न शेष कुछ;
पाशे पिटे, सब कुटिल के;
सब धूल में, उलटे पड़े ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of