Fri. Dec 14th, 2018

श्री मद्भागवद् गीता भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकली महत्व पूर्ण श्लोक है : आचार्य पं. विजय प्रकाश शर्मा

आत्मवोध,

बिजय प्रकाश
बिजय प्रकाश

श्री मद्भागवद् गीता हिन्दू धर्म का सर्वोपरि ग्रन्थ है , और भगवान श्री कृष्ण के मुख से निकली है और गीता का एक महत्व पूर्ण श्लोक है ।
अनन्याश्चिन्तयन्तोमां ये जनाः उपासते ।
तेषां नित्या भियुक्तानां, योग क्षेम वहाम्यहम ।।
इस श्लोक का अर्थ है हि हे अर्जुन जो भी मनुष्य महारा अनन्य भाव से चिन्तन करता है उसका खर्च मै वाहन करता हू“, गीता के परम उपासक श्री सन्त बामा थापा जी थे , उन्हों ने पूरे जीवन भर भगवान श्री कृष्ण का ही अनन्य चिन्तन करते रहते थे । और उनकी माता जी भी भजन भाव में लगी रहती थी बामा थापा जी गीता का वही श्लोक पढते रहते थे क्यों कि वो जानते थे , कि हमारे घर का खर्च तो भगवान चलायेंगें लेकिन एक दिन तो गजब हो गया , उनकी माता जी ने कहा कि बेटा तू तो कहता है कि भगवान ने गीता में कहा है कि जो उनका अनन्य भाव से चिन्तन करता है उसका खर्च भगवान चलाते है लेकिन बेटा तुम तो भगवान के चिन्तन मे रहते हो और मै भी उन्हीं प्रभू के ध्यान में रहती हू“, इसके वाद भी बेटा आज घर में कुछ नही है यहा“ तक कि नकमक भी नही है ।
वामा थापा को लगा कि श्री मद्भागवद् गीता में लिखा श्लोक गलत है, और गीता झूठी है यही सोंचकर गीता में लिखा श्लोक को बामा थापा ने ब्लेट से खुर्च दिया, और बहुत दुःखी होकर समुद्र के किनारे चले गयें और मन में बिचार करने लगे कि गीता जैसे भी ग्रन्थ भी झूठे हो सकते है तो फिर कि ग्रन्थ या पुराण को सत्य माना जायें, बार बार मन में बिचार आता है कि ऐसा तो नही पूरी दुनिया“ के सारे ग्रन्थ झूठे है, बामा थापा समुद्र के किनारे से घरके तरफ चल पडे और सोंचने लगे की गीता जैसे तो कोई भी ग्रन्थ झूठा नही होगा अच्छा हुआ कि परिणाम आधे उम्र में ही आ गया नही तो पूरी जिन्दगी बर्वाद हो जाती यही सोंचते सोंचते घर के पास आ पहु“चे, पहु“चते ही उनकी मा“ क्रोधित होकर आज पहली बार अपने बेटे के ऊपर झपट पडी और बोली कि हे नालायक हत्यारा तू घर से जल्द ही निकल जा मैं तेरा चेहरा देखना पसंद नही करती, बामा थापा फफकर रो पडे आखिर आज मेरी गौ जैसे मा“ को क्या हो गया है हाथ जोडकर बामा थापा जी पूछ“ने लगे कि आखिर मा“ बताओं तो कि मैने कया गलती किया है आपने पूरी उम्र में ऐसी फटकार नही लगाई है, मा“ ने कहा खबरदार जो तूने मुझे मा“ कहा, बहुत निबेदन के बाद मा“ ने पू“छा कि तूने सुन्दर छोटे बच्चे के ऊपर इतना बोझा क्यों लदा बामा थापा चौंक गयें किस बच्चे कि बात कर रही हो, मा“ ने गुस्सा से थापा का हाथ पकड कर दिखाया कि ये कि ये देखों, चावल के बोरें, दाल के बोरें तेल की टीनें मिठाईयों के डिब्बे ये सब सारा सामान इतने बाद भी बदतमीजी की हद पार कर दी जब उस नन्हें बच्चे ने इतना बोझा लांदने से इन्कार किया तो तूने उसकी जुबान (जिहब) काट दिया, प्यारा बच्चा रोता आया और उसके मुख से खून निकल रहा था, मैने सामान फेकने को कहा इसके बाद मैने कहा मु“ह खोलकर दिखाओं बेटा तो उसने कहा कि तुम्हारे बेटे ने जबान काट दिया और तुम हमारा मु“ह देख रही हो इतना सुनते ही थापा जी बेहोस हो गयें, थोडी देर वाद उन्होंने अपने मा“ से हकीकत बताया कि मा“ मैने किसी बच्चे कि जबान नही कटा है, गीता का श्लोक जरुर काटा है मा“ वो भगवान श्री कृष्ण जी थे ।
मुझे प्रायश्चित बताओं मा“ मै बहुत पापी ह“ू । भगवान ने तुरुन्त दर्शन दिया और समझाया कि बेटा गीता कभी गलत नही हो सकती विलंब जरुर हो सकता है, देते वल्कि दर्शन देते है आप भी भगवान से धन कि इच्छा ना करें वल्कि भक्ति पाने की कामना करें ।
।। जय श्री कृष्ण ।।
आचार्य पं. विजय प्रकाश शर्मा
दयाधाम रोहिणी सेक्टर– ९ दिल्ली भारत

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