Fri. Nov 16th, 2018

संकटकाल की घोषणा करने की तैयारी

जेठ १४ गते संविधान नहीं बनना अब लगभग निश्चित हो चुका है। ऐसे में संविधान सभा की समय सीमा को बढाने के लिए दलों के पास देश में संकटकाल की घोषणा करने के सिवाय और कोई भी चारा नहीं है। इसलिए पूरे देश को किसी ना किसी रूप में आन्दोलन की आग में झोंक कर सामाजिक सद्भाव को बिगाडने और देश की सुरक्षा व्यवस्था को तहस नहस करने का षड्यंत्र सत्ताधारी दल द्वारा किया जा रहा है। इस समय देश में जो भी आन्दोलन, बन्द हडताल आदि हो रहे हैं उनके पीछे किसी ना किसी रूप में माओवादी कांग्रेस एमाले और मधेशी मोर्चा के नेताओं का हाथ है।
कहीं अखण्ड सुदुरपश्चिम, कहीं अखण्ड मध्यपश्चिम, कहीं अखण्ड पश्चिमांचल, कहीं मिथिला, कहीं भोजपूरा, कहीं कोचिला, कहीं ब्राह्मण क्षेत्री तो कहीं थारू और कहीं मधेशी का आन्दोलन सभी आन्दोलन किसी ना किसी रूप में देश की बडी पार्टियों के इशारे पर किया जा रहा है देश की जनता को मुर्ख बना कर संविधान सभा की समय सीमा बढाने का षड्यंत्र किया जा रहा है।
देश की जनता को अब इन नेताओं दलों और उनके द्वारा प्रायोजित आन्दोलन करने वाले दलालों के खिलाफ एकजुट होना होगा और संविधान जारी करवाने के लिए एकजुट होकर आना होगा। संघीयता और संविधान विरोधी दल और दलाल से सावधान रहें।source:nepalkikhabr

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