Wed. Oct 17th, 2018

सफेद लोगों के काले कारनामे

फर्जी वैट बिल का प्रयोग कर सरकार को लाखों करोड रूपये का चूना लगाने वालों का नाम जिस दिन र्सार्वजनिक किया गया मानो उद्योग व्यापार जगत में भूचाल ही आ गया हो। इस बैक लिष्ट में जिस किसी भी व्यापारी या उद्योगपति का नाम था या तो उन्होंने अपना मोबायल ही बन्द कर दिया या फिर अपने पक्ष में समाचार लिखवाने के लिए अपने निकट के पत्रकारों को ढूंढते नजर आए। सरकार जिन ४३७ व्यापारिक घरानों का नाम ब्लैक लिष्ट में डाला है उनमें कुछ तो चौंकाने वाले नाम हैं।
देश के उद्योग जगत में खासा स्थान रखने वाले हस्तियों का भी नाम टैक्स चोरी करने वालों की सूची में आने के बाद यह बात तय हो गई है कि इस देश में टैक्स चोरी करने में कोई भी कंपनी किसी से पीछे नहीं है। इस लिष्ट में देश के प्रतिष्ठित चौधरी ग्रुप, गोल्छा आर्ँगनाईजेशन, जगदम्बा ग्रुप, दुगड समूह का नाम भी शामिल है। इतना ही नहीं इसमें भाटभटेनी सुपर मार्केट, विश्वकर्मा सिमेण्ट उद्योग, मारूति सिमेण्ट, मोरंग आँटो वर्क्स, बामा मोर्टस, बरूण डेवलपर्स, रसुवा कंस्ट्रक्सन्स, यूनाईटेड बिर्ल्र्डस, सीटीर्सर्ीइरकालिका जेभी, चमेलिया जलविद्युत आयोजना, हिम इलेक्ट्राँनिक्स जैसे बडे नाम भी शामिल है।
राष्ट्रीय सूचना आयोग द्वारा सूचना के अधिकार संबंधी कानून के आधार पर कडे निर्देशन देने के बाद अर्थ सचिव ने फर्जी वैट बिल के मामले में संलग्न लोगों और कंपनियों का नाम र्सार्वजनिक किया था। वैसे इसमें सिर्फ४३७ कंपनियों का नाम ही शामिल है। राजश्व अनुसंधान विभाग ने अब तक ५१८ कंपनियों को शंका के आधार पर जांच का काम किया था। अर्थ विभाग ने माना है कि अब तक इन कंपनियों की वजह से सरकारी कोष में ३४५ करोड रूपये का घाटा हुआ है। इनमें से १९१ करोड रूपये वैट के जरिये,१५० करोड रूपये आयकर के जरिये और २ करोड रूपये अन्तःशुल्क के जरिये नुकसान हुआ है।
वैसे इस विवरण को काफी समय से र्सार्वजनिक किए जाने की मांग की जा रही थी। लेकिन अर्थ मंत्रालय ने संसदीय समिति के आदेश को भी दरकिनार करते हुए टैक्स चोरी करने वालों का नाम बाहर लाना नहीं चाहता था। बाद में सूचना के अधिकार का प्रयोग कर यह नाम र्सार्वजनिक किया गया। वैसे पहले सूचना आयोग के आदेश को भी भी अर्थ मंत्रालय मानने से साफ इंकार कर दिया था। जब दुबारा सूचना आयोग में निवेदन दिया गया तब जाकर कहीं यह संभव हो पाया। वैसे अभी भी इसमें पूरी सूचना नहीं दी गई है। निवेदक तारानाथ दहाल का दावा है कि बडे कंपनियों के द्वारा सरकार के राजश्व में १० हजार करोड रूपये का घाटा लगा है और इसे जानने का अधिकार पूरे देश को है।
इस ब्लैक लिष्ट में नाम आने के बाद सभासद समेत रहे उद्योगपति एवं चौधरी ग्रुप के अध्यक्ष विनोद चौधरी ने इसमें सरकार को ही दोष दिया है। उनका कहना है कि बार बार सरकार से आग्रह किए जाने और अपना पूरा प्रमाण दिए जाने के बावजूद कोई भी सुनवाई ना होना दुखद है। सरकार को अपनी नीति और अधिक स्पष्ट करनी चाहिए। इसी तरह हिम इलेक्ट्रनिक्स के प्रबन्ध निर्देशक शेखर गोल्छा ने कहा कि बार से लिया हुआ वैट बिल ही यदि फर्जी है तो इसमें हमारी कोई भी गलती नहीं है। इस तरह से किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता है जब तक कि अदालत का कोई फैसला नहीं आ जाए। इस लिष्ट में नाम रहे जगदम्बा ग्रुप के निर्देशक साहिल अग्रवाल कहते हैं कि यह हमारे लिए पुराना इतिहास है। मामला राजश्व न्यायाधिकरण में और उसके फैसले का हमें इंतजार है।
इन व्यापारियों के सफाई के बावजूद इतनी आसानी से ये सभी बच नहीं सकते हैं। सरकार पर चारों तरफ से जबर्दस्त दबाब है इन सभी के खिलाफ कार्रवाही करने के लिए। संसद की सबसे प्रभावशाली रही र्सार्वजनिक लेखा समिति ने तो जाली वैट बिल के मामले को जाली नोट के कारोबारी से ही तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह से जाली नोट का कारोबार करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चलाई जाती है उसी प्रकार जाली वैट बिल पेश कर देश को चुना लगाने वाले उद्योगी, व्यापारियों को भी उसी कानून के तहत कार्रवाही किया जाना चाहिए।
र्सार्वजनिक लेखा समिति के इस बयान के बाद अर्थ मंत्री ने कहा कि समिति की बातों को सरकार ने गंभीरता से लेते हुए कडÞे कानूनी कार्रवाही की प्रक्रिया को आगे बढाया है। उन्होंने फर्जी वैट बिल मामले में दोषी पाए जाने पर जेल तक की सजा होने का संकेत दिया है।  ±±±

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