Fri. Oct 19th, 2018

सभी जाली नोट के भारत प्रवेश का सुगम मार्ग नेपाल ही था : मुरलीमनोहर तिबारी

nep-2

मुरलीमनोहर तिबारी (सिपु), बीरगंज, १९ नवम्बर | नेपाल कितने पानी में ! भारत में जो राजनितिक घटनाक्रम हुए, उसे नेपाल के परिवेश से तुलना करना आवश्यक है। सबसे पहले नोट बंदी की बात करें, नोट बंदी क्यों जरुरी था ? जो बातें भारतीय सरकार, मीडिया और सोशल मीडिया में आ रही है, उनके अनुसार रूपये का कागज तैयार करने के लिए दुनिया में चार फ़र्म हैं – फ्रांस की अर्जो विगिज, अमेरिका का पोर्टल, स्वीडन का गेन और पेपर फैब्रिक्स ल्युसेंटल। इनमें से दो फोर्मो का २०१०-११ में पाकिस्तान के साथ भी रूपए के कागज का अनुबंध हुआ था, जिसका भारत ने विरोध भी किया था, अर्थात नोट छापने के लिए जो कागज भारत लेता था वही कागज २०१० से पाकिस्तान भी ले रहा था, फलस्वरूप उस कागज के अधिकतम हिस्से का इस्तेमाल भारतीय रूपए (नकली नोट) छाप कर भारत मे भेजने का काम हो रहा था।

भातीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक भारत में लगभग १६००० खरब डालर मूल्य के रुपए असली है, इंडियन इन्टेलिजेन्स एजेंसीज के मुताबिक १५००० खरब डालर नकली भारतीय रूपया छाप कर भारत में सप्लाई करने के लिए तैयार हैं जो कि पूरी तरह असली के समान है, जिसे पहचान पाना असम्भव है। अर्थात लगभग पूरे भारतीय रूपया के ९८% नकली नोट भारतीय बाजार में आने को तैयार थे। अगर वे नोट बाजार में आ जाते तो अचानक मुद्रास्फीति लगभग दो गुनी बढ़ जाती, महंगाई दो गुनी बढ़ जाती। इसीलिए भारत सरकार ने जर्मनी के एक प्रिंटिंग प्रेस से कागज लेने का अनुबंध किया, साथ ही ये भी अनुबंध किए कि ये कागज जर्मनी किसी अन्य को नहीं दे सकता, ताकि भविष्य में फिर कभी नकली नोट की समस्या भारत में न हो सके। ये कागज पहले वाले से बहुत हल्का और अधिक सुरक्षित हैं, ये पानी, धूप से खराब नही हो सकता। इसी कारण उन्हें ५०० – १००० रूपए के नोट को बन्द करना पड़ा।

बेशक, इसमें जनता को विकट समस्या झेलना पड़ रहा है, अब तक ५५ लोगो की मृत्यु हो चुकी है। अब नोट बंदी के फायदे पर गौर करें, इससे नकली नोट की समस्या भारत से हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है। ब्लैक मनी यानी वो पैसा जो बाजार में नहीं दौड़ रहा और किसी की तिजोरी में भण्डारण हुआ था, वह ब्लैक मनी भी ना के बराबर हो जाएगा। कालाधन कमाने का रास्ता अवरुद्ध हो जाएगा। पहले से मौजूद कालाधन में से ६५% से अधिक खराब हो जाएगा और बाक़ी बचे ३५% कालाधन नोट के शक्ल में नहीं है। हवाला का धन्धा खत्म हो जाएगा। कैशलेस इकाँनमी को मजबूती मिलेगी। सभी जाली नोट के भारत प्रवेश का सुगम मार्ग नेपाल ही था, जिसको लेकर नेपाल पर कई आरोप लगते थे, वे अब बंद हो जाएंगे।

nepal-1

क्या नेपाल में कालाधन, घूसखोरी, भ्रष्टाचार नही है ? अगर सर्वे रिपोर्ट को माने तो क्षेत्रफल और अवधि के हिसाब से नेपाल में ज्यादा कालाधन, घूसखोरी, भ्रष्टाचार है, फिर भी नेपाल की कोई सरकार इसे रोकने का प्रयाश नही करती, उल्टे इसे रोकने वाली संस्थाओं के काम में खुले आम बेड़िया लगाती है। लोकमान प्रकरण इसका जीवंत उदाहरण है।

दूसरा प्रसंग है, आतंकवाद के खिलाफ सर्जीकल स्ट्राइक। भारत आतंकवाद से पीड़ित है और देशहित में अपनी सुरक्षा करेगा ही, लेकिन आश्चर्य तब हुआ जब नेपाल अपने कूटनीतिक पहल में आतंकवादीयों की तरफदारी करते दिखा और इसके उलटे पाकिस्तान की तरफ से तंज कसा गया कि उनका देश नेपाल और भूटान की तरह कमज़ोर नही है। हैरत की बात है, नेपाल के किसी राष्ट्रवादी ने पाकिस्तान का विरोध नही किया। अभी तक जाली नोट, आतंकवाद और विमान अपहरण के लिए नेपाल की भूमि का प्रयोग होता रहा है, जब ये भारत में जाली नोट और आतंकवाद नही करा पाएंगे तो इनकी गतिविधि नेपाल में ही शुरू हो जाएगी, जिससे लड़ने के लिए ना कोई तैयारी है, ना ही इच्क्षाशक्ति।

तीसरा प्रसंग है, भारत में तीन तलाक के खिलाफ मुहीम। इसमें तीन तलाक के पक्ष और विपक्ष में कई तर्क आ रहे है, गौरतलब है कि तमाम तर्कों के बावजूद सरकार इसे जबर्दस्ती लाद नही रही है, बल्कि चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से धर्म विशेष के लोगों को समझने और सुधारने का समय दे रही है। नेपाल में अंगीकृत प्रसंग को देखा जाए, तो बिना किसी तैयारी, बिना चर्चा- परिचर्चा, बिना स्वीकार्यता के इसे जबर्दस्ती थोपा गया, जिसका विस्फ़ोट होना अवश्यम्भावी है।

चौथा प्रसंग है, भारत के विदेशमंत्री सुषमा स्वराज  किडनी का इलाज विदेश में नही अपने ही देश के सरकारी अस्पताल में करा रही है, और उन्होने सरकार से कोई आर्थिक मदद नही मांगी है। भारत के राजनितिक रिश्ते कितने गहरे है, इसका अंदाजा इससे लगता कई की टीडीपी के सांसद आर संबाशिवा राव ने सुषमा स्वराज को किडनी देने की पेशकश की है। नेपाल में सुजाता कोइराला को ५० लाख देने का सर्वत्र बिरोध के बावजूद निर्लज्ज सरकार ने पैसे दिए।

ऐसा पूर्वप्रधानमन्त्री स्व. सुशील कोइराला- १ करोड ६२ लाख, एमाले अध्यक्ष केपी ओली-१ करोड २६ लाख, पूर्वप्रधानन्यायाधीश रामकुमारप्रसाद साह ८० लाख, पूर्वराष्ट्रपति रामवरण यादव- ६० लाख, कांग्रेस नेता चक्र बास्तोला -५० लाख, पूर्व उपसभामुख पूर्णकुमारी सुवेदी २५ लाख, पूर्वप्रधानमन्त्री तुलसी गिरी-२५ लाख, कांग्रेस नेता गोविन्दराज जोशी- २० लाख, कांग्रेस नेता खुमबहादुर खड्का-२० लाख, पूर्वपरराष्ट्रमन्त्री स्व. साहना प्रधान-१३ लाख को भी मिलते आया है। अब तुलना करें हम कितने गंदे पानी में है।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of