Sat. Nov 17th, 2018

सिर्फभ्रष्टाचार ही नहीं, दलाली भी

विनय दीक्षित:प्राकृतिक प्रकोप अर्थात बाढÞ के मामले में अति संवेदनशील माना जाने वाला बाँके जिला का मटेहिया गाबिस, जहाँ आपातकालीन राहत उपलब्ध कराने के लिए एक गैरसरकारी संस्था समिति गठन कर अनुदान दिया गया और नैतिकता की सारी हदें पार करते हुए समिति के कुछ पदाधिकारियो ने पूरा रकम गायब कर दिया ।
स्थानीय स्तर में उत्पन्न होने वाली समस्याओं के मध्यनजर एक गैरसरकारी संस्था भेरी वातावरणीय विशिष्टता समूह -बी-गु्रप) ने गाबिस में एक प्रकोप ब्यवस्थापन समिति गठन कर १ लाख ५० हजार रुपए का अनुदान दिया और उसे एक कोष के रूप में स्थापना कर गाबिस कार्यालय में संकलन होने वाली रकम के साथ प्रतिव्यक्ति से ५ से ५० रुपए तक असूलकर समिति के खाते में जमा किया गया ।
मटेहिया में जब बाढ के कारण कुछ घरों में क्षति हर्ुइ और स्थानीय सचिव ने रकम की जानकारी मांगी तो, समिति के अध्यक्ष हरिचरण तिवारी ने तत्कालीन मटेहिया गाबिस सचिव स्व.मिश्रीलाल यादव पर आरोप जडÞ दिया और कहा कि सचिव ने सारा पैसा खा लिया है । बात बढती गई और संस्थाने खुद रकम की जानकारी बैंक से मांगी और धीरे- धीरे पोल खुलने लगा कि रकम गई कहाँ –
हरिचरण तिवारी की अध्यक्षता में गठित ९ सदस्यी समिति में तत्कालीन गाबिस सचिव स्व.यादव सदस्य सचिव, मटेहिया गाबिस कार्यालय में गरीब संघ विशेश्वर के समाजिक परिचालक तथा तत्कालीन विद्यालय ब्यवस्थापन समिति मटेहिया के अध्यक्ष रामयश यादव सचिव, स्थानीय पवित्रा बोहोरा के कोषाध्यक्ष चयनित किए गए थे ।
संस्था ने २०६४ साल में नेपालगन्ज स्थित सीटीजन्स् बैंक में प्रकोप ब्यवस्थापन समिति मटेहियाका खाता नं.००५००००१०२ सीए संचालन कर १ लाख ५० हजार दाखिल किया और गाबिस मटेहिया ने विभिन्न कर के नाम पर जनता से १५ हजार असूलकर उसी खाते मे दाखिला किया । तत्कालीन सचिव तथा समिति के सदस्य सचिव स्व.मिश्रीलाल यादव का जब देहान्त हुआ तो वहीं से शुरु हुआ रकम हजम करने का खेल ।
मामला बढÞता गया और स्थानीय रामजी यादव ने अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग तथा जिला प्रशासन कार्यालय बाँके में भ्रष्टाचारयुक्त कार्य करने के कारण आवश्यक कारवाही और सजा की मांग करते हुए निवेदन दायर किया । मीडिया ने मामला को उठाया तो पदाधिकारी फरार होने लगे । लम्बे अरसे के बाद भारत बलरामपुर स्थित रिश्तेदारी से लौटे समिति के अध्यक्ष तिवारी ने ‘हिमालिनी’ से बातचीत में कहा रकम तो सभी पदाधिकारियों ने मिलकर खाया है ।
तिवारी ने बताया कि उन्हे सिर्फबदनाम किया जा रहा है । उन्होने कहा १९ हजार रुपए तो गाबिस के सामाजिक परिचालक तथा समिति के सचिव रामयश यादव ने हजम किया है । समिति के अध्यक्ष के हैसियत से घटना की जिम्मेवारी लेते हुए तिवारी ने सभी से रकम असूल कर बैंक खाता में दाखिला करने की बात स्वीकार की है ।
‘हिमालिनी’ ने जब रामयश यादव से सर्म्पर्क साधा तो उन्हांेने ऐसी घटना हर्ुइ है इस बात को स्वीकार किया, लेकिन कहा कि कितना और कब निकासा हुआ इसकी जानकारी उन्हें नहीं है । लेकिन रहस्य तब खुला जब निवेदक रामजी यादव ने सीटीजन्स बैंक लिमिटेड नेपालगन्ज के खाता और चेक का विवरण माँगा ।
बैंक ने सारा विवरण देकर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया । जिस चेक से रकम निकाला गया हैं उसमें सिर्फअध्यक्ष हरिचरण तिवारी और सचिव तथा सामाजिक परिचालक रामयश यादव का हस्ताक्षर है । ३० जनवरी २०१० और २७ डिसेम्बर २०१०  अर्थात एक बार १ लाख २५ हजार और दूसरी बार ४० हजार रुपए निकालने का स्पष्ट विवरण बैंक ने दिखाया । समिति का खाता ४ लोगों के हस्ताक्षर से संचालित था, लेकिन २ लोगों ने सिर्फकैसे रकम निकाले यह अलग प्रश्न है । ‘हिमालिनी’ ने जब महिला सदस्य अर्थात समिति की कोषाध्यक्ष पबित्रा बोहोरा से सर्म्पर्क किया तो उनकी अलग कहानी थी । उन्हे समिति गठन के बाद कभी बैठक आदि में नहीं बुलाया गया ।
पबित्रा ने बताया कि समिति में मै नाममात्र की कोषाध्यक्ष थी, जिसे जो मन में आता था करता था, कभी यह जानकारी नहीं हर्ुइ कि कितना पैसा है और गाबिस ने कितना जमा किया है । मीडिया ने केस को लेकर जब सरगर्मी बढर्Þाई तो गाँव सहित पूरे जिले में बवाल मच गया । बिना उद्देश्य रकम खर्च करने का विषय प्रशासन के समझ में भी नहीं आ रहा था ।
बी-ग्रुप के कार्यक्रम संयोजक रामराज कठायत ने घटना गम्भीर होने की बता कही, उन्होने कहा सामाजिक हित के लिए दिया गया रकम यदि कोई ब्यक्ति विशेष खर्च कर देता है तो यह निहायत ही शर्मनाक बात है और संस्था हर सम्भव कारवाही का प्रयास करेगा । सीएसडीआर नामक संस्था में मटेहिया के प्रकोप ब्यवस्थापन के लिए काम कर रहे विनयराज त्रिपाठी ने कहा कि विभिन्न संस्थाओं ने २ लाख बराबर का उद्धार सामग्री प्रदान किया था जो समिति के पदाधिकारियो ने गायब कर दिया ।
गाबिस सचिव मोहम्मदर् इस्माइल खाँ ने घटना के तह तक जाने की बात की ।  तत्कालीन राहत के लिए प्राप्त रकम किसी ब्यक्ति विशेष के अधिकार का विषय नहीं वह समाज का रकम है सचिव खाँ ने बताया ।
समिति के सहसचिव शशीराम बुढाथोकी ने सिर्फ२ बार बैठक की जानकारी होने की बात बताई । किसी से सरोकार नहीं रखा गया जबसे रकम आया तो सिर्फसमिति की जानकारी थी बैठक कार्यक्रम और उद्देश्य के बारे में कोई जानकारी नहीं हर्ुइ । इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रमुख जिला अधिकारी जीवन प्रसाद वली ने तत्काल कारवाही करने का  आश्वासन दिया । घटना क्रम का विवरण जानकारी करते हुए उन्होंने कहा अख्तियार दुरुपयोग में कारवाही जारी रहने के कारण प्रशासन की ओर से ढील दी गई है । अख्तियार का निर्देशन मिलने पर आवश्यक कारवाही की जाएगी ।
सामुदायिक सुरक्षा, जैसे आग, बाढ आदि के समय पर पीडिÞत को तत्कालीन राहत के नाम पर दिया गया रकम चन्द लोगों ने निजी सम्पत्ती समझकर गायब कर दिया, जिस पर स्थानीय स्तरके हर नागरिक का बराबर हक था । अब जनताको स्वयं इस तरह के भ्रष्ट लोगों के विरुद्ध आगे आना चहिए और इनको सामाजिक तौर पर यह उदाहरण देना चहिए की आने वाली इनकी नश्ल सिर्फगीता पढÞकर जन्म ले ।

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