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हिन्दी गंगा नदी जैसी पवित्र भाषा है : विश्व हिन्दी दिवस पर मंत्री बोहरा

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विनोदकुमार विश्वकर्मा ‘विमल’, काठमांडू, जनवरी १० ।
विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में विश्व भर में हिन्दी गतिविधियां व कार्यक्रम, संगोष्ठी, सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि परम्परागत रूप से आयोजित होते हैं । इसी प्रकार भारतीय राजदूतावास के तत्वावधान में १० जनवरी को काठमांडू के दरबारमार्ग स्थित होटल अन्नपूर्णा में भारतीय राजदूतावास के डिपुटी चीफ ऑफ मिशन प्रमुख विनय कुमार की अध्यक्षता एवं नेपाल सरकार के आपूर्ति मंत्री दिपक बोहरा के प्रमुख आतिथ्य में ‘विश्व हिन्दी दिवस संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया ।
संगोष्ठी में आपूर्ति मंत्री दिपक बोहरा ने कहा कि हिन्दी गंगा नदी जैसी पवित्र भाषा है । जिस प्रकार गंगा नदी में छोटी–छोटी नदियां आकर मिलती हैं और पवित्र हो जाती है । उसी प्रकार हिन्दी में भी नेपाली, मैथिली, भोजपुरी, मराठी आदि अन्य भाषाएं समाहित हुई है । इसलिए हिन्दी एक परिनिष्ठित व पवित्र भाषा कहलाती है ।

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उन्होंने बताया कि हिन्दी कोे बोलने, समझने व पढ़ने बालों की संख्या में दिनोंदिन बृद्धि होती जा रही है । खासकर नेपाल में भी हिन्दी बोलने वालों की संख्या अधिक है । उन्होंने कहा कि नेपाल व भारत के बीच सदियों का रिश्ता है । इस रिश्ते को प्रगाढ़ बनाने में हिन्दी भाषा का बहुत योगदान रहा है ।
भारतीय राजदूतावास के डिपुटी चीफ ऑफ मिशन प्रमुख विनय कुमार ने कहा कि हिन्दी विश्व में ६० करोड़ से अधिक लोगों की शिक्षा, रोजगार एवं जीवन यापन की भाषा रही है । इसलिए हिन्दी बोलने वालों की संख्या में दिनोंदिन बृद्धि होती जा रही है ।
उन्होंने बताया कि भारत में ७ लाख से अधिक नेपाली विभिन्न क्षेत्रों में नोकरी करते हैं और उनकी भाषा भी हिन्दी ही रही है । वर्तमान में कम्प्यूटर, इलैक्ट्रॉनिक और मीडिया में भी हिन्दी को सफलता मिल रही है । विज्ञान, गणित, चिकित्सा, योगा, तकनीकी आदि विधाओं को इसमें पढ़ा और व्यक्त किया जा रहा है । इस भाषा के विकास में कोई बाधाएं नहीं है, जबकि संस्कृत, अरबी, अंग्रेजी से लड़कर आज यह विकसित हो रही है ।
प्राज्ञ डॉ. उषा ठाकुर ने कहा कि हिन्दी नेपाल के तराई में प्रथम भाषा के रूप में बोली जाती है । इसके साथ–साथ यह सम्पर्क भाषा के रूप में भी प्रयुक्त होती आ रही है ।

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उन्होंने कहा कि नेपाल हिन्दी अन्वेषियों के लिए व्यापक क्षेत्र रहा है । यहां पर हिन्दी भाषा एवं साहित्य में बहुत कार्य भी हो चुके हैं । हिन्दी भाषा के संरक्षण एवं सम्बद्र्धन में यहां से प्रकाशित होनेवाली पत्रपत्रिकाओं का बहुत योगदान रहा है । इसके साथ–साथ हिन्दी भाषियों का भी योगदान रहा है ।

 

साहित्यकार डॉ. रामदयाल राकेश ने नेपाल में प्राथमिक स्तर में हिन्दी भाषा का अध्ययन, अध्यापन की व्यवस्था, गोरखापत्र दैनिक में हिन्दी संस्करण प्रकाशित होने की व्यवस्था, भारतीय राजदूतावास से प्रकाशित ‘विविध भारत पत्रिका’ की निरन्तरता तथा नेपाल व भारत के बीच भाषा, साहित्य, संस्कृति एवं कला के क्षेत्रों में अध्ययन, अनुसंधान हेतु आर्थिक सहयोग की व्यवस्था करने के लिए नेपाल सरकार व भारतीय राजदूतावास से आग्रह किया ।

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मौके पर हिमालिनी के संपादक डॉ. श्वेता दीप्ति ने हिन्दी भाषा के प्रति विभिन्न स्तरों पर कार्य किये जाने की आवश्यकता तथा भाषा को रोजगारमूलक बनाने के लिए सरकारी तौर पर विशेष व्यवस्था करने की आवश्यकता पर जोर दिया ।
उन्होंने कहा कि भारतीय राजदूतावास से प्रकाशित सूचानाएं हिन्दी भाषा में भी प्रकाशित हों, जिससे नेपाल में हिन्दी भाषा का सम्बद्र्धन हो सके । बताया कि हिन्दी नेपाल की प्राचीन भाषा है । लेकिन यहां समर्थन से अधिक विरोध है । जबकि हिन्दी भाषा किसी को तोड़ा नहीं, बल्कि जोड़ा है ।

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हिन्दी के लेखक डॉ. गंगाप्रसाद अकेला ने कहा कि हिन्दी नेपाल की प्राचीन भाषा है । हिन्दी भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल में यदि कोई भाषा सशक्त हो सकती है, तो वह सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी है । भाषा के साथ यदि दुराग्रह का भाव हो, तो इससे बढ़कर संकीर्णता की भावना और हो ही नहीं सक्ती है ।

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अवसर पर प्रा.डॉ. उषा ठाकुर, डॉ. गंगाप्रसाद अकेला, डॉ. रामदयाल राकेश एवं डॉ. श्वेता दीप्ति को हिन्दी भाषा व सहित्य के प्रचार–प्रसार के लिए मुख्य अतिथि आपूर्ति मंत्री दिपक बोहरा ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया ।
द्वितीय सत्र में कवि संगम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित मुकुन्द आचार्य, मन्जु कांचुली, रामबहादुर पहाडी, ऋषवदेव घिमिरे, प्रदिपराज श्रेष्ठ, उषा तिवारी, लक्ष्मी बर्तौला, मोबिन खान, सरोज सुवेदी, ज्ञानुवाकर पौडेल, रुद्र अधिकारी, गोपाल अश्क, भुवन शिवाकोटी व निर्मला पराजुली आदि कवि–कवयित्रियों ने अपनी–अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं । सभी वाचित कविताएं उत्कृष्ट और मन को छुने वाली थीं ।

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संगोष्ठी के अन्त में भारतीय राजदूतावास, पीआईसी विंग की द्वितीय सचिव रुवी जसप्रित शर्मा ने सभी कवि–कवयित्रियों को उपहार स्वरुप पुस्तक भेंट कीं तथा उन्होंने समापन मनतब्य भी दिया  ।
भारतीय राजदूतावास, पीआईसी के अताशे रघुवीर शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा धन्यवाद ज्ञापन पीआईसी विंग की रुवी जसप्रित शर्मा ने किया ।dscn4019 dscn4054

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कार्यक्रम के सफलतापूर्वक आयोजन के लिए हार्दिक बधाई।