मानवता के लिए कुछ तो रहम करो : शिवेन्द्र शर्मा
इंदौर, भारत ।आज जहाँ, चारों ओर मातम सा पसरा हुआ है, एक भयावह अनहोनी का डर, हर व्यक्ति के मन मस्तिष्क में बैठा हुआ है, पूरा शासन प्रशासन, इस भीषण विपदा से निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, वहीं एंसी विकतम परिस्थिति में भी हे, मानव तू राजनैतिक पांसे फेंक रहा है , अनुकूलता में प्रतिकूलता का माहौल बना रहा है , अत्यावश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबजारी कर रहा है , नो, दो ग्यारह के फेर में अब भी पूरी ताकत लगा रहा है l अरे कमीनो कम से कम अब तो शरम कर लो, अरे मूर्खो अब तो संभाल जाओ, तुम्हारे पापों का घड़ा तो भर ही चुका है, भयावह मौत तुम्हारे सामने खड़ी है, किसी भी छण तुम काल के ग्रास बन जाओगे, फिर क्या ये नोटों के बोरे, और हवेलियां माथे पे धर के ले जाओगे या ट्रांसपोर्ट पर बुक करके मंगाओगे, अरे करम जलो ख़ुद का नहीं तो अपने बच्चों और परिवार पर तो रहम करो, खुद के साथ साथ उनको क्यों इस पाप कर्म में घसीट रहे हो l ये तो पक्का समझ लो कि नरक में भी तुम्हे जगह नसीब नहीं होनी है, फिर जाओगे कहाँ, सोच लो, मुर्गा बनोगे या बकरा या फिर अतृप्त आत्माओं से भटकते रहोगे एक अलग ही शापित दुनिया में l धरती पर बोझ बने मानवता के दुश्मनो , क्यों भारत की मान मर्यादा को मिट्टी में मिला रहे हो l जरा देखो उन लोगों की तरफ जो इस विपत्ति काल में करोड़ों रुपये का दान दे रहे हैं, अपनी जान की परवाह किए बिना, तन, मन और धन से इस आपदा से लड़ रहे हैं, मानवता की सेवा में अपना सब कुछ समर्पित कर रहे हैं l मौका दिया है, ईश्वर ने, इसलिए जाते, जाते इन पाप कर्मों को छोड़, कुछ तो भलाई के काम कर जा, वरना ये. मौका भी हाथ से जाएगा और फिर सिवाय पश्चाताप के कुछ भी नहीं कर पाएगा l हँसी आती है तेरी इस दुर्दशा को देख कर क्योंकि एक आखरी आसरा भी तेरे हाथ से चला गया है l अब तो भगवान ने भी अपने कपाट बंद कर मुंह मोड़ लिया है l

——- शिवेन्द्र शर्मा, इन्दौर ( मध्य प्रदेश )

