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29 अप्रैल को एक बडा खगोलीय पिंड पृथ्वी के पास से गुजरेगा, नासा ने कहा पृथ्वी सुरक्षित

 

29 अप्रैल को एक अनोखी खगोलीय घटना ब्रह्मांड में होने जा रही है। माउंट एवरेस्ट की आधी ऊंचाई के बराबर एक बड़ा खगोलीय पिंड (क्षुद्रग्रह) पृथ्वी के पास से गुजरने वाला है। नासा ने स्पष्ट किया है कि ये पहाड़ी चट्टान पृथ्वी से किसी भी सूरत में टकराने वाली नहीं है।

4.1 किलोमीटर (व्यास) जितना चौड़ा ये खगोलीय पिंड सुबह 4:56 बजे 31320 प्रति घंटे की गति से पृथ्वी के पास से गुजरेगा। उस समय यह धरती से 3.9 मिलियन माइल्स दूर होगा। जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच स्थित 3.84 लाख किलोमीटर दूरी से 16 गुना अधिक होगी।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय घटना को नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। टेलीस्कोप की मदद से ही लोग इसे देख सकते हैं। अमेरिका की अंतरिक्ष शोध अनुसंधान एजेंसी (नासा) को इस खगोलीय पिंड के बारे में साल 1998 में ही पता चल गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसका नाम 52768 और 1998 ओआर-2 दिया है। इसकी कक्षा चपटे आकार की है। 1998 से वैज्ञानिक इसका लगातार अध्ययन कर रहे हैं।

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ब्रह्मांडीय दूरी को खगोलीय इकाई में नापा जाता है। एक खगोलीय इकाई पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी यानी 150 मिलियन किलोमीटर के बराबर होती है। 29 अप्रैल को होने वाली खगोलीय घटना की दूरी पृथ्वी से 3.9 मिलियन माइल्स ही है। जो खगोलीय इकाई के मुताबिक काफी कम है।

4.5 अरब साल पहले जब सौरमंडल का निर्माण हुआ तो कई ऐसे खगोलीय पिंड थे जो ग्रह का आकार नहीं ले सके। खरबों की संख्या में ये खगोलीय पिंड मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच स्थित खगोलीय बेल्ट में पाए जाते हैं। अपने अनियमित आकार में ग्रहों से छोटे और उल्का पिंडो से बड़े होने की वजह से इन्हें हम छोटे ग्रहीय खगोलीय पिंड भी कह सकते हैं। ये भी सौरमंडल में दूसरे ग्रहों की तरह सूर्य के चक्कर लगाते हैं। ये प्राय: तीन प्रकार के होते है। सी टाइप, एस टाइप और एम टाइप। 29 अप्रैल वाला खगोलीय पिंड एस टाइप का है। इनके पृथ्वी से टकराने की संभावना 20 मिलियन सालों में एक बार बनती है।

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खगोलविद ने बताया कि इस खगोलीय पिंड से घबराने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन आज से ठीक 59 साल बाद यानी वर्ष 2079 में इसी लघु ग्रह के पृथ्वी के निकट आने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने इसकी गणना की है। इसके अनुसार, यह 16 अप्रैल 2079 को हमारी धरती के पास से फिर गुजरेगा तब धरती से इसकी दूरी मात्र एक मिलियन माइल्स की होगी।

ये खगोलीय पिंड तीन साल आठ महीना यानी 1344 दिनों में एक बार सूर्य की परिक्रमा पूरी करता है। सच तो यह है कि खगोलीय पिंड बेहद खतरनाक है। यदि यह वास्तव में पृथ्वी से टकरा जाता है तो बड़ी तबाही ला सकता है।

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खगोलीय घटनाओं के तहत 22 और 23 अप्रैल की रात में लिरिड मेटियोर शॉवर उल्का पिंड वर्षा का भी विहंगम नजारे का लुत्फ उठाया जा सकता है। इस घटना के दौरान प्रति घंटे 20 से 100 की संख्या में शूटिंग स्टार्स को देखा जा सकता है। ये उल्का वर्षा 16 अप्रैल से हो रही है और 26 अप्रैल तक होगी, मगर 22 और 23 अप्रैल की रात ये चरम पर होगी।

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