Thu. Apr 16th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

सिर्फ एक बच्चे को जन्म देना ही महिलाओं को माँ नही बनाता : अनिल कुमार मिश्र,’आञ्जनेय’

 

एक तपस्या है माँ बनना

अनिल कुमार मिश्र,’आञ्जनेय’, हज़ारीबाग़ | ‘माँ’एक ऐसा शब्द है जिसके उच्चारण मात्र से ऐसा लगता है मानो सारी तकलीफ,सारी पीड़ा ही समाप्त हो गयी हो परंतु दिन प्रतिदिन हमारे समाज मे घटती घटनाओं को देखकर माँ शब्द भी टूटकर बिखरता सा नज़र आता है।
सिर्फ एक बच्चे को जन्म देना ही महिलाओं को माँ नही बनाता। इस शब्द के साथ कई अपेक्षाएँ एवं आकांक्षाएं भी जुड़ी होती हैं। माँ नाम है स्नेह के अविरल स्त्रोत का, माँ नाम है दया का, क्षमा का, त्याग का, माँ तो बस माँ है एक निश्छल सा हृदय जिसमे बच्चे के प्रति प्रेम की लहरें निरंतर उठती रहती है, उनके हाथ जब ईश्वर के सामने जुड़ते हैं तो बस बच्चों के लिए ही। माँ  है तो बच्चे हैं, बच्चे हैं तो माँ है दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
काल के प्रवाह में ‘माँ’ शब्द की प्रतिष्ठा को बाधित करने में भी लोग लगे हैं, ऐसे लोगों का ‘माँ’ होना एक कलंक जैसा है। शारीरिक आनंद की पूर्त्ति के लिए एक बच्चे को जन्म देना, कचरे के ढेर में उसे फेंक देना, रेल पर या कहीं और छोड़कर भाग जाना, खुद शिशु की हत्या कर फेंक देना ऐसी न जाने कितनी घटनाएँ रोज घटती हैं। इन बच्चों की माँ भी क्या माँ कहलाने योग्य है, प्रश्न निश्चित रूप से आत्मा को झकझोरता है। बहुओं को दिन रात उसके माता पिता के ताने देकर प्रताड़ित करने वाली भी माँ ही है, बहुओं को आत्महत्या पर विवश करनेवाली भी माँ हैं और हाँ धोखे से सिलिंडर फटने के बहाने से मारने वाली भी माँ ही हैं। माँ बहुओं को बेटे से अलग कैसे मान लेती हैं जबकि विवाह के बाद बहुएँ अर्द्धांगिनी हो जाती हैं। प्रतिपल ताने उलाहने और प्रताड़ना झेलते हुए आँखों मे आँसू भरकर भी सास को बहुएँ माँ ही पुकारती हैं। माँ की आत्मा द्रवित नही होती। यदि घर मे चार बहुएँ हैं तो चारों की शिकायत एक दूसरे से, बेटों को भी आपस मे लड़वा दिया ऐसी भी माँ होती हैं जो निश्चित रूप से ‘माँ’ शब्द से सुशोभित होने की अधिकारिणी नही है।
आवश्यकता है आत्ममंथन की कि आखिर कमी कहाँ रह रही है , संबंधों से प्रेम कहाँ छूटता जा रहा है, बच्चों को जन्म देनेवाली ममतामयी माँ आखिर स्नेहहीन क्यों होती जा रही हैं ? रिश्तों की उष्णता क्यों खोती जा रही है ? यही अवसर है जब मर्यादा को कलंकित होने से रोका जा सके और हम शास्त्रों के अनुसार पाँच माओं का स्मरण कर उनके चरण वंदन कर सकें-

‘राजपत्नी गुरुपत्नी मित्रपत्नी तथैव च

पत्नीमाता स्वमाता च पंचैता मातरः स्मृता।’

 

यह भी पढें   ईरान से समझौते के बिना क्यों लौटे वेंस? तीन मुद्दों पर अटकी बातचीत, अब ट्रंप के पास क्या विकल्प?
अनिलकुमार मिश्र, ‘आञ्जनेय, गांधी-नगर,पूरब हज़ारीबाग़, झारखंड,भारत
-अनिल कुमार मिश्र,’आञ्जनेय’
                           गांधी नगर,पूरब
                           हज़ारीबाग़, झारखंड,भारत

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed