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रामजन्म भूमि परिसर में खुदाई में बडी मात्र में मिले पुराने मंदिर के अवशेष

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अयोध्या,

श्रीरामजन्मभूमि परिसर में चल रहे समतलीकरण के दौरान बड़ी मात्रा में प्राचीन मंदिर के अवशेष मिलने से संत समाज में उल्लास है। इन सभी ने एक स्वर में कहा कि इतनी बहुमूल्य सामग्री मिलने से साबित हो गया कि अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर था, मंदिरों के इस शहर को उजाड़ा गया और देश की शीर्ष कोर्ट में सुनवाई के बाद साबित हो ही गया कि यहां मंदिर था।

रामजन्म भूमि क्षेत्र में मूर्तियां मिलने के बाद अयोध्या के संतों की प्रतिक्रिया आने लगीं। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि यहां पर पौराणिक काम की दर्जनों खंडित मूर्तियों के साथ ही करीब पांच फुट ऊंचा शिवलिंग मिलने से तय हो गया कि यहां पर कई मंदिर थे। यहां पर तमाम नक्काशीदार मूर्तियां मिलने के साथ ही विशाल चक्र भी मिले हैं। श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय ने कहा कि मलबा हटाने के दौरान कई मूर्तियां और एक बड़ा शिवलिंग मिला है। राम मंदिर निर्माण के लिए बनाई गई ट्रस्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का कहना है कि समतलीकरण के दौरान काफी संख्या में पुरावशेष यथा देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, पुष्प, कलश, आमलक, दोरजाम्ब आदि कलाकृतियां, मेहराब के पत्थर, 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तम्भ, 8 रेड सैंड स्टोन के स्तंभ और 5 फिट आकार की नक्काशीदार शिवलिंग की आकृति मिली है।

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हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास ने कहा कि अब तो तय हो गया कि अयोध्या में सनातन धर्म का बोलबाला था। यहां पर खोदाई के दौरान एएसआई को पौराणिक वस्तुएं मिली थीं और आज भी यहां पर कुआ, खंभे तथा कसौटी मिल रहे हैं। रामजन्मभूमि स्थल पर खुदाई के दौरान मिले अवशेषों को रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने अमूल्य धरोहर बताया है। इन धरोहरों को संजोकर कर रखा जाएगा। उन्होंने कहा है कि अब जल्द ही अयोध्या में भव्य राम लला का मंदिर बनकर तैयार होगा।

आचार्य सतेंद्र दास ने कहा कि अब किसी को मंदिर का प्रमाण देने की जरूरत नहीं है। दस दिनों से चल रहे समतलीकरण के काम से सारे प्रमाण धरातल पर आ गए हैं। राम दास विलास वेदांती ने कहां कि रेड सैंड स्टोन के विशाल पिलर साबित कर चुके हैं कि अयोध्या भगवान राम की नगरी थी। महंंत कन्हैया दास ने कहा कि आंख के सामने ही सारा सच आ गया है। अब तो किसी को बताने की जरूरत नहीं है कि अयोध्या में क्या था।

खुदाई में मूर्तियां और शिवलंग मिलने पर अयोध्या के संत समाज ने खुशी व्यक्त करते हुए यह माना है कि जो अवशेष समतलीकरण के दौरान मिले हैं। वह रामजन्मभूमि के ही हैं, जिसे आक्रमणकारियों ने तोड़ दिया था। संतों ने कहा कि यह बहुत ही बढ़िया काम है इसे और भी पहले शुरू होना था, लेकिन कोरोना वायरस वजह से काम में देरी हुई है। संतों ने माना है कि जमीन समतलीकरण में मिले पुरातत्व अवशेष में प्राचीन आमलक मंदिर के चौखट, प्राचीन शिवलिंग यह सब निश्चित ही हम लोगों के लिए गौरव का विषय है। खुदाई के दरमियान मिले पत्थरों में राम की मूर्ति, सीता की मूर्ति, शिव की मूर्तियों की कलाकृतियां मिली हैं।

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श्रीरामजन्मभूमि परिसर में इन दिनों भव्य मंदिर के निर्माण के लिए खुदाई के साथ समतलीकरण का काम चल रहा है। इसी बीच खुदाई में कलश, दर्जन से अधिक मूर्ति युक्त पाषाण स्तंभ, देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां, नक्काशीदार शिवलिंग, प्राचीन कुआं, चौखट आदि शामिल हैं। 11 मई से शुरू समतलीकरण रामलला के मूल गर्भगृह के आसपास चल रहा है। गत वर्ष नौ नवंबर को सुप्रीम फैसला आने के साथ ही स्पष्ट हो गया था कि जिस गर्भगृह में रामलला विराजमान थे, तय हो गया कि वहां विक्रमादित्ययुगीन मंदिर था।

समतलीकरण के दौरान बुधवार को जिस मंदिर के अवशेष मिले हैं, उसके बारे में अभी यह नहीं कहा जा सकता कि यह उसी मंदिर के हैं या बाद में बने किसी मंदिर के हैं। रामजन्मभूमि परिसर में विक्रमादित्ययुगीन मंदिर के साथ कई अन्य मंदिरों के अवशेष दफन होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यहां इस परिसर में राम मंदिर के अलावा कई अन्य देवी-देवताओं के प्राचीन-पौराणिक मंदिर सहित उन आधा दर्जन मंदिरों के अवशेष भी समाहित हैं, जिन्हें 27 वर्ष पूर्व सही-सलामत अधिग्रहित कर 67.77 एकड़ के परिसर में शामिल किया गया था। हालांकि बुधवार को मिले अवशेष में सात ब्लैक टच स्टोन का समीकरण कसौटी के स्तंभ से जोड़ कर देखा जा रहा है। मान्यता है कि विक्रमादित्य ने दो हजार वर्ष पूर्व जिस मंदिर का निर्माण कराया था, वह कसौटी के ऐसे ही स्तंभों पर टिका था।

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मंदिर निर्माण के लिए गठित श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पुरावशेष मिलने की जानकारी तो विस्तार से दी गई है, पर प्राप्त पुरावशेष के बारे में कुछ कहने से इनकार किया गया है। समझा जाता है कि विशेषज्ञों के निरीक्षण के बाद पुरावशेषों के बारे में अंतिम रूप से कोई राय व्यक्त की जा सकेगी। साकेत महाविद्यालय में प्राचीन इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कविता सिंह कहती हैं, पहले से ही तय है कि रामजन्मभूमि परिसर में स्वर्णिम अतीत की भरी-पूरी पटकथा समाहित है और वह धीरे-धीरे सामने आएगी। तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्माण के दौरान पुरातात्विक धरोहरों को संरक्षित करने के साथ अतीत के संकेतों को ध्यान में भी रखकर निर्माण की दिशा तय करनी होगी।

दैनिक जागरण से

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