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नागरिकता संबंधी नेकपा का निर्णय मधेशी के ऊपर आक्रमण, सडक और सदन में संघर्ष होगाः सांसद् यादव

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प्रदीप यादव /फाईल तस्वीर

वीरगंज, २० जून । जनता समाजवादी पार्टी के नेता तथा प्रतिनिधिसभा सदस्य प्रदीप यादव ने कहा है कि वैवाहिक अंगीकृत नागरिकता संबंधी नेकपा द्वारा किया गया निर्णय मधेश विरोधी और मधेशी जनता की अस्मिता के ऊपर आक्रमण है । उनका कहना है कि अगर वैवाहिक अंगीकृत नागरिकता संबंधी ऐन लाने की कोशीश होती है तो सडक और संसद् दोनों जगह से संघर्ष शुरु हो जाएगा । स्मरणीय है, आज (शनिबार) ही सत्ताधारी दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) ने निर्णय किया है कि नेपाली पुरुष से शादी करनेवाले विदेशी महिलाओं को ७ साल के बाद ही अंगीकृत नागरिकता प्रदान किया जाएगा । नेकपा का यह निर्णय सार्वजनिक होते ही प्रदेश नं. २ में विरोध शुरु हुआ है ।
सांसद् यादव ने कहा है– ‘मधेश में रहनेवाले मधेशियों का संबंध भारतीय शहर बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल के साथ है, जो दोनों देशों की नक्सा निर्धारण होने से पहले से ही है । परम्परा दोनों देशों की नागरिकों के साथ जुड़ा हुआ है । परम्परागत इस संस्कृतिक संबंध को तोड़ने के लिए सत्ताधारी दल नेकपा ने मधेशी जनता विरोधी निर्णय किया है ।’ उनका कहना है कि अगर शादी के ७ साल बाद ही अंगीकृत नागरिकता मिलती है तो कई समस्या आती है, जो जन–जीवन में प्रत्यक्ष नकारात्मक असर पड़नेवाला है ।
सांसद् यादव ने आगे कहा है– ‘सामान्यतः शादी के एक साल बाद बच्चा पैदा होता है, जन्मदर्ता कैसे करे ? शादी कर नेपाल आनेवाली बहू अगर लोकसेवा आयोग की परीक्षा देना चाहती है तो उनकी यह सुविधा प्राप्त होती है या नहीं ? अगर पति विदेश में है और उनके साथ ही रहना चाहती है तो राहादानी बनाना पडेगा, उसम समय क्या करें ? ७ साल से पहले ही पति का निधन हो जाता है तो उसके बाद क्या करें ? जायजाद पाने लिए नाता प्रमाणित अनिवार्य है, वह अपनी अधिकार से बंची हो जाएगी ।’ उनका कहना है कि इस तरह का प्रावधान मानव अधिकार और लोकतन्त्र विरोधी है । ऐसे प्रावधान के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए उन्होंने आम सर्वसाधारण से आह्वान भी किया है ।

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