Sat. Aug 15th, 2020

हिमाचल प्रदेश का करशाणा गांव

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हिमाचल प्रदेश के करसोग उप-मंडल के अंतर्गत पांगणा-फेगल मार्ग पर मुख्य सड़क के साथ करशाणा गांव बसा है। पांगणा उप-तहसील मुख्यालय से करशाणा लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है। जंगलों के बीच बसा करशाणा गांव मन को मुग्ध कर देता है।यहां घर पुरानी व नई शैली के बने हुए हैं। यहां अध्यापक श्री मानसिंह गुलेरिया जी,श्री डोगर सिंह गुलेरिया जी,श्री प्रेम सिंह गुलेरिया जी,श्री चेत सिंह गुलेरिया जी के साथ समाजसेवी ठाकुर श्री देवीसिंह जी,श्री अजीत सिंह ठाकुर जी,श्री सुरेश कुमार ठाकुर जी के परिवार के लगभग 50 सदस्य रहते हैं।भाषा और संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा दिसम्बर 2010 में प्रकाशित हिमाचल प्रदेश के स्थान नाम व्युत्पत्तिजन्य विवेचनात्मक अध्ययन नामक पुस्तक में लिखा है कि कृषि कार्य में कुशल कृषकों को “करशाण”कहते हैं। अतः करशाणो’ का गांव होने के कारण इस गांव का नाम करशाणा पड़ा।करशाणा के संदर्भ में अध्यापक उदय सिंह गुलेरिया जी ने बताया कि राजसीकाल में पालमपुर से आए उनके पूर्वजों ने इस गांव को बसाया था।इस गांव के लोगों का मुख्य पेशा खेती-बाड़ी और पशु पालन है।गंदम,मक्खी,दालों के साथ अंग्रेजी सब्जियों की यहाँ अच्छी पैदावार होती है।सेब,अंगूर के साथ अब आम,नींबू के पौधे भी खेतों में नजर आने लगे हैं। करशाणा के किसान आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती का प्रयोग अपने खेतों में करने लगे हैं।सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती के पज्याणु स्थित प्रदर्शनी स्थल की प्रगतिशील किसान मास्टर प्रशिक्षिका जिला सलाहकार श्रीमती लीना शर्मा जीे के नेतृत्व में 9 जून 2020 को करशाणा में कृषि विद्यालय का शुभारंभ हुआ।इस अवसर पर करसोग विकास खंड के कृषि वाद विशेषज्ञ श्री रामकृष्ण चौहान जी,सहायक तकनीकी प्रबंधक सुश्री सोनाली महाजन जी और तकनीकी प्रबंधक श्री लेखराज जी ने 23 किसानों को सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्रदान कर इन किसानों को निशुल्क बीज भी वितरित किए।श्री देवीसिंह ठाकुर जी का कहना है कि करशाणा गांव के साथ ही शिकारी देवी की चरण गंगा रुपी पांगणा खड्ड बहती है लेकिन करशाणा वासी सिंचाई सुविधा से वंचित हैं।करशाणा गांव की महिलाएं चाहती हैं कि पेयजल व्यवस्था में भी जल्द सुधार हो।ताकि दैनिक जीवन में महिलाओं को पानी की कमी से न जूझना पड़े।श्री देवीसिंह जी का कहना है कि पांगणा-फेगल सड़क को आज तक पक्का नहीं किया गया है। यह सड़क पकी हो जाए तो यातायात सुविधाजनक हो सकता है।बरसात में यह सड़क कीचड़ से भर जाती है।गांव में सभी त्योहारों को धूमधाम से मनाया जाता है।प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त करशाणा के सामने रड़ू नामक टेकड़ी से चारों ओर का दृश्य बहुत मनमोहक है।इसी शांत एकांत टेकड़ी के शीर्ष भाग से करशाणा गांव का यह चित्र खींचा है।

करशाणा गांव
डॉ जगदीश शर्मा
पांगणा करसोग
हिमाचल प्रदेश

 

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