Wed. Apr 17th, 2024

जमीं पे रह के वो देखेगा आसमाँ कैसे, हमेशा गरदिश–ए–दौरा का जो शिकार रहे : शारिक रब्बानी

गजल कार्यक्रम में  अन्जुमन शाहकार–ए–उर्दू उत्तर प्रदेश भारत के अध्यक्ष शारिक रब्बानी द्वारा पढा गया गजल
मेरी निगाह में पैहम वो रु–ए–चार रहे ।
मैं बेकरार हूँ दिल को मेरे करार रहे ।
मेरी वफाओं का जेवर सम्भाल कर रखना
मेरी हयात का लम्हा न बेकार रहे ।
जमी पे रह के वो देखेगा आसमाँ कैसे
हमेशा गरदिश–ए–दौरा का जो शिकार रहे ।
जहे नसीब मेरे होंठो पर मेरे दिलबर
मैं चाहता हूँ तेरा जिक्र बार–बार रहे ।
मैं अपना प्यार बड़े दायरे में रखता हूँ
कि चाहता हूँ जिसे उसको एतबार रहे ।
तुम्हारे सिम्त से उल्फत की भी सदा उठे
फकत ये तुम पे मेरा दिल ही क्यूं निसार रहे ।
मेरी निगाह में “शारिक” वो अकल वाला है
जहाने हुस्न मे जाये जो होशियार रहे ।

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