Sat. Apr 13th, 2024

लाऊँ कहाँ से अहले सुखन में मताऐ फन बिखरा हुआ अदब है शिकसता ख्याल है :अन्सार नेपाली

बाँकें/ नेपालगंज



पवन जायसवाल

गुल्जार–ए– अदब में अन्सार नेपाली द्वारा प्रस्तुत किया गया गजल ।
चेहरे पे नेकियों का चमकता जलाल है
अल्लाह की रजा का सरापा जमाल है ।
पाला हूँ अपने बच्चों को आगों से फके में
कोई बुरा कहे भला किस की मजाल है ।
बेटी की तरबियत से बहुत खुश हूँ दोस्तों
फरमाने मुस्तफा है जहन्नम की ढाल है ।
मुझको मिली है दोस्तों औलाद की खुशी
लुकमा हमारे बच्चों का रिजके हलाल है ।
लाऊँ कहाँ से अहले सुखन में मताऐ फन
बिखरा हुआ अदब है शिकसता ख्याल है ।
अनसर को ऐसी इज्जतो हशमत से दूर रख
या रब मेरे खुलूस का जिसमे जवाल है ।



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