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हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद शान्ता कुमारजी द्वारा हिमालिनी को लिखागया पत्र

 

मेरी आत्मकथा मेरे जीवन की कथा ही नहीं, एक युग की राजनीति का इतिहास भी है | मैं भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी और फिर भारतीय जनता पार्टी के बनने  बिखरने के इतिहास का दर्शक ही नहीं स्वयं भोक्ता भी हूँ | श्री जय प्रकाश नारायण जी की समग्र क्रान्ति का आन्दोलन 1977  की महान सफलता और फिर जनता पार्टी सरकार का टूटना बिखरना और उसके बाद भी श्री जय प्रकाश नारायण जी के आंसू और पटना बांसघाट तक की कहानी देखी है और लिखी है |

शान्ता  कुमार                                            यामिनी परिसर

पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद                   पालमपुर-176061, जिला कांगड़ा(हि0 प/फैक्स: 01894-230630 मार्च 2021

प्रिय एस. एस. डोगरा जी,

आपकी पत्रिका हिमालिनी का अंक मिला, बहुत अच्छा लगा | पढ़ते-पढ़ते हिमाचल की बहादुर बेटी कंगणा  रणौत के सम्बंध में आप द्वारा लिखा लेख पढ़ा, बहुत अच्छा लगा | कंगणा रणौत परिवार से मेरा सम्पर्क रहा है. पिछले दिनों वह परिवार सहित पालमपुर मुझ से मिलने आई थी |  उस लेख से पता चला कि आप भी हिमाचल निवासी हैं और फिर मेरी आत्मकथा “निज पथ का अविचल पंथी” के विमोचन का समाचार भी मैंने पढ़ा | इस सब के लिए मैं आपका आभारी हूँ |

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मैंने अपनी आत्मकथा “निज पथ का अविचल पंथी” के नाम से लिखी है 23 फरवरी को दिल्ली में इसका विमोचन हुआ | उसकी एक प्रति आपको भेज रहा हूँ |

     मैं अब सक्रिय राजनीति से थोडा मुक्त होकर अपने घर पालमपुर में रहता हूँ और स्वामी विवेकानन्द सेवा केन्द्र में ही अपना समय लगा रहा हूँ |

     मैंने अपने जीवन का लम्बा समय सक्रिय राजनीति में व्यतीत किया है | 19 वर्ष की आयु में 1953 में डा0  श्यामा प्रसाद मुकर्जी के नेतृत्व में काश्मीर आन्दोलन में सत्याग्रह करके 8 मास जेल गया और उसके बाद लगातार चलता ही रहा | जीवन के प्रारम्भ में गीता और स्वामी विवेकानन्द से प्रभावित हुआ |  लम्बे राजनैतिक जीवन में आदर्शों और सिद्धान्तों से कभी समझौता नही किया | मूल्यों की राजनीति की | उसके लिए मूल्य भी चुकाया |

     मेरी आत्मकथा मेरे जीवन की कथा ही नहीं, एक युग की राजनीति का इतिहास भी है | मैं भारतीय जनसंघ, जनता पार्टी और फिर भारतीय जनता पार्टी के बनने  बिखरने के इतिहास का दर्शक ही नहीं स्वयं भोक्ता भी हूँ | श्री जय प्रकाश नारायण जी की समग्र क्रान्ति का आन्दोलन 1977  की महान सफलता और फिर जनता पार्टी सरकार का टूटना बिखरना और उसके बाद भी श्री जय प्रकाश नारायण जी के आंसू और पटना बांसघाट तक की कहानी देखी है और लिखी है |

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     श्री दीन दयाल उपाध्याय और अटल जी के समय पार्टी की मान्यता थी कि हम केवल सरकार बदलने के लिए ही नही अपितु समाज बदलने के लिए आये हैं | छल-कपट और दल-बदल की राजनीति सरकारें बदल सकती हैं परन्तु समाज नहीं बदल सकती |  यही आज तक होता रहा | इसी कारण विकास तो होता रहा परन्तु सामाजिक न्याय नही हुआ | अमीरी चमकती रही गरीबी सिसकती रही | अभी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में अरबपतियों की संख्या इतनी बड़ी है कि विश्व के 190 देशों में अरबपतियों की दृष्टि से भारत का चौथा स्थान है | परन्तु ग्लोबल हंगर इन्डैक्स की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के सबसे गरीब 119 देशों में भारत नीचे 102 क्रमांक पर है | आज भी भारत में 19 करोड़ 40 लाख लोग लगभग भूखे पेट सोते हैं | यदि मूल्य आधारित राजनीति होती तो यह शर्मनाक  दृश्य न होता |

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     मेरी आत्मकथा देश की राजनीति में मूल्य आधारित राजनीति के प्रयोग का एक सजीव दस्तावेज भी है |

     मेरी इच्छा है और मैं आपसे आग्रहपूर्वक निवेदन कर रहा हूँ कि मेरी इस आत्मकथा की विस्तृत समीक्षा आप द्वारा चलाई जा रही देश की प्रमुख हिन्दी पत्रिका में छपे |

     सामान्य स्थिति होने पर कभी पालमपुर परिवार सहित आयें | पालमपुर हिमाचल प्रदेश का एक अत्यन्त सुन्दर पर्यटन केन्द्र है | विवेकानन्द ट्रस्ट की ओर से योग व प्राकृतिक चिकित्सा का प्रमुख केन्द्र ‘कायाकल्प’ चल रहा है | आप उस में स्वास्थ्य लाभ भी कर सकते हैं |    ‘कायाकल्प’ का परिचय पत्रक भी भेज रहा हूँ |

धन्यवाद सहित

 सादर आपका

      ( शान्ता कुमार )

श्री एस0 एस0 डोगरा

Bureau Chief

हिमालिनीC-364/42, Mahavir Enclave-III,, Uttam Nagar, New Delhi-110059

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