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पांगणा की लीना ने विश्व को दिखाई राह, अद्वितीय प्रतिभा के कारण कई बार मिल चुके है विशिष्ट सम्मान

सुकेत रियासत की ऐतिहासिक नगरी पांगणा के पज्याणु गांव की स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त गृहिणी लीना शर्मा ने सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती में हिमाचल प्रदेश ही नहीं अपितु विश्व समुदाय को एक नई दिशा प्रदान की है। ऊर्जा,वातावरण एवं जल परिषद,खाद्य एवं भू उपयोग सहित चिरगामी कृषि क्रियाओं के आर्थिक सहकारिता एवं वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के विषय में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर “वैबनार”के सीधे प्रसारण में भारत की एकमात्र महिला लीना शर्मा ने भाग लेकर प्राकृतिक कृषि के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश का नाम ऊँचा किया।चूँकि चिरकालीन से कृषि क्रियाओं जिनमें रासायनिक कृषि भी सम्मिलित है के प्रभाव-कुप्रभाव वातावरण,भूमि और पानी में पड़ते हैं।एकल कृषि से वृहद उपयोगी वनस्पति नष्ट हो जाती है।इन क्रियाओं से जलवायु,वातावरण और आर्थिक प्रभावित होती है।इस संदर्भ में हुए प्रेरक अंतर्राष्ट्रीय संवाद में लीना शर्मा ने जो ठोस और दूरगामी सुझाव दिए उससे कृषि विशेषज्ञ भी गदगद हुए।लीना शर्मा का कहना था कि ज़लवायु,वातावरण और आर्थिक प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करती है।अतः हर विभाग की इसमें भागेदारी होना आवश्यक है। केवल कृषि ही नहीँ जंगल भी जलवायु और वातावरण को प्रभावित करते हैं। केवल चील के ही पेड़ लगाने से आग की दुर्घटनाएं बढ़ती हैं।लीना शर्मा ने कहा कि प्राकृतिक कृषि में आच्छादन के लिए जंगल पर निर्भरता रहती है।परंतु क्या वनस्पति का आच्छादन उपयोगी है?यह भी महत्वपूर्ण है।विश्व संवाद मंच पर अपनी संघर्षमयी पहचान बनाने में सफल रही लीना शर्मा के अतिरिक्त इस सीधे प्रसारित सेमिनार में राष्ट्रीय नीति आयोग के उपाध्यक्ष डाक्टर राजीव कुमार,”वाटरशैड स्पोर्ट सर्विसेज एण्ड एक्टीविटी नेटवर्क(वासन) के निदेशक रविन्द्रा ए.,स्थाई कृषि मुखोपाध्याय ट्रस्ट(सीयू) के नैनगचा लौवम,सेंटर फार सस्टेनेवल एग्रीकल्चर के एक्जीक्यूटिव निदेशक जी वी रामानजने तथा पावरिन्ग लाईवहुड सीयू के निदेशक अभिषेक जैन ने भाग लिया।

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लीना शर्मा ने लगभग अढ़ाई वर्षों में ही सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती से जुड़कर विकास की ऐसी गाथा लिखी जिसके परिणामस्वरूप आज समय-समय पर आकाशवाणी शिमला व एफ एम शिमला से लीना शर्मा का जैविक खेती से जुड़ा प्रेरणादायक संदेश समाज के हर वर्ग को प्राकृतिक खेती अपनाने की प्रेरणा प्रदान करता है।प्रदेश भर में सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती से प्रत्यक्ष तौर से जुड़े किसानों में लीना शर्मा एक ऐसी प्रगतिशील किसान हैं जिन्होंने दिल्ली के प्रगति मैदान में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कृषि मेले में एकमात्र महिला किसान के तौर पर भाग लेकर हिमाचल प्रदेश का नेतृत्व किया।सूचना एवं जन संपर्क विभाग मण्डी द्वारा पज्याणु में लीना शर्मा पर वृतचित्र तैयार कर प्रदेश भर के किसानों को प्राकृतिक खेती को एक नई राह दिखाई।लीना शर्मा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में,कृषि प्रशिक्षण शिविरों में जाकर तथा महिलाओं के कृषि समूह बनाकर महिलाओं को भी आत्म निर्भर बना रही हैं। सुकेत संस्कृति साहित्य एवं जन कल्याण मंच पांगणा के अध्यक्ष डाक्टर हिमेन्द्र बाली,जिला परिषद सदस्य चेतन गुलेरिया, समाज सेवी डाक्टर जगदीश शर्मा,व्यापार मंडल पांगणा के प्रधान सुमित गुप्ता,कृषि विशेषज्ञ रामकृष्ण चौहान,युवा प्रेरक पुनीत गुप्ता,विपुल शर्मा और लीना के प्रेरक पति विज्ञान अध्यापक अमर चंद शर्मा का कहना है कि लीना शर्मा ने विषमुक्त सुभाषपालेकर प्राकृतिक खेती के मूल्य को समझा और इसका सत्प्रयोजनो मे व्यवहारिक उपयोग किया।जिसे अपना लेने के उपरांत आज पज्याणु-करसोग-मण्डी-हिमाचल प्रदेश व देश भर में श्रेष्ठता और सदगुणों के अनेकानेक द्वार तो खुले ही बल्कि लीना के संघर्ष ने ऐतिहासिक नगरी पांगणा को भी धन्य बना दिया।लीना शर्मा ने जीवन के इस सयोग व अपनी उपलब्धियों के लिए कृषि विभाग के विषय विशेषज्ञों व प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानो का आभार व्यक्त किया है।

राज शर्मा (संस्कृति संरक्षक)
आनी कुल्लू हिमाचल प्रदेश

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