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सुनों ! राजनीति के ठेकेदारों ! जनता बचेगी तभी राजनीति चलेगी : अंशु झा

महामारी या राजनीति ?

सुनों ! राजनीति के ठेकेदारों, बहुत हो गया राजनीति का खेल अब जनता की अवस्था पर भी एक नजर घुमाओ । जनता रहेगी तभी तो आपलोग कुर्सी पर बैठेंगे । जनता ही नहीं रहेगी तो कुर्सी का खेल कहां सम्भव हो पाएगा । कब से जनता अपनी पथराई आंखों से अपने देश हांकने वालों के तरफ देख रही है कि कहीं से उसे कुछ सहयोग प्राप्त हो जाए । पर अफसोस ! जनता निराश हो गई है । अब उसे केवल बस ईश्वर मात्र से ही अपेक्षा है ।
महामारी का डर तो केवल जनता को ही है, नेतागणों को तो कुर्सी का लालच है । सबका सपना बस यही है कि किस प्रकार कुर्सी पर बैठ जाऊं या बैठा रहूं और बैठे-बैठे देश का कोष लूटता रहूं, अन्य राष्ट्रों के सामने कटोरा बढाकर खुद का पेट भरता रहूं । लानत है ! अपने आपको जन प्रतिनिधि कहलाने वालों पर । फिलहाल देश की अवस्था ऐसी है कि सिर्फ सरकार ही नहीं विपक्षी दलों को भी सत्ता का जोड-घटाव छोडकर जनता की सेवा में लग जाना चाहिए । दल के नेताओं को रिसोर्ट में बैठकर ऐशो आराम करने के बजाय अस्पताल बनाने की सोच को जागृत करना चाहिए । इस महामारी के समय सरकार की आलोचना करते हुए एक विज्ञप्ति निकाल देने से ही विपक्षी दलों का दायित्व सम्पन्न नहीं हो जाता । फिलहाल पार्टी के देश भर के कार्यकर्ता पंक्ति को जनता की सेवा में परिचालन करने की आवश्यक्ता है । जनप्रतिनिधियों को इस वक्त अपने निर्वाचन क्षेत्र के पीडित जनता पर विशेष ध्यान रखना चाहिए । इस कार्य के लिए देश के सभी राजनीतिक दलों को तत्पर्यता दिखाना चाहिए ।

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कोरोना कहर में आक्सिजन के हाहाकार होने से जनता में एक प्रकार का डर पैदा हो गया है । आखिर आक्सिजन का हाहाकार क्यों ? और इसका सामाधान कैसे हो सकता है ? इसके लिए अखण्ड राष्ट्र को उक्त विषय पर ध्यान देना जरुरी है । इसके लिए अगर जनशक्ति का अभाव है तो राजनीतिक दलों का इस कार्य में सामूहिक प्रयत्न आवश्यक है । पिछले साल के लकडाउन के समय देश के विभिन्न जिलाओं में मजदुर एवं विपन्न वर्गों के लिए राहत वितरण कार्यक्रम किया जाता था जिसमें तीनों तहों का सरकार तथा नेता कार्यकर्ता सक्रिय दिखते थे परन्तु इसबार सबके सब राजनीतिक पल्लु सम्हालने में लगे हुए हैं । राष्ट्राध्यक्ष के तरफ से अध्यादेश पर अध्यादेश जारी किया जा रहा है । जनता छटपटा-छटपटाकर दम तोड रही है । दिनानुदिन संक्रमितों तथा मृतकों की संख्या में वृद्धि हो रही है । पर किसी का ध्यान महामारी के तरफ नहीं है ।
समग्र में महामारी के समय जनता की सुरक्षा तथा बचाव करना सरकार का मुख्य दायित्व है । देश के सम्पूणर् जनता को कोरोना विरुद्ध का टीका उपलब्ध करवाना सरकार का काम है । जनता बचेगी तभी राजनीति चलेगी । इसलिए पहले महामारी पर ध्यान दें फिर राजनीति करें ।

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