Sat. Jun 13th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें himalini-sahitya

माफ़ करूँ उन्हें कैसे, जो औरों की जलती रूह पे अपना हाथ सेंकते : करुणा श्री

 

शमशान

माफ़ करूँ उन्हें कैसे
जो औरों की जलती रूह पे अपना हाथ सेंकते
अपने दम्भ की मदहोशी में डूब
घर को दीमक सा चाट खंडहर बनाते

हृदय जिसका हो सूखे दरख़्त सा
पिघलते मोम की उन्हें परख़ कहाँ
छलावा जिसका मिजाज़ हो
समर्पण की उन्हें क़दर कहाँ

उलझे रिश्तों की अनगिनत गांठो को
सुलझाने का मन बनाते जब जब हम
टूट जाता वो हिम्मत का धागा
शमशान बन जाता ये खंडहर सा घर

यह भी पढें   अंशु झा रचित ‘पवित्र रजस्वला’ हिन्दी काव्य संग्रह का विमोचन
डा.करुणा वन्त, काठमाडौं

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *