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शक्ति ही जीवन है, शक्ति ही धर्म है, शक्ति ही सत्य और सर्वत्र है : श्वेता दीप्ति

 

या देवी सर्वभूतेषू शक्तिरूपेण संस्थिता ।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

डा.श्वेता दीप्ति, (सम्पादकीय हिमालिनी अंक अक्टूबर २०२१) |  वेद, उपनिषद और गीता में शक्ति को प्रकृति कहा गया है। प्रकृति यानि जीवनदायिनी तात्पर्य यह कि प्रकृति माँ है, जो हमें साँसें देती है और हमें पालती है । इसलिए हम कह सकते हैं कि प्रकृति में ही शक्ति निहित है । शक्ति जिससे सृजन होता है और जो विध्वंश का सामर्थ्य भी रखती है ।
वेदों मे वर्णित है कि शक्ति से ही यह ब्रह्मांड चलायमान है । शक्ति के बल पर ही हम संसार में विद्यमान हैं । शक्ति ही ब्रह्मांड की ऊर्जा है ।   वेदों में ब्रह्मांड की शक्ति को चिद् या प्रकृति कहा गया है । गीता में इसे परा कहा गया है । इसी तरह प्रत्येक ग्रंथों में इस शक्ति को अलग–अलग नाम दिया गया है । इस समूचे ब्रह्मांड में व्याप्त हैं सिद्धियाँ और शक्तियाँ । स्वयं हमारे भीतर भी कई तरह की शक्तियाँ हैं । ज्ञानशक्ति, इच्छाशक्ति, मनःशक्ति और क्रियाशक्ति आदि । अनंत हैं शक्तियाँ । वेद में इसे चित्त शक्ति कहा गया है जिससे ब्रह्मांड का जन्म होता है । यह शक्ति सभी के भीतर होती है । अनादिकाल की परम्परा ने माँ के रूप और उनके जीवन रहस्य को बहुत ही विरोधाभासिक बना दिया है । किन्तु सभी रहस्यों से परे हम माँ दुर्गा की शक्ति के संचित कोष के रूप में आराधना करते हैं और स्वयं में आत्मशक्ति का निर्माण करते हैं ।
समय शक्ति की आराधना का है और इस बात का भी कि हम नारी और उसके विभिन्न रूपों को भी पहचान सकें । समय इस बात का भी है हर नारी अपने अन्दर निहित शक्ति को पहचान सके । नारी सशक्तिकरण की आड़ में मूल्यों और परम्पराओं की धज्जियाँ ना उड़ाएँ । पहनावे और निरर्थक बहस से परे स्वयं के अन्दर अपनी संस्कृति और परम्परा का ओज उत्पन्न करें । स्वयं को इस लायक बनाए कि उसे सम्मान देने के लिए यह समाज विवश हो जाए । अर्थात् अपने व्यक्तित्व को निखारे और अपने आत्मबल को बढ़ाएँ । समय इस बात का भी है कि नारी की पूजा करने वाला समाज इस बात को यथार्थ में स्वीकार करे और घर, समाज तथा देश में उसे सम्मान और इंसान होने का अधिकार प्रदान करे । तभी शक्ति पूजा का यह महान पर्व सार्थक सिद्ध हो पाएगा ।
आइए मानसिक दुर्भावनाओं से मुक्त हों । शक्ति का संचय करें, शक्ति की उपासना करें क्योंकि शक्ति ही जीवन है, शक्ति ही धर्म है, शक्ति ही सत्य है, शक्ति ही सर्वत्र है और शक्ति की हम सभी को आवश्यकता है । शारदीय नवरात्र की अनेक–अनेक शुभकामनाएँ ।
shweta dipti
डा श्वेता दीप्ति

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