Tue. Feb 27th, 2024
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आओ हे ऋतुराज वसंत, आओ मन्मथ मित्र वसंत :प्रतिभा राजहंस



आओ हे ऋतुराज वसंत
भरो जग- जीवन में आनंद
खिलाओ सुमन उड़े मकरंद

आओ हे ऋतुराज वसंत
आओ मन्मथ मित्र वसंत

खिलाओ पत्र-पुष्प अनंत
लाल-हरा- पीला सबरंग
रंगो धरा का चीर अनंत
सजाओ धरा-वधू के अंग

आओ हे ऋतुराज वसंत
आओ हे ऋतुराज वसंत

सजा लता-मंडप बहु रंग
बुलाओ दूलह मित्र अनंग
रति दुल्हन में भरो उमंग
चिर यौवन अनंत रसरंग

आओ हे ऋतुराज वसंत
आओ हे ऋतुराज वसंत
फूले प्रकृति सखी के अंग
फले धरा- वधू सबरंग

आओ हे ऋतुराज वसंत
आओ हे ऋतुराज वसंत

कुहू-कुहू कोयल की तान
मधुर भ्रमरों का गुंजन गान
तितलियों के पर रंग- बिरंग
धरा की चुनर हो नवरंग
बसाओ प्राणों में आनंद

आओ हे ॠतुराज वसंत
आओ हे ॠतुराज वसंत

प्रकृति बिहॅंस उठी है मंद
खुले कोंपल हैं कल थे बंद
रति की प्रतिकृति रूप अनंत
चली इतराती प्रिय के संग
पुरुष मन में छाया आनंद

आओ हे ॠतुराज वसंत
आओ हे ऋतुराज वसंत

ह्रदय कमल फूले नवरंग
भ्रमर झुंड को मृदु मकरंद

आओ हे ऋतुराज बसंत
आओ मन्मथ मित्र वसंत



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