Sat. Apr 20th, 2019

14 अप्रैल काे है रामनवमी, रामनवमी के दिन करें हवन हाेगी आपकी मनाेकामना सिद्ध

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भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को हिन्दू धर्म के सभी लोग रामनवमी के रूप में बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। चैत्र नवरात्र‍ि के आरंभ के साथ ही बड़ी उत्सुकता से रामनवमी का इंतजार होता है।
इस वर्ष 6 अप्रैल 2019 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हुई है, और कैलेंडर के अनुसार 14 अप्रैल को रामनवमी का पर्व मनाया जाना चाहिए। परन्तु कई लोगों में इसे लेकर मतभेद हैं कि रामनवमी 13 अप्रैल शनिवार के दिन मनाई जाए या फिर 14 अप्रैल रविवार के दिन?
दरअसल भगवान राम का जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन में हुआ था। इस वर्ष पुष्य नक्षत्र एक दिन पहले यानि 13 अप्रैल शनिवार के दिन आ रहा है, जिसके कारण नक्षत्र के आधार पर भ्रम की स्थि‍ति निर्मित हो रही है, और कुछ पंडितों का मानना है कि अगर पुष्य नक्षत्र के आधार पर देखें तो रामनवमी 13 अप्रैल को मनाई जानी चाहिए।
उधर उदया तिथि के अनुसार विचार किया जाए, तो 14 अप्रैल रविवार के दिन नवमी तिथि आ रही है, अत: तिथि के आधार पर इसी दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाना चाहिए।
कुछ लोग यहां नक्षत्र के आधार पर राम लला का जन्मोसव मना रहे हैं तो कुछ तिथि के अनुसार। यही कारण है कि इस वर्ष रामनवमी को लेकर अलग-अलग मत देखने को मिल रहे हैं। वेबदुनिया के ज्योतिषि‍यों के अनुसार रामनवमी 13 अप्रैल को ही मनाना शास्त्र सम्मत होगा।
 रामचरितमानस की पावन चौपाईयों को रामनवमी के शुभ दिन अभिमंत्रित करने का तरीका यह है कि रात्रि को 10 बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा इन्हें सिद्ध करें। कहते हैं भगवान् शंकरजी ने मानस की चौपाइयों को मंत्र-शक्ति प्रदान की है- इसलिए भगवान शंकर को साक्षी बनाकर इनका श्रद्धा से जप करना चाहिए।
क्या होती है अष्टांग हवन सामग्री :-
1.चन्दन का बुरादा, 2. तिल, 3. शुद्ध घी, 4. चीनी, 5. अगर, 6. तगर, 7. कपूर, 8. शुद्ध केसर, 9. नागरमोथा, 10. पंचमेवा, 11. जौ और 12. चावल।
* जिस उद्देश्य के लिए जो चौपाई निर्धारित है उसे सिद्ध करने के लिए हवन सामग्री द्वारा उसकी 108 बार आहुति देना चाहिए। 108 की संख्या के पीछे मान्य‍ता है कि हमारे शरीर में 108 नाड़ियां है अत: प्रत्येक मंत्र या चौपाई को 108 बार करने का विधान है।
* यह हवन केवल रामनवमी के दिन करना चाहिए।
* शुद्ध मिट्टी की वेदी बनाकर उस पर अग्नि रखकर उसमें आहुति देनी चाहिए। प्रत्येक आहुति में चौपाई बोलकर अंत में ‘स्वाहा’ बोलना चाहिए।
*108 आहुति के लिए एक सेर (80 तोला) सामग्री बनानी चाहिए। कोई चीज कम-ज्यादा हो तो कोई आपत्ति नहीं।
* पंचमेवा में पिश्ता, बादाम, किशमिश (द्राक्षा), अखरोट और काजू ले सकते हैं। इनमें से कोई चीज न मिले तो उसके बदले मिश्री मिला सकते हैं।
* शुद्ध केसर 4 आने भर ही डालना पर्याप्त है।
* हवन करते समय माला रखना उचित होगा। 108 की संख्या गिनने के लिए है।
* बैठने के लिए आसन ऊन का या कुश का होना चाहिए। अगर सूती कपड़े का हो तो वह धोया हुआ पवित्र होना चाहिए।
* अगर चौपाई या दोहा लंकाकांड की हो तो उसे शनिवार को हवन करके करना चाहिए। दूसरे कांडों के चौपाई-दोहे किसी भी दिन हवन करके सिद्ध किए जा सकते हैं।
* चौपाई एक बार बोलकर जहां बैठें, वहां अपने आसन के चारों ओर चौकोर रेखा जल या कोयले से खींच लेनी चाहिए।
* मात्र एक दिन हवन करने से वह चौपाई सिद्ध हो जाती है। इसके बाद जब तक कार्य सफल न हो, तब तक उस चौपाई का प्रतिदिन कम-से-कम 108 बार प्रातःकाल या रात्रि को, जब सुविधा हो, जप करते रहना चाहिए।

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