संविधान बचाओ-देश बचाओ संकल्प संगोष्ठी का आयोजन
जनकपुरधाम /मिश्री लाल मधुकर । स्वतंत्रता आंदोलन की तार्किक निष्पत्ति भारतीय संविधान के 73वीं वर्षगाँठ के अवसर पर जन संस्कृति मंच, दरभंगा के तत्वावधान में ‘संविधान बचाओ-देश बचाओ संकल्प संगोष्ठी’ कॉ. लक्ष्मी पासवान स्मृति सभागार, कबीरचक में जिलाध्यक्ष डॉ. रामबाबू आर्य की सदारत में रविवार को आयोजित की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत कॉमरेड भोला जी द्वारा जनवादी गीतों की प्रस्तुति से हुई।इस अवसर पर जसम राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. सुरेंद्र सुमन ने कहा कि संविधान दिवस हमारे लिए महज औपचारिकता नहीं, अनिवार्यता है।
चारों ओर से घेराबंदी कर दी गई है, राजनीति, अर्थव्यवस्था, भारतीय संस्कृति, भारतीय भाषाएँ सभी संकटग्रस्त हैं। आज हमारे कंधों पर संविधान बचाने की जिम्मेदारी है। आर्थिक, सामाजिक आज़ादी की लड़ाई हम केवल संविधान के बल पर ही लड़ सकते हैं।
मुख्य वक्ता के बतौर राजनीति विज्ञान के विद्वान प्रो.मिथिलेश कुमार यादव ने संविधान को जनता की जीत का प्रतीक बताते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल ने पूरी निष्ठा से भारतीय समाज में संवैधानिक मूल्यों की स्थापना का प्रयास नहीं किया। संविधान जीवन जीने के स्वस्थ मूल्य हमें प्रदान करता है।
उन्होंने देश की साझी विरासत को बचाने के लिए संविधान की प्रस्तावना को विद्यालय, महाविद्यालय में प्रार्थना के रूप में रखने का सुझाव दिया।
मौके पर खेग्रामस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य देवेंद्र कुमार ने मौजूदा हिंदुत्ववादी-फासिस्ट निज़ाम के संविधान विरोधी करतूतों पर बोलते हुए कहा कि आज सदियों से शोषित-दमित दलित-वंचित समुदायों के संवैधानिक अधिकारों को छीना जा रहा। आर्थिक आधार पर आरक्षण के जरिये समाजिक न्याय की मूल भावना को नष्ट करने का कार्य किया जा रहा।
तिरंगा बाँटने के इस दौरे में संविधान बाँटने की जिम्मेदारी हमें लेनी चाहिए। संवैधानिक मूल्यों की रक्षा आज का प्रमुख कार्यभार है।
मौके पर डॉ. सजंय कुमार ने संविधान को स्वाधीनता आंदोलन का सबसे खूबसूरत ख़्वाब मानते हुए कहा कि आज समाजवाद,पंथनिरपेक्षता के सभी ख़्वाब लहूलुहान हो चुके हैं।
जसम जिला सह सचिव मंजू कु.सोरेन ने कहा कि आज संविधान, नियम और कानून को कॉरपोरेट की मजूरी करनी पड़ रही। वन संरक्षण नियम-2022 आदिवासियों से भूमि हड़प कर कॉरपोरेट के हवाले करने की खुली साज़िश है। हमें आदिवासियों की इस हकमारी के विरुद्ध जनांदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। संविधान बचाने की हमारी वृहत्तर मुहिम का यह अनिवार्य कार्यभार होना चाहिए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रामबाबू आर्य ने कहा कि लोकतंत्र सूचकांक में हमारा देश लगातार पिछड़ता जा रहा। 2014 में भारत डेमोक्रेसी इंडेक्स के 27वें पायदान पर था। लेकिन आज वह 51वें स्थान पर है। अभिव्यक्ति की आजादी लगातार संकुचित होती जा रही। यह गंभीर संकट के संकेत हैं।
उन्होंने जनांदोलनों पर भरोसा जताते हुए कहा कि सत्ता जब-जब हमारे महापुरुषों के बतलाए रास्ते से मुल्क को भटकाती है, तब-तब जनता उस की लाइन सुधारती है। जनता आज भी यह माद्दा रखती है। किसान आंदोलन इसकी बेहतरीन मिसाल है। जन संघर्ष से हम अपने लोकतंत्र के आगे की यात्रा सुरक्षित कर सकते हैं। अन्य कोई रास्ता नहीं है हमारे समक्ष।
धन्यवाद ज्ञापन मशहूर चिकित्सक डॉ. सूरज कुमार ने किया। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा राजभाषा समिति की 11वीं रिपोर्ट द्वारा हिंदी वर्चस्व को लाध कर भाषिक बहुलता को नष्ट करने वाली अलोकतांत्रिक नीति का खण्डन किया।
कार्यक्रम का संचालन जिला सचिव समीर ने किया। इस अवसर पर आइसा जिलाध्यक्ष प्रिंस राज, फुलदेव बाबू आदि कतिपय लोगों की उपस्थिति रही।







