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अयोध्या राम मंदिर : स्वप्न में प्राण प्रतिष्ठित करने की तैयारी, नेपाल की काली गंडकी से प्राप्त शिला से

 

 

रामनगरी में बुधवार को पुण्यसलिला सरयू के समानांतर आस्था की एक और सरयू प्रवाहित हो उठी। यदि उस सरयू का उद्गम हिमालय की तलहटी मानसरोवर से हुआ था, तो आस्था की यह सरयू भी हिमालय के ही पर्वतीय पुंजक धौलागिरि की तलहटी से लगकर प्रवाहित पुण्यसलिला काली गंडकी से उद्भूत हो रामनगरी तक परिव्याप्त थी।

रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर के रूप में पांच सदी बाद रामभक्तों का जो चिर स्वप्न साकार हो रहा है, उस स्वप्न में प्राण प्रतिष्ठित करने की तैयारी नेपाल की काली गंडकी से ही प्राप्त शिला से हो रही है। यद्यपि रामलला की स्थापना इस वर्ष के अंत तक प्रस्तावित है, किंतु बुधवार को रामलला की मूर्ति के लिए आईं शिलाएं श्रीराम के ही रूप में स्वीकृत-शिरोधार्य हुईं।

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रामनगरी का प्रतिनिधित्व करते हुए शिला की अगवानी निवर्तमान महापौर रिषिकेश उपाध्याय एवं विधायक वेदप्रकाश गुप्त ने सैकड़ों संतों-श्रद्धालुओं तथा स्थानीय नागरिकों के साथ की। शिला की अगवानी करने वालों में भव्य राम मंदिर के निर्माण में लगी संस्था रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय एवं ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र भी रहे।

यद्यपि ट्रस्ट को रामलला की मूर्ति के लिए यह शिला गुरुवार को सुबह 10:30 बजे नेपाल से गए प्रतिनिधि मंडल की ओर से विधि-विधान पूर्वक अर्पित की जाएगी, किंतु ट्रस्ट के महासचिव सहयोगियों के साथ बुधवार की शाम ही नगरी की परिधि पर इस शिला की अगवानी करने से स्वयं को रोक नहीं सके।

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