समय एक सा कभी नही रहता, वह नित्य बदलता रहता है : रूपा झा
“कौन अपना कौन पराया”
रूपा झा
जिंदगी की दौड़ में ,संघर्षों की होड़ में
गिरकर हमे उठना बेशक आता है
अपने पर रख कर भरोसा,
पुनः दौड़ लगाना आता है
क्षणिक होता दुख दर्द का घेरा
लोगो की नीयत का पता चल जाता है
डर मत असफल होने से
सफलता हर हाल में पाना है
मंजिल अब दूर नहीं
बस दो कदम बढ़ाना है
समय एक जैसा कभी नही रहता
वह नित्य बदलता रहता है
कौन है सुख -दुख का साथी
पहचान में आ जाता है
लोगो की नीयत का पता चल जाता है
दृढ़ रहो अपनी वाणी पर
करते रहो अथक प्रयास
करो प्रतीक्षा उस पल की तुम
होना ना कभी निराश
चलते रहो निरंतर पथ पर
कमर कस के हो जा तैयार
चाहे कितनी भी हो कठिन परीक्षा
खोना ना तुम आत्मविश्वास
कौन अपना कौन पराया
विपरीत समय बतलाता है
लोगो की नीयत का पता चल जाता है
सच्चे लोग वही होते हैं
जो सच का साथ निभाते हैं
झूठे तो अक्सर नजरें चुराया करते हैं
अपनी स्वार्थ सिद्धि की धुन में
भलीभांति अंधा हो जाते हैं
करे भी तो क्या करे
आखिर पापी पेट का सवाल होता है
कौन सही कौन गलत है
बेशक पता चल जाता है
कई चेहरों पर से
अच्छाई का नकाब उतर जाता है
लोगों की नीयत का पता चल जाता है।
विराटनगर नेपाल


