मधेशी महिला और अच्छी शिक्षा के कारण ही मुझे चुना गया
नेपाली काँग्रेस की ओर से समानुपतिक सभासद रश्मि ठाकुर की बात करें तो अभी उनकी अपनी कोई खास पहचान नहीं । वह प्रजातान्त्रिक आन्दोलन के योद्धा अरविन्द कुमार

ठाकुर की बेटी हैं । अरविन्द ठाकुर वही हैं, जो २०१९ साल में तात्कालीन राजा महेन्द्र जब जनकपुर गये थे तो उन पर बम प्रहार करने की योजना में पुलिस के हाथ पड गये थे और तब से तकरीबन १७ वर्षजेल में ही रहे । अरविन्द ठाकुर की बेटी रश्मि सिर्फ२८ वर्षकी हैं और राजनीति में आयी है । कुछ ही वर्षपहले तक आसमान में पंछी जैसे उडÞने का अर्थात् पायलट बनने का सपना देखने वाली रश्मि ने पिता के सपने को साकार करने के लिए अपना लक्ष्य छोडकर एक नया रास्ता चुना । काँलेज से संविधानसभा की यात्रा और उनकी आगे की योजनाओं के संबन्ध में हिमालिनी प्रतिनिधि कञ्चना झा ने सभासद रश्मि ठाकुर से बातचीत की थी । प्रस्तुत है, बातचति के कुछ अंश –
० करीब पाँच महीने हो चुके हैं आपके सभासद बने हुए, कैसा लग रहा है इतनी कम उम्र में सभासद बनना –
– रश्मि ठाकुर -अच्छा लग रहा है, लेकिन बहुत बडÞी चुनौती है हमारे सामने, जनता ने जिस उम्मीद से हमें भेजा है उसके लिए बहुत मेहनत कर रही हूँ । लेकिन एक कटु सत्य बताना चाहती हूँ, कभी-कभी लगता है कि संविधानसभा भी कुछ लोगों के मुठ्ठी में है । हम जैसे सभासदों को बोलने नहीं दिया जाता है । एक सभासद हूँ, जनता की समस्या और आकाँक्षा को रखना चाहती हूँ लेकिन मौका नहीं दिया जाता । फिर भी अपनी ओर से जिम्मेवारी निभाने की पूरी कोशिश कर रही हूँ ।
० राजनीति में तो आपका नाम कहीं चर्चा में नहींं था, फिर अचानक से राजनीति में कैसे प्रवेश हुआ –
– जी, बिल्कुल सही बात है । मेरे पिताजी श्री अरविन्द ठाकुर के त्याग के कारण ही यह अवसर मुझे दी गई । और अगर देखा जाय तो मेरे नाम को स्वीकृति जिला या क्षेत्र से न होकर केन्द्र से ही दिया गया है ।
० और उससे भी ज्यादा देश के सबसे बडी पार्टर्ीीे आपको चुना – ये कैसे सम्भव हुआ –
– इसका सम्पर्ूण्ा श्रेय मैं अपनी पार्टर्ीीे सभापति को ही देती हूँ । समानुपातिक की जब बात चल रही ही थी पार्टर्ीीेरी माँ को यह स्थान देना चाहती थी लेकिन पिताजी की इच्छा थी की मैं राजनीति में जाउFm और उनके अधूरे सपने को पूरा करुँ । मेरी अपनी बात कहिये तो मैं राजनीति में नहीं आना चाहती थी पायलट बनना चाहती थी लेकिन पिताजी की इच्छा के आगे और उनके सपनें को साकार करने के लिए ही मैंने यह बीडÞा उठा लिया । और खास कर मधेशी महिला और अच्छी शिक्षा के कारण ही मुझे चुना गया । मेरे नाम पर पार्टर्ीीें र्सव सम्मति भी बनी और मुझे स्वीकार करना पडÞा ।
० अच्छा ठीक है , अब यह बताईये कि जिस कार्य के लिये आपको भेजा गया है , क्या वह कार्य होगा – कब तक बनेगा संविधान –
– निश्चित रूप में संविधान बनेगा । सभी सभासद जागरुक हैं, इसलिए मैं तो विश्वस्त हूँ कि संविधान बनने की जनता की जो आकाँक्षा है माघ ८ गते पूरी होकर ही रहेगी ।
० पाँच महीना बीत गया है, संविधान सभा का गति लेना तो दूर की बात है अभी तक पर्ूण्ाता भी नहीं ले पायी है । फिर शासकीय स्वरूप, संघीयता जैसे विषय में विवाद यथावत् है, ऐसे में कैसे संभव है समय में संविधान बनना –
– कमी कमजोरी तो है ही । लेकिन जनता से जो प्रतिबद्धता करके आये हंै वो तो पूरा करना ही होगा । समय पर संविधान बने इस पर संविधान सभा में दिन प्रतिदिन चर्चा हो रही है । पिछले संविधानसभा में जिस विषय पर सहमति बन चुकी थी, उससे आगे चलने की बात हो रही है । सभी दल और सभासद प्रतिबद्ध हैं इसलिए पर्याप्त विवाद होते हुए भी सहमति तो बनेगी ही ।
० अब बात करें महिला की, देश की आधी जनसंख्या का आप प्रतिनिधित्व करती है, वास्तव में पीछे हैं नेपाल में महिला, समस्या कहाँ है और आपके हिसाब से समाधान क्या हो सकता है –
– समस्या है समाज के मनोविज्ञान में । हमारे समाज में अभी भी महिला शिक्षा को महत्व नहीं दिया जा रहा है । सबसे पहली बात ही शिक्षा है । महिलाओं को अनिवार्य रूप से शिक्षा देनी चाहिए । इससे उनमें आत्म निर्भरता और निर्ण्र्ााकरने की क्षमता बढÞेगी ।
० अगर मधेशी महिला की बात करें तो हालात और भी बदतर है – वहाँ क्या समस्या है और उन लोगों को मूलधार मेंं लाने के लिए आपकी योजना क्या है –
– पूरे देश की बात करें या मधेश की , समाज का एक ही मनोविज्ञान है । महिलाओं को शिक्षित नहीं किया जा रहा है । हाँ, मधेश की बात करें तो समस्या थोडÞी ज्यादा है । हमारे समाज में बहू बेटी को आगे बढÞने नहीं दिया जाता है, चाहे वह कितनी भी पढÞी लिखी क्यों न हो । शिक्षा, रोजगार या राजनीति हर क्षेत्र में महिलाओं के साथ दूसरे दर्जे के नागरिक की तरह व्यवहार हो रहा है । इसके अलावा दहेज और महिला हिंसा की पीडÞा तो है ही । कहीं कदाचित लडÞकी कह दें कि दहेज लेनेवाले के साथ विवाह नहीं करूँगी तो सारे समाज में हाय तोबा मच जाती है । लेकिन जो भी हो आगे तो महिलाओं को आना ही पडÞेगा ।
० अब कुछ बातें पारिवारिक परिवेश की, तो प्रजातन्त्र के योद्धा अरविन्द ठाकुर की बेटी हैं आप, उनके योगदान को मधेश ही नहीं बल्कि सम्पर्ूण्ा राष्ट्र हमेशा स्मरण करेगा । आप भी समानुपातिक की ओर से संविधान सभा में आयी हंै, आप क्या करेंगी अपने क्षेत्र के लिए –
– ये करूँगी , वो करूँगीं जैसी बडÞी बडÞी बात मैं नहीं करना चाहती । देखिए, महिलाओं में क्षमता की कमी नही है , लेकिन बहुतों को अवसर नहीं मिला है । मंै अपना ध्यान महिला शिक्षा पर ही दूंगी । जो शिक्षित हैैं उनका समूह बनाकर समाज में चेतनामूलक अभियान चलाउंगी जिससे मधेश की हर महिला शिक्षित बनें । और अभियान के मार्फ मैं यह भी समझाने का प्रयत्न करूँगी की अगर बेटियाँ कुछ करना चाहती हैं तो उसे करने दें ।

