Sat. Apr 13th, 2024
himalini-sahitya

जारी हैं : वसन्त लोहनी

जारी हैं

हलवाहे को कुछ मिलता है
वह उसका परिश्रम है
मिट्टी के साथ घुलमिल होने का
भाता कहे या धरती माता का देन
उसका अपना कमाई हैं
इसी के बदौलत वह जीता हैं
पुस्तकों के साथ का सहवास भी
कुछ-कुछ ऐसा ही हैं
कुछ नीत, कुछ प्रीत,
और प्रसन्नता अमित
तभी तो मैं कहता हूं
यात्रा का सुख जारी हैं।



वसन्त लोहनी, काठमाण्डू



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