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शारदीय नवरात्र… आज ब्रह्माचारिणी की पूजा–अर्चना



काठमांडू, २९ असोज – आज शारदीय नवरात्र का दूसरा दिन है और इस दिन माँ दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्माचारिणी की पूजा–अर्चना की जाती है । माँ ब्रह्माचारिणी के नाम में ही उनकी शक्तियों की महिमा का वर्णन मिलता है। ब्रह्म का अर्थ होता है तपस्या और चारिणी का अर्थ होता है आचरण करने वाली । अर्थात तप का आचरण करने वाली शक्ति को हम बार–बार नमन करते हैं । माता के इस स्वरूप की पूजा करने से तप, त्याग, संयम, सदाचार आदि की वृद्धि होती है । जीवन के कठिन से कठिन समय में भी इंसान अपने पथ से विचलित नहीं होता है ।
कहते हैं नवरात्रि के दूसरे दिन पूजित ब्रह्मचारिणी आंतरिक जागरण का प्रतिनिधित्व करती हैं । माँ सृष्टि में ऊर्जा के प्रवाह, कार्यकुशलता और आंतरिक शक्ति में विस्तार की जननी हैं । ब्रह्मचारिणी इस लोक के समस्त चर और अचर जगत की विद्याओं की ज्ञाता हैं । इनका स्वरूप श्वेत वस्त्र में लिपटी हुई कन्या के रूप में है, जिनके एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे में कमंडल है । यह अक्षयमाला और कमंडल धारिणी ब्रह्मचारिणी नामक दुर्गा शास्त्रों के ज्ञान और निगमागम तंत्र–मंत्र आदि से संयुक्त हैं । भक्तों को यह अपनी सर्वज्ञ संपन्न विद्या देकर विजयी बनाती हैं। ब्रह्मचारिणी का स्वरूप बहुत ही सादा और भव्य है । अन्य देवियों की तुलना में ये अतिसौम्य, क्रोध रहित और तुरंत वरदान देने वाली देवी हैं ।



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