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आप सबके लिए : हेमा अधिकारी

 

आप सबके लिए -हेमा अधिकारी

बच्चे, आप तारे जमी के, आप प्यारे-दुलारे |
बिन आप सुनसान गलियाँ,घर-आगन हम सबको न्यारे ||
आप सबपे ही टिकी आशाएँ, परिवार, समाज आपके सहारे |
न भटके राह आप सभी, सोचा लिखू कुछ आप सबके लिए ||
कल ही बोले, गृहकार्य अब ,नियमित करेंगे स्वाध्याय हम |
आज खडे है, किए सर नीचे , जैसे अदालत में गुनहगार सब ||
भूले कहाँ है, छोड चाड आप , जिम्मेबारी जरुरत जीवन का अब |
तभी तो लगा मन में, अब सोचु कुछ आप सबके लिए||
क्या याद नहीं रहा वाद ?किया माता-पिता और गुरुजनो से |
इतना भी क्या मोह संचार से! जो बना रहा शून्य भविष्य में ||
ज्ञान-संचार साथ मिले तो बने, उन्नति का मार्ग जगत में |
तभी तो मन में दस्तक सी हुई , सो ये दीक्षा आप सबके लिए ||
सोचा कभी आपने कि आपसे जुडी कई अभिलाशाएँ|
भूले कैसे है आप इसमे, ये तो है प्रगति में बाधाएँ||
ज्यादा मीठा भी बन जाता, कभी जिन्दगी की कटु कथाएँ |
तभी तो दिल में आह-सी हुई, सो खास कुछ आप सबके लिए ||
इतना भी है सुन्दर ए संसार ! न था अवगत बचपन में|
पता चला है तो कुछ देर से, आप हो अवगत इस बात से ||
यही तो वजह है कि आतुर है; हम बताने ये बात आप सबसे||
तभी तो डाला बीज सीख का , सोच समझ आप सब के लिए ||
क्या लगता आपको होंगे विजयी,करके अपने ही मन की |
नहीं मिलता जीवन में कुछ खास नहीं गर जी तोड मेहनत की ||
बोझ नहीं शिक्षा,अनुशासन ही गहना, ये दो आवश्यकताएँ हम सबकी |
तभी तो इच्छा जाहिर हुई मन की , सो ये पक्तियाँ आप सबके लिए||
हमें शिकायत नहीं कि, क्यो हो रहे संचार के सब आप दास |
डर और आशंका इस बात का,कहीं न हो जाए क्षमाता का नाश ||
लाभ जरूर उठाए विज्ञान का, ना करे सृजनात्मकता का उपहास |
तभी चले साथ सुज्ञान-विज्ञान, सो ये ज्ञान आप सबके लिए ||
चाहे हम सब उस जहाँ में,पले बढे और सँवरे आप |
जिस जहाँ में मानव करे मान , बुद्धि, विवेक और श्रम का ||
नहीं पूर्ण मनुष्य इस जग में,लिए साथ नीति-नियम का |
नहीं भूले राह आप जीवन का, सो संकेत आप सबके लिए ||
लंबे अनुभव का है निचोड ये, नहीं अतिरिक्त बोझ कोई |
स्वीकरिए समझ आवश्यकता ,निराश नहीं होंगे आप कोई ||
प्रयोग ही सही एक बार, आजमाइए आदेश नहीं ये औषधि|
दूर हो अज्ञान रूपी अंधकार, सो लिखा संदेश आप सबके लिए||
भरोसा इस बात का कि, निराश नहीं होंगे हम आप सबसे |
नर हम है, पशु -पक्षी भी जीवन जीते मान और मर्यादा से||
आशिष, शुभकामना हमारी आपको, जिये अमूल्य जीवन शान से|
जिम्मेवारी जरूरत आप सबकी, सो लिखा मैंने आप सबके लिए ||

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हेमा अधिकारी
कवि लेखक
काठमांडू

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