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काठमांडू, २७ कात्तिक – कात्तिक शुक्ल प्रतिपदा एवम् यमपञ्चक अर्थात् तिहार का तीसरा दिन, आज गाय की पूजा की जाती है ।
गाय को पवित्र मानकर पूजा करने की वैदिक सनातन काल की परम्परा है । गाय के दूध को माता के दूध समान अमृत माना गया है । गाय की दूध माता के दूध के समान ही पौष्टिक कहा गया है । इसलिए गाय को गौमाता कहकर सम्मान दिया जाता है ।
गाय की पूजा के बाद आज के गाय को अच्छे पकवान खिलाए जाते हैं ताकि गाय से प्राप्त होने वाली हमेशा शुद्धता प्राप्त हो सके । ये एक तरह का धार्मिक विश्वास है ।
आज गाय की पूजा कर सावन शुक्ल पूर्णिमा के दिन में दाहिने हाथ में बाँधकर रक्षाबन्धन गाय के पूंछ में बाँध देने से मृत्यु पश्चात गाय ही स्वर्ग जाने के लिए वैतरणी नदी को पार करवाती है । यह धार्मिक विश्वास है ।



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