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सातों प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की बैठक आज, अधिकार प्रत्यायोजन करने के लिए संघ को दिया जाएगा दबाब

 

काठमांडू, पुष १२ – संविधान अनुसार संघ को जो अधिकार देने चाहिए थी वो नहीं मिला है और असहयोग किया गया है यह कहते हुए सातों प्रदेश सरकार के मुख्यमन्त्री संघीय सरकार को दबाब दे रहे हैं ।
सातों प्रदेश के मुख्यमन्त्री गुरुवार बागमती प्रदेश के राजधानी हेटौँडा में मिलने वाले हैं । यह मिलन सभा संघीय सरकार से संविधान अनुसार अधिकार प्रत्यायोजन के लिए मांग करने वाले हैं ।
इससे पहले गत असार में पोखरा में बैठक हुई थी जिसमें मुख्यमंत्रियों ने प्रदेश को प्रत्यायोजन करने का सम्पूर्ण अधिकार छ महीने के भीतर प्रत्यायोजन कर देने की मांग की थी ।
लेकिन समय के समाप्त होने के बाद भी संघीय सरकार ने हमारी मांग को पूरा नहीं किया । मुख्यमंत्रियों ने फिर से मोर्चा बन्दी कसने लगे हैं । गण्डकी प्रदेश के मुख्यमन्त्री सुरेन्द्रराज पाण्डे ने कहा है कि – संघीय सरकार से अधिकार मांगने में और दबाब देने की अवस्था दिखाई दी उसके बाद ही यह बैठक बुलाई गई है ।
उन्होंने बताया कि ‘आज सातों प्रदेश के मुख्यमन्त्री हेटौँडा में जमा होंगे । मैं भी जा रहा हूँ । संघीय सरकार द्वारा संविधान अनुसार अधिकार प्रत्यायोजन नहीं करना, यह विषय हमारे लिए जरुरी विषय है , अधिकार नहीं मिलने से प्रदेश कैसे काम कर सकेगा ?,’ उन्होंने कहा, ‘इससे पहले राष्ट्रीय समन्वय परिषद की बैठक में जो निर्णय लिया गया उसका भी अभी तक कार्यान्वयन नहीं किया गया है ।’

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इससे पहले जो पोखरा में बैठक हुई थी उसमें छः महीने का समय दिया गया था । बैठक में ६ महीने के भीतर सङ्घीयता कार्यान्वयन में जो अस्पष्टता और दोहोरोपन दिख रहा है इसे हटाया जाए, जनशक्ति व्यवस्थापन और राष्ट्रीय तथ्याङ्क को एकीकृत अभिलेख प्रणाली विकास किया जाए, साझा सूची में रहे अधिकार सम्बन्धी कानून निर्माण में सहकार्य किया जाए, प्रदेश का जो अधिकार है उसे प्रत्यायोजन किया जाए आदि निर्णय किया था ।
लेकिन संघ सरकार ने इस ६ महीने के अवधि में ऐसा कोई काम नहीं किया इसलिए एक बार फिर से सभी मुख्यमन्त्री दबाब देने की अवस्था में पहुँच चुके हैं ।
इससे पहले मधेश प्रदेश के मुख्यमन्त्री सरोजकुमार यादव ने प्रधानमन्त्री दाहाल से मिलकर अलग ही रूप में ज्ञापन पत्र दिया था । उन्होंने एक महीने का समय देकर अल्टिमेटम समेत घोषणा की थी । लेकिन संघीय सरकार पर इसका भी कोई असर नहीं दिखा । कुछ ही दिन पहले सत्तारुढ दल नेपाली काँग्रेस ने भी प्रदेशस्तर में किए गए सम्मेलनों में जब प्रदेश अधिकार के विषय में बातचीत की तो इस चर्चा में भी यही बात निकल कर आई कि अगर संघ ने प्रदेश को अधिकार नहीं दिया तो यह आन्दोलन का भी रुप ले सकती है ।

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