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बज़्जिका साहित्यिक पत्रिका के विशेषांक “मनोहर सुगंध” का सामूहिक विमोचन:



रौतहट (नेपाल) आज २०८० पुष ३ गत्ते बज्जिका साहित्य समाज सरलाही द्वारा आयोजित एवं समाज के अध्यक्ष रामचन्द्र महतो की अध्यक्षता में आयोजित बज़्जिका  साहित्यिक पत्रिका के विशेषांक के रूप में प्रकाशित साहित्यिक कृति “मनोहर सुगंध” के सामूहिक विमोचन कार्यक्रम में बज्जिका भाषा और साहित्य कार्यकर्ता डॉ. कमलेश्वर कुमार सिन्हा ने कहा कि साहित्य अमरता प्रदान करता है. श्री सुधा राजेश्वर माध्यमिक विद्यालय, बलरा नगर पालिका 11 छतौना, सरलाही में आयोजित शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डाॅ. सिन्हा ने यह भी कहा कि लेखक साहित्य सृजन और रचनाएँ प्रकाशित करके अमर हो गए हैं। इस विशेषांक के  साहित्यिक कृति के लेखक के माध्यम से आदरणीय मनोहर जी  इतिहास में स्थान बनाकर अमर हो गए।

बज़्जिका साहित्यिक पत्रिका के विशेषांक के रूप में प्रकाशित साहित्यिक कृति “मनोहर सुगंध” के सामूहिक विमोचन कार्यक्रम में डाॅ. सीमा सिंह ने प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि बज्जिका बहुत पुरानी भाषा है और वह पहले से ही हिंदी साहित्य में लिखती रही हैं और अब भी वह बज्जिका साहित्य में लिखेंगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामवृक्ष महतो ने कहा कि सूबे के सभी विद्यालयों में बज्जिका भाषा को माध्यम बनाकर बच्चों को शिक्षा दी जाये. विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि वे बज्जिका भाषा और साहित्य को लेखन और आर्थिक दोनों दृष्टिकोण से समर्थन देने को तैयार हैं और उन्होंने गर्व से स्पष्ट किया कि उनके विद्यालय में बज्जिका भाषा पढ़ाई जा रही है.

आज के इस कार्यक्रम के केन्द्रबिन्दु आध्यात्मिक संज्ञान से सुशोभित आदरणीय साहित्यकार श्री मुरली मनोहर जी के जिबनी पर महोत्तरी, मड़ई निबासी साहित्य प्रेमी अजय कुमार झ जी के द्वारा रचित ( हम्मर मनोहर ) नामक कविता कार्यक्रम के उद्घोषक श्री किसुन दयाल जी ने अपनी मधुर आवाज और भावुक शैली मे गाकर सबको आह्लादित कार दिया।

हम्मर मनमोहन !      

सरलाही देवी के आँगन नगर छतौना धाम। रामललित ज्योतिदेवी के मनमोहन छथि प्राण।। १

रानाकाल मे भी शिक्षा के परिबारिक संज्ञान। ज्ञानकुंज मे खेलैत लेली अहाँ अक्षर के ज्ञान।।  २

पांडिचेरी से हो संस्कारित ऊ परिवार महान। आर्यस्याम विष्णु काका के अहाँ दिव्य संतान।।  ३

भूत अभौतिक ज्ञान पूस्प् से जे हो सुशोभित प्राण। संस्कार शालीनता हुनकर सदा बढाबे मान ।।    ४

ज्ञानाचारण से हो संप्रेषित ऊहे आचार्य है जान। वरदहस्त शारदा के शिरपर अहाँ छी कवि महान।।   ५

गीता, दर्शन, उपनिषद, साहित्य, इतिहास, पुराण।  झरना जईसन सदा प्रवाहित मनमोहन के ज्ञान।।  ६

बज़्जीका के कोहिनूर अहाँ छी हमरा सबके सान। चीर जीवन हो आउर अमरता इहए हमर अरमान।।  ७

नेपाल के बज्जिका भाषा विकास परिषद के संस्थापक अध्यक्ष शिवचंद्र साह ने कहा कि रौतहट और सरलाही भाषा और साहित्य के प्रति जागरूक हो गए हैं, जबकि बारा और सरलाही बज्जिका जागरूकता के मामले में पिछड़ रहे हैं। बलरा नगर पालिका 11 के वार्ड अध्यक्ष सुखल सहनी ने कहा कि पौराणिक साहित्य से बहुत कुछ सीखने को मिलता है और उन्होंने कहा कि वे पौराणिक, माध्यमिक और आधुनिक साहित्य का अध्ययन करते हैं। संजय साह मित्रा, स्वास्थ्य पदाधिकारी रामवृक्ष महतो, अजय कुमार सिंह, सतीश कुमार सिंह, राम स्वार्थ राय, कृष्णनंदन सिंह, नरेंद्र सिंह, अवधकिशोर सिंह, विनोद प्रसाद सिंह, संतोष कुमार सिंह, प्रद्युम्न कुमार सिंह, मुकुंद कुमार सिंह, अभियंता राकेश गुप्ता व बज्जिका साहित्य संगम की ओर से आयोजित कार्यक्रम में रौतहट के अध्यक्ष किशुनदयाल श्रीकृष्ण सहित अन्य लोग शामिल हुए।

विद्वान साहित्याकार मनमोहन सिंह मनोहर ने कहा है कि यद्यपि वह कम से कम पचास वर्षों से मैथिली, नेपाली और हिंदी भाषाओं में विभिन्न शैलियों में लिख रहे हैं, लेकिन वह मुश्किल से अपना पहला कृति प्रकाशित कर पाए हैं। इतिहास, संस्कृति और दर्शन तथा पौराणिक साहित्य के मर्मज्ञ सिंह ने कहा कि उन्हें बज्जिका के बारे में बहुत बाद में पता चला और उन्होंने साहित्य रचना शुरू कर दी। अजयकुमार झा



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