Mon. Feb 26th, 2024

माइती नेपाल द्वारा पत्रकारों के साथ अन्तरक्रिया

नेपालगन्ज/(बाँके) पवन जायसवाल । बाँके जिला के नेपालगन्ज में हाम्रो आवाजः चेलीबेटी बेचबिखन मुक्त समाज मानव बेचबिखन तथा ओसार पसार विरुद्ध संचारकर्मियो से माइती नेपालद्वारा पौष १५ गते आइतवार आयोजित पत्रकारों से अन्तरक्रिया किया ।



माइती नेपाल के संयोजक केशवराज कोइराला ने सन् २०२३ एक वर्ष की अवधि में नेपालगन्ज नाका होकर जोखिमपूर्ण यात्रा करनेवालों की संख्या ५ सौ ९ रही थी वो लोगों को सीमा नाका से उद्धार किया गया था बताया ।

नेपाल पत्रकार संघ, बाँके सचिव कमल डाँगीद्वारा सञ्चालित वह कार्यक्रम माइती नेपाल, नेपाल पत्रकार संघ, बाँके के संयुक्त आयउोजन में किया गया था  पत्रकार अन्र्तक्रिया कार्यक्रम में सन् २०२३ की एक वर्ष के अवधि में नेपालगन्ज नाका होते हुये जोखिमपूर्ण यात्रा करनेवालों की संख्या वृद्धि हो रही है । 

केशव कोइराला के अनुसार जोखिमपूर्ण यात्रा करने वाले जिला में सब से अधिक बाँके ८२ लोग । जिस में बैजनाथ गावँपालिका के २८कोहलपुर नगरपालिका के १९, खजुरागावँपालिका के १४, नेपालगन्ज उपमहानगरपालिका और राप्तीसोनारी गाँवपालिका से ९÷, डुडुवा गाँवपालिका १ और. जानकी गाँवपालिका से २ रहे थे । सुर्खेत जिला से ६० बर्दिया जिला से ५३, सल्यान जिला से ३६, दैलेख जिला से ३०, जाजरकोट जिला से २७, रुकुम जिला से २०, रोल्पा जिला से १९, कैलाली जिला से १६, जुम्ला जिला से १४ रहे थे । जिस में ब्रहमण÷क्षेत्री २ सौ ५, जनजाति १ सौ ३०, दलित १ सौ ६२, आदिवासी १२, १८ वर्ष से कम उमर के बालिका १ सौ ८२, बालक १६, १८ वर्ष से उपर के ३ सौ ११ जोखिम यात्रा में रहे थे माइती नेपाल नेपालगन्ज ने जनाया है ।

सन् २०२१ में ४ सौ ३४, सन् २०२२ में ५ सौ २९ और सन् २०२३ में ५ सौ ९ लोगों को सीमा से उद्धार किया गया था । केशव कोइराला के अनुसार सन् २०२१ मा ४ सौ ३२, सन् २०२२ में ५ सौ ३४, सन् २०२३ में ५ सौ २० लोगों को  पारिवारिक पुनर्मिलन कराया गया था । सन् २०२१ में ४ सौ ३२ लोगों को पारिवारिक पुनर्मिलन कराया गया था । सन् २०२२ में सीमा नाका से परामर्श देकर घर वापस भजा गया संख्या ५ सौ २७ लोग सन् २०२३ में ४ सौ ७९ लोग  रहे थे माइती नेपाल नेपालगन्ज ने जानकारी दी । इसी तरह खोजतलास के लिये  निवेदन देने वालों की संख्या ६ सौ ६२ रही थी जिस में २ सौ ७८ लोग मिले थे । उसी अवधि में बेचविखन की मुद्दा २ दर्ता हुआ था ।

गायब हुये बालबालिका एवं महिलाएँ की खोजतलास तथा उद्धार के लिये आया निवेदन ६सौ ६२ जिस मध्ये २ सौ ७८ लोग मिले थे । इसी तरह भारत तथा खाडी मुलुक से उद्धार किया गया संख्या १२ लोग भारत से रहे थे । बर्दिया जिला से ७ जिस में बढैयाताल गा. पा. ६लोग और गेरुवा गा. पा. १, दैलेख जिला से २ लोगबाँके जिला से २ लोग जिस में नेपालगन्ज के १ और बैजनाथ गा.पा से १ को उद्धार किया गया था जिस में ब्रहमण ÷क्षेत्री  ८ लोग, जनजाति १, दलित ३ लोग की उद्धार किया गया था, जिस में १८ वर्ष के कम उमर की बालिका ७ लोग, १८ वर्ष के कम उमर के बालक ३ लोग, १८ वर्ष के उपर के २ रहे थे ।

सन् २००२ से सन् २०२३ तक जोखिमपूर्ण यात्रा कर रहें लोगों को सीमा से ९ हजार ७७ लोगों की उद्धार किया गया था, मानव बेचबिखन तथा ओसार पसार के बारे में जानकारी देकर ९ हजार १ सौ ८० लोगों को पारिवारिक मिलन कराया गया था, श्रम और यौन शोषण में पडे ३ सौ ७७ लोगों की उद्धार किया गया था, सीमा से परामर्श देकर ५ हजार २ सौ २९ लोगों को घर वापस कराया गया था, खोजतालाश के लिये निवेदन दर्ता ८ हजार २ सौ ३४, जिस में१ हजार ९ सौ १६ लोग मात्र मिले, घरेलु हिंसा में निवेदन दर्ता ४ सौ ५८, समाधान ३ सौ ५८, सीपमूलक तालिम प्रदान किया गया किशोरी की संख्या १ सौ ९२ लोग, बेचबिखन की घटना मुद्दा दर्ता संख्या ९५, जर्बजस्ती करणी (बलात्कार) घटना ४९ रही थी वह अन्र्तक्रिया कार्यक्रम में जानकारी दी गई थी ।



About Author

यह भी पढें   संत शिरोमणि रवि दास की 647वीं जयंती मनायी गयी
आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: