Mon. Feb 26th, 2024

नेपाली संस्कृति परिषद समिति का 17 वाँ अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन गुजरात के कर्णावती में सम्पन्न



नेपाली संस्कृति परिषद समिति (पंजीकृत)का 17 वाँ अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन गत 24 व 25 दिसम्बर 2023 को गुजरात के कर्णावती स्थित स्वामीनारायण मन्दिर परिसर में सम्पन्न हुआ। इस सम्मेलन में भारत के 16 राज्य तथा नेपाल से आए करीब 300 प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दो दिवसीय सम्मेलन के पश्चात गुजरात के कुछ प्रमुख स्थलों का भ्रमण कार्यक्रम भी सम्पन्न हुआ। जिसमे जामनगर श्री नौतनपूरी धाम, श्री द्वारिकाधीश मन्दिर, श्री वेटद्वारिकाधीश मन्दिर, श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, श्री सोमनाथ मन्दिर, अक्षरधाम मन्दिर दर्शन तथा एकता नगर स्थित स्टेच्यु आफ युनिटी का भ्रमण शामिल था। सम्मेलन का उद्देश्य परिषद के कार्य प्रगति की समिक्षा, विस्तार, भावी योजना, सनातन संस्कृति का संरक्षण संवर्धन करना तथा धर्मान्तरण के खतरों से नेपाली समाज को जागृत कराना था।

सम्मेलन का उद्घाटन परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष अशोक चौरसिया व परिषद के महासचिव राजेन शिवाकोटी ने किया जिसकी अध्यक्षता उद्योगपति बासुदेव खनाल ने किया था।
उद्घाटन के द्वितीय सत्रको संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कर्णावती महानगर के सह-कार्यवाह भानु भाई चौहान ने राष्ट्रीय चरित्र निर्माण में संघ की भूमि पर गहन प्रकाश डाला तथा भारत वर्ष की गौरवशाली इतिहास से प्रतिनिधियों को अवगत कराया। विश्व हिन्दु परिषद गुजरात के क्षेत्रिय महासचिव अशोक रावल ने श्रीराम जन्म भूमि मन्दिर आन्दोलन तथा देश भर चल रहे आयोध्या श्रीराम अक्षत कलश यात्रा तथा एक जनवरी 2024 से 15 जनवरी तक देश भर चलाए जारहे अक्षत, निमंत्रण पत्र व श्रीराम मन्दिर चित्र घर घर जाकर देने की योजना पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा करीब तीन हजार साधुसन्तों एवं करीब इतने ही प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति में 22 जनवरी को भव्य श्रीराम मन्दिरका उद्घाटन होगा जो विश्व के नेपाली समाज के लिए ऐतिहासिक क्षण है। कारण माता सिता नेपाल जनकपुर की है। तीसरे सत्र में विभिन्न राज्यों के प्रदेश महासचिवों द्वारा वर्ष 2023 में परिषद के गतिविधियों का व्यौरा प्रस्तुत की गई तथा प्रदेश अध्यक्षों ने वर्ष 2024 में परिषद के कार्य योजना प्रस्तुत की। सम्मेलन में नेपाली समाज के सामने दिखाई दे रहा धर्मान्तरण, चर्च, चीन, माओवाद, ईस्लामिक खतरों तथा समाधान विषय पर चिन्तन की गई। इन खतरों से समग्र सनातन समाज को जागृत करने, समृद्ध नेपाली संस्कृतिक, भाषा, परम्परा आदि के संरक्षण, प्रकृति पर्यावरण संरक्षण संवर्धन तथा पश्चिमि संस्कृतिक प्रदुषण से समाज को बचाने हेतु व्यापक जनजागरण योजना पर सम्मेलन में विचार किया गया।
सम्मेलन के दुसरे दिन संस्कृत के विद्वान आर्य समाज के प्रदेश महासचिव गुजरात विश्व विद्यालय के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डा.कमलेश शास्त्री ने की तथा वेद व विज्ञान पर प्रकाश डालते हुए अपने धर्म संस्कृति की महानता व इसके वैज्ञानिक आधारों पर व्याख्यान दिए। समापन समारोह में स्वामीनारायण सम्प्रदाय के महन्त श्री भगवत्प्रियदासी स्मावी तथा श्री प्रशान्त स्वरूप स्वामी ने स्वधर्म तथा सेवा की महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए भारत व नेपाल की साझा संस्कृति, दो देश एक आत्मा के दर्शन को समझाया। भारत विरोधी तत्व दोनो देशों के प्रचीन संबंधो को तोडने की हर कुटिल चाल चल रहे हैं इससे सभी को सतर्क रहने आह्वान किया। स्वामीनारायण सम्प्रदाय समग्र नेपाली समाज की मदद व सेवा में तत्पर है तथा धर्मान्तरण को रोकने व स्वधर्म में वापसी का निरन्तर प्रयास कैसे कर रहा है इससे प्रतिनिधियों को अवगत कराया। उन्होने विदेशों में स्वामीनारायण मन्दिरों के विस्तर से मानव प्रेम एकता भाइचारा व सौहार्द को संवर्धित करने का काम कर रहा है इसका उल्लेख करते हुए मध्य पूर्विय देश दुबई में 900 करोड रूपए की लागत से बन रहे अक्षर धाम मन्दिर से सभी को अवगत कराया।
परिषद के मुख्य संरक्षक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय कार्यकारीणी सदस्य व वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश कुमार ने विश्व में सनातन धर्म तथा संस्कृति का किस तरह विस्तार हो रहा है इसका उल्लेख करते हुए मुसलमान व इसाई भी अपनी जडो को समझने का प्रयास करने लगे हैं बताया। हिन्दु जैसे जैसे संगठित व जागृत होंगे वैसे वेसै धर्मान्तरित ईसाई मुसलमा स्वधर्म की जडो को समझेगा।अखण्ड भारत के संकल्प को दोहराते हुए सभी मुसलमा व ईसाईयो के पूर्वज हिन्दु ही थे। इस बात को वो आज मानने लगे हैं उन्होने बताया। श्रीराम मन्दिर उद्घाटन के शुभ अवसर पर इसाई मुसलमानों से भी दीप जलाने, चर्चों मस्जिदों को भी रोशन करने की आग्रह करने को प्रतिनिधियों से कहा। परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष अशोक चौरसिया ने बताया कि सन् 2006 के 9 सितम्बर को दिल्ली के उदासीन आश्रम में संघ के तत्कालीन सर संघचालक श्री कूप.सी.सुदर्शन जी के सानिध्य तथा विश्व हिन्दु परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक सिंहल, संघ के सह-सर कार्यवाह श्री सुरेश सोनी, नेपाल के तत्कालीन वन मंत्री गोपाल राई तथा नेपाल नागरिक समाज के प्रमुख हस्ती सुन्दर मणि दिक्षित की उपस्थित में एवं इन्द्रेश कुमार के मार्गदर्शन में भारत तथा नेपाल के करीब 600 प्रतिनिधियों के तीन दिन के मंथन पश्चात परिषद की स्थापना की गई थी। तब से अब तक परिषद भारत तथा नेपाल के नेपाली गोरखाओं में स्वधर्म, संस्कृति स्वभाषा, तथा भारत नेपाल के संबंधों को और मजबूत करने एवं नेपाली समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य व समृद्धि की दिशा में कार्य करते आ रहा है। श्री चौरसिया ने बताया कि सन् 2006 से प्रत्येक वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जारहा है। गत वर्ष यह सम्मेलन काशी में आयोजित किया गया। वर्ष 2021 में यह सम्मेलन इन्दोर में 2019 में काठमांडू में, इससे पूर्व वृन्दावन, हरिद्वार, कोटा, सिलीगुडी, अंयोध्या, गुवाहाटी, इटानगर, पटना, कर्णाल, गुरूग्राम, मुम्बई, बंगलोर ,गान्तोक आदि स्थानों पर सम्मेलन आयोजित किया जा चुका है। इस वर्ष के सम्मेलन की सफलता पर कर्णावती के रायपुर स्थित आर्य समाज मन्दिर में यज्ञ-हवन कार्यक्रम सम्पन्न किया गया जिसमें सैकड़ो प्रतिनिधि सामेल हुए। विश्व शान्ति, विश्व मंगल तथा दैविक शक्ति के आह्वान के साथ हवन सम्पन्न कर सभी प्रतिनिधि को विदा किया गया। स्मरण रहे गुजराती व नेपाली भाषा में करीब पचास प्रतिषत मेल है। सोमनाथ व पशुपतिनाथ ने दोनो देशों के मजबूत संबंधो अक्षुण रखा है।



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