संविधान में देश से अलग होने के अधिकार को शामिल करने पर जोर
काठमान्डौ भाद्र ५ गते . मधेशी नेताओं ने मधेश को दा प्रअेश बनाने पर अपनी सहमति जताई है किन्तु कुछ मुद्दों पर असहमति अब भी बरकरार है । संवैधानिक राजनीतिक संवाद तथा सहमति समिति के सभापति डा। बाबुराम भटराई ने मधेश के बुद्धिजीवियों के साथ संविधान में सम्बोधन करने के लिए मधेश के सवाल पर परामर्श लिया । इस बातचीत में सी के लाल, तुलानारायण साह, दीपेन्द्र झा और सी के राउत आदि बुद्धिजीवियों की उपस्थिति थी ।
राज्यपुनः संरचना आयोग या समिति के प्रतिवेदन को आधार मानना होगा और पहचान बाटमलाइन होगा लगभग सभी के यही मत थे । दीपेन्द्र झा के अनुसार मधेशी बुद्धिजीवी मधेश के दो प्रदेश में बंटने वाली बात पर तो सहमत हो सकते है। किन्तु किसी भी अवस्था में उत्तर दक्षिण मंजूर नहीं । मधेश प्रदेश की सीमा चुरे क्षेत्र को बनाया जाय यह सलाह भी दी गई ।
मधेशी को जिन नजरों से देखा जाता है उस नजरिए में बदलाव की जरुरत पर सबने बल दिया । समानुपातिकता को स्वीकार करना, समावेशी को मौलिक अधिकार के अन्तर्गत रखने के लिए केन्द्र की आवश्यकता विवाद सुलझाने के mिए संवैधानिक अदालत की आवश्यकता, नागरिकता के अधिकार को सुनिश्चित करना आदि महत्वपूर्ण मुद्दे थे, जिन पर बातें हुईं ।
बातचीत में सीके राउत ने संविधान में देश से अलग होने के अधिकार को शामिल करने पर जोर दिया जिस पर बाबुराम भटराई ने अपनी सहमति भी जनाइ ।

