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राममय बनता विश्व, नेपाल के लिए भी भावनाओं से भरा हुआ महत्वपूर्ण समय है : श्वेता दीप्ति

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डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादकीय हिमालिनी अंक 1, जनवरी 2024 ।

कहहु तात अस मोर प्रनामा ।
सब प्रकार प्रभु पूरनकामा ।।
दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी ।।

अयोध्या में भगवान राम के मंदिर निर्माण का ५०० सालों के संघर्ष और हजारों लोगों के बलिदान के बाद सपना पूरा हो रहा है । सम्पूर्ण विश्व के हिन्दुओं की नजर आज अयोध्या पर टिकी है । जहाँ लोगों में उत्साह अपनी चरम सीमा पर है वहीं भारत का विपक्ष इस बात पर नाराज है कि राम मंदिर के मसले को मोदी मय बना दिया गया है । यहाँ तक कि विपक्ष कांग्रेस ने तो राम मंदिर उद्घाटन का आमंत्रण ही अस्वीकार कर दिया है । इस बात पर बस एक ही बात कही जा सकती है कि खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे ।

डॉ. श्वेता दीप्ति

बात उन दिनों की है जब भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी १९९२ में १४ जनवरी को अयोध्या पहुँचे थे । उस समय उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी और कलराज मिश्र के साथ अयोध्या में कसम ली थी कि वे जब राम मंदिर का निर्माण होगा तभी वह यहां लौटेंगे । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तब बीजेपी की कन्याकुमारी से कश्मीर तक एकता यात्रा पर थे । जब नरेंद्र मोदी अयोध्या पहुंचे तो उन्होंने ‘जय श्री राम’ के नारों के बीच संकल्प लिया था कि मंदिर निर्माण का सही समाधान निकालेंगे और कसम खाई कि वह राम मंदिर निर्माण के बाद ही यहां लौटेंगे । और आज यह सुअवसर उन्हें मिला है जब वो २२ जनवरी को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा में विधिवत शामिल होंगे । राम मंदिर की आधारशिला उन्होंने कमल के फूल से रखी थी । भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने १९९२ में ही एकता यात्रा के श्रीनगर नगर में समापन पर धारा ३७० को हटाने का संकल्प लिया था । जिसे वह पहले ही पूरा कर चुके हैं ।

मोदी भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं, जिनका सीधा संघर्ष राम मंदिर के निर्माण से जुड़ा हुआ है । पूर्व प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या यात्रा के प्रभारी का काम भी पीएम मोदी ने ही संभाला था । ऐसे में यह समय उनके सपनों के सच होने का समय है ।

श्री राम नेपाल के जंवाई हैं । इसलिए यह समय सिर्फ भारत के लिए महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि नेपाल के लिए भी भावनाओं से भरा हुआ महत्वपूर्ण समय है । दिवाली सिर्फ भारत में नहीं नेपाल में भी मनाई जाएगी । मिथिला की परंपरा के अनुसार जनकपुरधाम और सीतामढी से माँ जानकी के ससुराल भार पहुँचाया जा चुका है क्योंकि जनकपुरधाम और पुनौरा धाम दोनों ही माँ जानकी की स्थली है । यह सौभाग्यपूर्ण दिन सदियों के संघर्षों के बाद आया है और हम उसके साक्षी बन रहे हैं ।

राम मंदिर का महत्व नेपाल के लिए आर्थिक दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है । नेपाल की अर्थव्यवस्था का आधार पर्यटन है, इसलिए यह माना जा रहा है कि भारत में राम मंदिर के निर्माण के बाद जनकपुर में श्रद्धालुओं की आमद बढ़ेगी और इससे जनकपुर और ज्यादा समृद्ध होगा । इसलिए नेपाल सरकार और मधेस को इस ओर अवश्य ध्यान देना चाहिए । रामायण गलियारे की परियोजना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है ।



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