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वैदिक मन्त्र और शंखनाद के साथ ‘सनातनी रामा’ पुस्तक विमोचन

 



काठमांडू, २४ जनवरी । जनवरी २२ के दिन भारतीय शहर राम जन्मभूमि अयोध्या राममय हो रहा था, जहां राममुर्ति में प्राणप्रतिष्ठा की जा रही थी । इस शुभ अवसर पर पूरे विश्व में राम नाम का भजन, कीर्तिन और पूजापाठ हो रहा था । इसी अवसर पर काठमांडू में विवेकानन्द झा लिखित पुस्तक ‘सनातनी रामा’ भी विमोचन हो रहा था ।
विशेष अतिथि पूर्वराष्ट्रपति परमानन्द झा और प्रमुख अतिथि संहिता शास्त्री अर्जुन प्रसाद बास्तोला तथा अन्य धिार्मिक अतिथियों ने वेदपाठ, स्वस्तिवचन और शंकनादके साथ पुस्तक का विमोचन किया । पुस्तक पिल्ग्रिम्स पब्लिकेशन प्रा.लि. द्वारा प्रकाशित हैं । ‘सनातनी रामा’ पिल्ग्रिम्स पब्लिकेशन के ही संस्थापक रामानन्द तिवारी जी के अध्यात्मिक जीवन तथा चेतना में आधारित पुस्तक है । कार्यक्रम की अध्यक्षता भी रामानन्द तिवारी या नि सनातनी रामा ने ही की थी ।
विमोचित पुस्तक पर टिप्पणी करते हूए प्रमुख अतिथि अर्जुन प्रसाद बास्तोला ने कहा कि सनातनी धर्मावलम्बियों के लिए पुस्तक प्रेरणादायी है । उन्होंने कहा कि पुस्तक सम्पूर्ण सनातनियों की जीवनशैली को प्रतिनिधित्व करता है । उनका यह भी मानना है कि हर सनातिन को परम्परा और संस्कार सिखाने के लिए भी पुस्तक महत्वपूर्ण है । इसीतरह विशेष अतिथि तथा पूर्व उपराष्ट्रपति परमानन्द झा ने कहा कि अयोध्या में राम की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा करते वक्त उसी शुभतिथि में पुस्तक का विमोचन होना विशेष महत्व है ।
‘सनातनी रामा’ के प्रति टिप्पणी करते हुए हिन्दू विद्यापिढ के प्राचार्य तथा आध्यात्मिक वक्ता चिन्तामणि योगी ने कहा कि सनातनी जीवनशैली और चिन्तन को जानने के लिए पुस्तक महत्वपूर्ण है । इसीतरह उन्होंने यह भी कहा कि भगवान राम विश्व मानव जगत के लिए एक आदर्श पात्र हैं, एक आदर्शपात्र ही एक सनातनी भी हैं । उन्होंने आगे कहा– ‘राम जानो या नजाने, राम मानो या नमानो, राम सारा संसार के लिए एक आदर्श पात्र हैं, चेतना हैं ।’ योगी जी ने शुभेच्छा व्यक्त किया कि अयोध्या में सम्पन्न प्राणप्रतिष्ठा से मानव जीवन में भी सनातनी जीवन शैली का प्राणप्रतिष्ठा हो सके । उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल में राजा तथा राजपरिवार के संबंध में सनातनी को उद्धार होना चाहिए । योगी ने कहा– हम लोग वेद की बात करते हैं, राम की बात करते हैं, कृष्ण की बात करते हैं, ऐसे व्यक्तियों को राजा के संबंध में बात करते वक्त थोड़ा उद्धार होना चाहिए ।’
इसीतरह लिटिल एन्जल कलेज अफ म्यानेजमेन्ट के प्राचार्य, साहित्यकार तथा समालोचक मित्रबन्धु पौडेल ने पुस्तक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पुस्तक सिर्फ रामानन्द तिवारी जी की अध्यात्मिक जीवनी पर आधारित नहीं हैं, यह सनातनियों का जीवनशैली भी है । उन्होंने कहा कि पुस्तक में धार्मिक अतिवाद की बात है, नेपाल में हो रहे जबरजस्त धर्म परिवर्तन की बात है । पौडेल ने यह भी कहा है कि पूर्वीय वाङ्मय के प्रति आज जो हस्तक्षेप हो रहा है, उसी का परिणाम आज समाज और राजनीति अपराधपूर्ण कर्म की ओर अग्रसर हो रहा है । टिप्पणीकार पौडेल ने यह भी कहा कि रामानन्द तिवारी की विचार में नेपाल धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होना दुःख की बात है ।
इसीतरह पुस्तक के लेखक विवेकानन्द झा जी का कहना है कि उन्होंने यह पुस्तक २१ दिनों में तैयार की है । बताया गया है कि रामानन्द की जीवन यौवनकाल में विलाशिता से भरिपूर्ण रहा, लेकिन बाद में उन्होंने आत्महत्या की प्रयास भी की, लेकिन कालान्तर में वह अध्यात्मिक जीवन में रुपान्तरित हो गए । लेखक झा के अनुसार सनातनी धर्म के प्रति आस्थावान व्यक्ति और सनातन को जानने के लिए इच्छुक व्यक्ति को ‘सनातनी रामा’ पुस्तक पढनीय और संग्रहनीय है ।

पुस्तक विमोचनका भीडियो

https://www.youtube.com/watch?v=JW0fDebiVNs



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