स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह की आज २२ वीं पुण्यतिथि मनाई गई
काठमांडू, माघ १० – नेपाल सद्भावना पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष एवं मधेशबाद के प्रनेता स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह की आज २२ वीं पुण्यतिथि मनाई गई । इस अवसर पर “गजेन्द्र बाबू के बिचार और वर्तमान में मधेश की राजनीति” विषय को लेकर गजेन्द्र नारायण सिंह अध्ययन केन्द्र द्वरा काठमांडू में एक कार्यक्रम किया गया । कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि के रुप में पूर्व उप प्रधानमंत्री राजेन्द्र महतो ने कहा कि हम गजेन्द्र बाबू का ही अनुसरण कर रहे हैं । उनके बहुत सपने थे जिनमें कुछ तो पूरे हुए और कुछ अधूरे रह गए हैं । तो ऐसे में अब समय आ गया है उनके जो कुछ सपने अधूरे रह गए हैं उन्हें पूरा करना है । आज हम बंट गए हैं मुस्लिम, थारु,जनजाति सभी कहते हैं हम मधेशी नहीं हैं । लेकिन गजेन्द्र बाबू का मानना था कि हम सब मधेशी हैं और अपने अधिकार, अपनी पहचान के लिए लड़ना जरुरी है ।

आगे उन्होंने यह भी कहा कि गजेन्द्र बाबू हिन्दी में बात करते थे । उनका कहना था कि मेची से लेकर महाकाली तक को अगर कोई भाषा जोड़ सकती है तो वह हिन्दी है । हम सबकी अपनी अपनी मातृभाषा है । मैथिली, भोजपुरी, अवधि, थारु और भी बहुत सी भाषा है लेकिन हमें मेची से लेकर महाकाली तक अगर खुद को जोड़ना है तो वह काम हिन्दी कर सकती है । पहाड़ तथा मधेश को भी जोड़ने का काम अगर कोई भाषा कर सकती है तो वह हिन्दी ही है । हिन्दी सम्पर्क भाषा है इसलिए यही बोलना चाहिए । पहाड़ और मधेश को जोड़ने की एक ही कड़ी है और वह है भाषा ।

इसी तरह आज के कार्यक्रम में कुछ युवा भी शामिल थे उन्होने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि गजेन्द्र बाबू पार्टी नहीं परिवार बनना चाहते थे । जैसे परिवार में सभी मिलजुल कर रहते हैं ऐसे ही मधेश में एक पार्टी हो जो परिवार की तरह रहे । आज जातिगत राजनीति हो रही है ।
परिवारवाद की राजनीति हो रही है लेकिन उनके समय में ऐसा कुछ नहीं था । तो अनुसरण उनकी बातों को करें । सिखना है तो गजेन्द्र बाबू से सिखें जिन्होंने अपने पास कुछ भी नहीं रखा लेकिन आज के नेताओं के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है ।
आज की जनता धीरे धीरे चलने वाले को नहीं वरन जो तीव्र गति से काम करता है उसके साथ रहना चाहती है ।



