Sat. Feb 24th, 2024

बीरगंज का बंद चीनी कारखाना फिर से सुचारू करना आसन नहीं

बीरगंज, 1 फरवरी 2024



कुछ दिन पहले सरकार ने बंद  उद्योगों की हालत देखकर उन्हें संचालित करने का निर्णय लिया था। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने  कहा कि सरकार ने बारा, परसा और विशेष आर्थिक क्षेत्र एसईजेड के ऑन-साइट निगरानी कार्यक्रम के दौरान बंद  उद्योगों को संचालित करने का निर्णय लिया है।लेकिन स्थानीय उद्योगपतियों का कहना है कि बीरगंज चीनी मिल को दोबारा चलाना आसान नहीं है. फैक्ट्री बंद होने के तुरंत बाद इसके नाम पर मौजूद अरबों की संपत्ति भी लूट ली गई थी . चैत 2059 में चीनी मिल के बंद होने के बाद, कारखाने के नाम पर अधिकांश भूमि पर अतिक्रमण कर लिया गया है और मौजूदा भौतिक बुनियादी ढांचे जीर्ण-शीर्ण और अनुपयोगी हैं।

सरकारी संपत्ति का गबन कैसे होता है, इसका उदाहरण बीरगंज चीनी मिल को देखा जा सकता है। बीरगंज मेट्रोपॉलिटन सिटी के मध्य में स्थित बीरगंज चीनी फैक्ट्री को बंद हुए दो दशक से अधिक समय हो गया है। चीनी मिलों के संचालन के दौरान बनाए गए एक दर्जन गोदाम जर्जर होकर ढहने की स्थिति में हैं। लंबे समय से फैक्ट्री के अंदर साफ-सफाई और रख-रखाव के अभाव के कारण मशीनें खराब हो गई हैं और फैक्ट्री परिसर में  फैली हुई  है।

बीरगंज चीनी कारखाना, जो तत्कालीन सोवियत संघ सरकार के वित्तीय और तकनीकी सहयोग से  2021  माघ से सञ्चालन में आया  था, 2059  साल चैत  में बंद कर दिया गया था। उस समय  कारखाने की प्रारंभिक उत्पादन क्षमता 90,000 क्विंटल प्रति वर्ष थी।

बाद  में  परसा, बारा और रौतहट के 50% किसानों के गन्ने की खेती से जुड़ने के बाद, 2034 में इस कारखाने में आधुनिक मशीनें लगाई गईं और इसका वार्षिक उत्पादन 135,000 क्विंटल तक बढ़ गया।

पूर्व कर्मचारी रत्न शमशेर राणा का कहना है कि हालांकि फैक्ट्री के अंदर लगे लोहे के पाइपों में जंग लग गई है और वे काम करने लायक नहीं हैं, लेकिन अन्य मशीनें अभी भी सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, “लोहे की छड़ें काम नहीं कर रही हैं, अन्य मशीनें अभी भी उसी स्थिति में हैं जैसे हमने उन्हें छोड़ा था।”
2046 से बीरगंज चीनी मिल में काम कर रहे कर्मचारी रत्न शमशेर राणा ने राजनीतिक कलह के कारण लाभदायक फैक्ट्री के अचानक बंद होने का अनुभव सुनाया। ‘चिनी मिल का  ३ करोड पैसा फिक्स डिपोजिट में  नेपाल बैंक में रखना चाह रहे थे किन्तु बैंक ने  इतनी बड़ी रकम रखने से मना कर दिया .  ‘प्रजातन्त्र आने के बाद चीनी  मिल के  अध्यक्ष और  प्रबन्धक द्वारा अपने परिजनों एवं  पार्टी के  कार्यकर्ता को  भर्ती करने के बाद  कारखाना धराशायी होता चला गया , उनमे वफ़ादारी और इमानदारी नहीं थी .’

चैत 2059 में जब बीरगंज चीनी फैक्ट्री बंद हुई तब गिरिजा प्रसाद कोइराला प्रधान मंत्री थे, नारायणजी रौनियार कारखाने के महाप्रबंधक थे और जयराम बराल चीनी मिल के अध्यक्ष थे। बीरगंज के व्यापारियों का मानना है की  इतने वर्षों के बाद मिल को शुरू करना आसन नहीं होगा .



About Author

यह भी पढें   आज का मौसम...काठमांडू में छिटपुट बारिश होने की संभावना
आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: