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बौद्धिक पलायन  की भयावह स्थिति को रोका जाना चाहिए : प्रधानमंत्री “प्रचंड”

 

काठमांडू.1 फ़रवरी 24

प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल “प्रचंड” ने कहा है कि बौद्धिक पलायन  की भयावह स्थिति को रोका जाना चाहिए. प्रधानमंत्री ने आज राजर्षिजनक विश्वविद्यालय की 7वीं बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों के बौद्धिक पोषण के लिए साधना और योग्यता तथा रचनात्मक तत्परता के पूर्ण समावेश से पलायन को रोका जा सकता है।

यह उल्लेख करते हुए कि राजर्षिजनक विश्वविद्यालय से निकलने वाले प्रत्येक स्नातक में शिक्षा की वर्तमान छवि और भविष्य अंतर्निहित है, प्रधान मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा प्रणाली में युगों-युगों तक सुधार किया जाना चाहिए। राष्ट्र का नेतृत्व करने में सक्षम जनशक्ति का उत्पादन आज का प्रमुख कार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार होना चाहिए।

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प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा कि वैश्वीकरण का सबसे अधिक प्रभाव शिक्षा क्षेत्र पर पड़ा है और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालयों की नीति, पाठ्यक्रम, शिक्षा पद्धति और कार्यशैली में गुणात्मक सुधार की जरूरत है. उन्होंने कहा, ”मेरी अपेक्षा है कि नवप्रवर्तन पर आधारित प्रतिस्पर्धी शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए.”

प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालय की स्थापना की अल्प अवधि में चिकित्सा शिक्षा, प्रबंधन और कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्नातक और स्नातकोत्तर शैक्षिक कार्यक्रम संचालित करने के लिए आभार व्यक्त करते हुए अपेक्षित सफलता के लिए सक्रिय रहने का सुझाव दिया।

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प्रधान मंत्री प्रचंड ने यह भी आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय की भूमि और भवन के बुनियादी ढांचे की कमी के कारण आने वाली कठिनाइयों को अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ धीरे-धीरे संबोधित किया जाएगा, प्रधान मंत्री प्रचंड ने कहा कि वह  विश्वविद्यालय के अन्य शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजन के लिए सरकार की और  से नीति और प्रबंधकीय समर्थन का समर्थन करेंगे ।

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