Mon. Feb 26th, 2024

गुल्जार–ए– अदब द्वारा मासिक गजल गोष्ठी का आयोजन

नेपालगन्ज /(बाँके) पवन जायसवाल  । बाँके के नेपालगञ्ज में रहे उर्दू साहित्यकारों की संगठन गुल्जारअदब ने माघ २७ गते शनिवार को मासिक गजल गोष्ठी किया ।



गुल्जारअदबद्वारा प्रत्येक महीने के अन्तिम शनिवार को उर्दू साहित्यकारोंद्वारा मासिक गजल गोष्ठी होती आ रही है उसी आनुसार महेन्द्र पुस्तकाल के सभाहाल में साहित्यकारों ने अन्जामजपÞmा क्या है यह वकत बताएगा मिश्ररा पर गजल वाचन किये थे । 

वरिष्ठ उर्दू शायर तथा गुल्जारअदब बाँके के अध्यक्ष हाजी अब्दुल लतीफ शौक की अध्यक्षता में सर्वर नेपाली, गुल्जारअदब बाँके सचिव मोहम्मद मुस्तफा अहसन कुरैशी, हाजी अब्दुल लतीफ शौक लगायत लोगों ने गजल वाचन किये थे । वह कार्यक्रम में बव्बु फारुकी की सहभागिता थी ।

हाँजी अव्दुल लतीफ शौक ः

कब तक के फलक पा वह बर्क गिराएगा

किस किस के नशेमन को जालिम वह जलाएगा 

जिस रोज नशेमन से उठेगा कोई शोला

रोना ही पडे उसको कुछ खून के आँसंू कल 

रोने के लिये शायद पानी भी न पाएगा 

कुछ वक्त से डर जालिम कुछ वक्त से डर जालिम 

अन्जामे जफा क्या है ये वक्त बताएगा

मोहम्मद मुस्तफा अहसन करैशी ः

कमजोर को ताकतवर जब जब भी सताएगा 

गरकाब उसे करने मूसा कोई लायगा

ये बहता लहू हरगिजÞ बेकार न जायगा

अन्जामे जफा कया है ये वक्त बतायगा

जो आतिशे नमरुदी को आज जलाए हो

उस का ही कोई शोला खुद तुमको जलायगा

जो बेजा गुरुर अपनी ताकत पे करेगा वो

अपने सिवा औरों को खातिर में न लायगा

थक हार के भी दिल में जो अज्म जवाँ रकखें

हालात में तबदीली एक दिन वो लायगा

हर एक मुतकब्बिर का जिल्लत ही मुकद्दर है

किब्र उसका जुरुर उसको पस्ती में गिरायगा

बातिल के खिलाफ अहसन जम जाय कहम जिस के

एक रोजÞ यकीनन को वो तारीख बनायगा ।

सर्वर नेपाली ः

क्या अर्श से लाया था क्या छोड़ के जाएगा

दो रोजÞ की मोहलत में क्या खुल्द बसाएगा

एक सिम्त नजर तेरी एक सिम्त नजÞारे हैं 

दीवार के पार इन्साँ कया देख भी पाएगा

क्या रोशनी फैलेगी एक घर को जलाने से

दस्ती को बनाने में क्या बस्ती को जलाएगा

पथरीली जमीनों में कोइ शाखे तमन्ना को 

बोए तो भला कैसे क्या शजरा उगाएगा

उस शख्स को बातों ए बहशते दिल ना कर

पतझड़ के महीने में बरसात बराएगा

जंजीर को खन्कार से मतलब नहीं दुनिया को

इस गीत का मतलब तो दीवाना बताएगा

सर्वर के पिटारे में दो चार हैं खत उसके

कुछ खत वो दिखाएगा कुछ खत वह छुपाएगा



About Author

यह भी पढें   नेपाल की अर्थ व्यवस्था १०–१२ लोगों के हाथ में है – चन्द्र भण्डारी
आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: