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बलात्कार या षडयंत्र ! क्या गलती केवल पुरुषों की है ? : कंचना झा

कंचना झा, हिमालिनी अंक जनवरी024। २०१६ में एक हिन्दी सिनेमा आई थी पिंक शायद याद हो सभी को । इस सिनेमा में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने एक वाक्य कहा था नो मिंस नो । न सिर्फ एक शब्द नहीं अपने आप में एक पूरा वाक्य है । ये नो हर रिश्ते में काम करता है । घर परिवार हो, पति पत्नी हो, प्रेमी प्रेमिका हो,या फिर हो आपका दोस्त । कोई आपके साथ कुछ गलत नहीं कर सकता यदि आपकी अपनी सहमति नहीं हो । रिश्ता कभी एकतरफा नहीं बनता है । दो लोगों की सहमति, हामी भरने के बाद ही कोई रिश्ता आगे बढ़ता है । लेकिन अगर किसी वजह से किसी गलत दोस्त के चक्कर में पड़ गए तो आप क्या करेंगे । शायद वहाँ आपका नो कहना भी काम नहीं करेगा । ये एक सच्चाई है । लेकिन उस रास्ते तक पहुँचना ही क्यों ?

इस न शब्द जो एक पूरा वाक्य है इसे जोड़ते हैं अभी के संदर्भ से तो आजकल नेपाल में के हर घर परिवार में एक ही बात की चर्चा की जा रही है वह है क्रिकेटर संदीप लामिछाने की । उनपर बलात्कार का आरोप लगाया गया है । अदालत का कहना कि पीडि़ता नाबलिग नहीं थी । लेकिन संदीप ने उसे प्रलोभन दिया, उसकी आर्थिक अवस्था का फायदा उठाया था इन बातों को देखते हुए सजा सुनाई है । जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई कि जिला अदालत ने उन्हें आठ वर्ष की सजा सुनाई है उसके तुरन्त बाद उन्हें नेपाल क्रिकेट टीम से निलंबित कर दिया गया है । कारण जानते ही हैं कि आज से एक वर्ष पहले उनपर बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था । संदीप ने बार बार इनकार किया लेकिन सबूतों की माने, पीडि़ता की सुने तो तो सबकुछ उसके खिलाफ है और जिला अदालत ने उन्हें फैसला सुना दिया । अब संदीप शायद कभी क्रिकेट नहीं खेल सकेंगे । गलती की सजा तो मिलनी ही चाहिए । लेकिन यहाँ एक बात बहुत ही जोर शोर से उठाई जा रही है कि दोषी तो दोनों हैं तो सजा सिर्फ लड़के को क्यों ?

लेकिन सवाल तो यहाँ यह भी उठ रहा है कि जब वो क्लोज कैंप में थे तो वहाँ से बाहर कैसे निकले ? जबकि इस घटना के दूसरे ही दिन संदीप को बाहर खेलने के लिए जाना था । यहाँ भी उसकी गलती दिखती है ।
जब जिला अदालत ने संदीप को आठ वर्ष की सजा सुनाई तो न केवल उसके प्रशंसक वरन आम आदमी का भी यही कहना कि ये तो सहमति की बात थी । अगर कोई लड़की सोच समझकर किसी लड़के के साथ गई है तो वह उसकी मर्जी है इसलिए अगर लड़के को सार्वजनिक किया गया है तो पीडि़ता को भी सार्वजनिक किया जाए । कुछ लोगों ने खुलकर मीडिया में आकर कहा कि कानून ने महिलाओं की इतनी छूट दे रखी है कि वो हर गलती में बच जाती है । बचारे पुरुष फंसकर रह जाते हैं ।

बहुतो ने प्रत्यक्ष रूप से कहा कि जाने वक्त में तो अकेली गई । यानी जबतक पैसा दे रहा था तबतक ठीक और जैसे ही पैसे में कमी हुई कि बलात्कार हो गया । ये तो ठीक नहीं है । लड़की को भी सजा मिलनी चाहिए ।
सभी ने एक स्वर में कहा संदीप जिसने अपने अच्छे खेल को दिखाकर देश का नाम रौशन किया, वह अभी बहुत आगे जाता लेकिन अब उसका भविष्य और करियर दोनों बरबाद हो गया। नेपाल का हीरो एक गलती के कारण जीरो बन गया । संदीप और पीडि़ता दोनों दोस्त थे । दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे । दोनों एक साथ हंसी खुशी गए । बहुतों ने सीसीटीभी फुटेज की भी बात की और कहा कि उस फुटेज को देखने से तो ऐसा कुछ नहीं लगता तो सजा केवल संदीप को ही क्यों ?
वैसे ये कोई पहला केस नहीं है नेपाल के लिए । इससे पहले अभिनेता पल शाह के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था । बालयौन दुराचार के मुद्दा में उन्हें जेल जाना पड़ा था । शुटिंग के क्रम में एक १७ वर्षीया नाबालिग ने पल शाह पर आरोप लगाया कि पल ने उसके साथ बलात्कार किया है । हलांकी बाद में वो मुकर गई थी अपनी बातों से । जब पल शाह जेल से बाहर आए तो उन्होंने अपनी बातों को मीडिया के सामने रखते हुए कहा था कि जब मैं जेल में था मेरी नई फिल्म आई थी । मैं दर्शको के साथ अपनी फिल्म देखना चाहता था, उनसे अपनी प्रशंसा और आलोचना सुनना चाहता था लेकिन ऐसा कुछ न हो सका । अगर अभी की बातें करें तो पल शाह कही नजर नहीं आते हैं ।

इसी क्रम में एक और नाम जुड़ा गायक रविराज साह का । उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ । किरण नाम की एक युवती ने रवि पर बलात्कार करने का आरोप लगाया । और उसे भी सजा हो गई । एक उभरता कलाकार जिसे बहुत आगे जाना था एक केस के कारण एक मुद्दे के कारण करियर चौपट । इस मुकाम तक पहुँचने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं वो तो वही जानता है । लेकिन एक गलती और सबकुछ खत्म ।
जब निर्दोष कहकर अदालत ने जेल से मुक्त किया रविराज को तो उन्होंने मीडिया में कहा था कि किरण ने मेरे करियर के साथ खिलवाड़ किया है । जो समय मेरा बीत गया क्या वह वापस आ सकता है ?
उन्होंने बातचीत के ही क्रम में कहा था कि पुरुषों के लिए भी एक अलग कानून बनना चाहिए । ऐसा नहीं होता है कि हमेशा लड़के ही गलत हो । लड़कियां भी गलत हो सकती हैं । उनके लिए भी सजा की व्यवस्था होनी चाहिए । कानून गलत नहीं है लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा है । पुरुष और महिला दोनों ही महत्वपूर्ण अंग हैं । दोनों एक दूसरे के पूरक हैं । ऐसा नहीं है कि महिला पीडि़त नहीं हैं । लेकिन निर्दोष को सजा नहीं मिले ।
संदीप ने १६ वर्ष की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरु किया । प्रसिद्धि पाई । लोगों की आँखों का तारा बना । चकाचौंघ की इस दुनिया में शायद अपने आप को रोक नहीं सका ।

 

पल शाह एक नौजवान जिसने सफलता पाई । स्टार बना लोगों की नजर में आने लगा । पैसा कमाया । और कहते है जब आप बहुत कम उम्र में पैसा और प्रसिद्धी पा लेते हैं तो मन भटकने लगता है । क्या करें कभी कभी ऐसी ही चकाचौध में हमारे आज के युवा फंस रहे है । आधुनिकता का भूत उनपर इतना सवार है कि वें अपना अच्छा बुरा कुछ नहीं सोच पाते हैं । ये दोनों पर लागू होती है । लड़के और लड़कियां दोनों ही आधुनिकता को अपनाते हुए बहुत बार गलत कर जाते हैं लेकिन इसका हर्जाना केवल और केवल पुरुष को ही क्यों ? इस बात को लेकर एक सवाल एक बहस हो रही है समाज में । यहाँ न का मतलब क्या समझा जाए । जहाँ सबकुछ होता है सहमति से लेकिन अचानक से कुछ होता है और बलात्कार का मुद्दा लग जाता है । और सबकुछ एक ही पल में समाप्त ।

अब इसी सिलसिले में एक और नाम जुड़ता है कृष्ण बहादुर महरा का । पूर्व सभामुख पर एक महिला ने आरोप लगाया कि महरा ने उनसे बलात्कार करने की कोशिश की ।
यह घटना कुछ इस तरह की है कि संसद सचिवालय में ही कार्यरत इस महिला ने शिकायत दर्ज की कि दशमी के कुछ दिन पहले महरा मेरे घर आए और मुझसे जबरदस्ती करने का प्रयास किया ।
वैसे बाद में मीडिया में यह भी खबरें आई कि महरा और वो महिला कर्मचारी बहुत दिनों से एक दूसरे को जानते थे । पहले भी महरा कई बार उके घर जा चुके थे । दोनों साथ साथ बाहर आते आते थे । दोनों की अच्छी बनती थी फिर अचानक से क्या हुआ । बहुतों ने यह भी कहा कि वो महिला महरा की प्रेमिका थी और हमेशा महरा से पैसे का लेन देन करती थी । शायद बाद में यही कहीं कोई बात हुई की ?
वैसे अभी तक जितने का नाम लिया गया है चाहे वह संदीप की बात हो, पल शाह की बात हो, महरा की बात हो या फिर करें रविराज की बातें । तो कहीं न कहीं बहुत मिलता जुलता सा है । गलती चारों से कहीं न कहीं तो हुई है लेकिन कभी कभी यह भी लगता है कि ये सभी किसी षडयंत्र का शिकार तो नहीं हुए हैं । अब एक बात और करें कि ऐसा नहीं है कि महिला और पुरुष का संबंध कोई आज का है । यह तो प्रकृति के शुरुआत के साथ ही आई है लेकिन एक सीमा के तहत । और आज उसी सीमा का सभी दुरुपयोग कर रहे हैं फिर चाहे पुरुष हों या महिला ।

रही बात नेपाल की तो एक कहावत तो याद ही होगा – अंधेर नगरी चौपट राजा । यहाँ की हर बात निराली है । यहाँ की व्यवस्था, नियम कानून, संविधान,या फिर संधी की बात करें सबकुछ आयातित हैं । आवश्यतकता से भी ज्यादा नकल की गई है यहाँ । मौलिकता नहीं है इसमें । लेकिन उग्र सोच और सस्ती लोकप्रियता के लिए, बाहर के कुछ नियमों को लाद दिया गया है यहाँ । जिसका लगातार दुरुपयोग हो रहा है ।
ऐसी परिस्थिति में अभिताभ बच्चन जो पिंक में कहते हैं कि नो जो अपने आप में एक पूरा वाक्य है । अपने जीवन शैली में जितनी जल्दी हो सकें अपना लें । पुरुषों के लिए उतना ही बेहतर हैं । पुरुषों के साथ ही नहीं यह बात महिलाओं पर पर भी लागू होती हैं । वो भी इस बात का मान रखें कि किसी को हिम्मत के साथ नो कह सकें । अपनी मर्यादा का ख्याल रहें । समाज की सीमा को समझें ।

कांचना झा



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